Uttar Pradesh: योगी सरकार ने उत्तर प्रदेश के मदरसों में शिक्षकों के वेतन जारी करने को लेकर एक ऐतिहासिक और बेहद सख़्त फैसला लिया है। यह फैसला उन सभी शिक्षकों पर सीधा असर डालेगा जो सरकारी ग्रांट से वेतन पाते हैं। आदेश के मुताबिक वेतन जारी होने से पहले अब हर शिक्षक को एक विशेष नियम का पालन करना होगा। यह नियम है आधार बेस्ड बायोमेट्रिक अटेंडेंस और सेवा अभिलेखों का डिजिटल सत्यापन।
दरअसल सरकार फर्जी या Ghost Teachers पर लगाम लगाना चाहती है, जो कागज़ों पर तो मौजूद हैं, लेकिन मदरसों में पढ़ाने नहीं आते। सरकार ने ये भी तय किया है कि जो शिक्षक इस नियम का पालन नहीं करेंगे, जिनका बायोमेट्रिक सत्यापन पूरा नहीं होगा, या जिनके रिकॉर्ड में कोई गडबडी पाई जाएगी, उनका वेतन तत्काल प्रभाव से रोक दिया जाएगा।

Uttar Pradesh: क्या है शमशुल हुदा मामला?
ब्रिटेन में जा बसे संदिग्ध मदरसा शिक्षक शमशुल हुदा का मामला सामने आने पर शासन ने चौकसी बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। प्रदेश में कुल 561 मदरसे सरकार से अनुदान पाते हैं। इनमें कुल 2.31 लाख छात्र-छात्राएं पंजीकृत हैं। अनुदानित मदरसों में कार्यरत शिक्षकों और शिक्षणेतर कर्मचारियों की कुल संख्या 9889 और 8367 है। हाल ही में एटीएस की जांच में मदरसा शिक्षक शमशुल के संदिग्ध अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन सामने आए हैं।
शमशुल 12 जुलाई 1984 को मदरसा दारूल उलूम अहले, सुन्नत मदरसा अशरफिया मुबारकपुर (आजमगढ़) में सहायक अध्यापक आलिया के पद पर नियुक्त किया गया था। 2007 से वह ब्रिटेन में रह रहा था और 19 दिसंबर 2013 को उसने ब्रिटिश नागरिकता हासिल कर ली। अल्पसंख्यक कल्याण विभाग ने 2007 से 2017 तक बिना उसकी सेवा पुस्तिका की जांच किए प्रति वर्ष वेतन वृद्धि की गई। इतना ही नहीं 1 अगस्त 2017 से स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति प्रदान करते हुए पेंशन भी स्वीकृत कर दी गई। (Uttar Pradesh)
एटीएस की जांच: संदिग्ध कनेक्शन और शासन की कार्रवाई
एटीएस की रिपोर्ट के आधार पर इस मामले में कई अधिकारी फंस गए हैं। साथ ही अल्पसंख्यक कल्याण विभाग ऐसी स्थिति दुबारा उत्पन्न न होने देने के लिए कड़े कदम उठा रहा है। एक-एक शिक्षक की हाजिरी सत्यापित होगी, उसके बाद ही भुगतान होगा।
जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी मदरसों का औचक मुआयना करके भी देखेंगे कि जिन शिक्षकों को वेतन दिया जा रहा है, वे नियमित मदरसों में आ भी रहे हैं या नहीं। अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के एक अधिकारी ने नाम न छापने के अनुरोध के साथ बताया कि शिक्षकों की उपस्थिति चेक करने के नियम पहले से भी थे, अब इन निर्देशों पर कड़ाई से अमल करना है। ताकि, शमशुल जैसे मामले सामने नहीं आ सके। (Uttar Pradesh)









