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वाराणसी से सीएम योगी का वार, बोले- काशी को बदनाम करने की कोशिश…; भ्रामक प्रचार पर सख्त एक्‍शन की चेतावनी

Varanasi Manikarnika Ghat

Varanasi Manikarnika Ghat: काशी के मणिकर्णिका घाट पर चल रहे पुनर्विकास कार्य को लेकर बीते कुछ दिनों से राजनीतिक घमासान मचा हुआ है। जेसीबी से प्राचीन संरचनाओं को ढहाए जाने की तस्वीरों से उत्तर प्रदेश समेत पूरे देश में माहौल गरमा गया है।

विपक्षी दलों के लगातार हमले के बीच आज मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ वाराणसी पहुंचे, जहां उन्होंने चल रहे विकास कार्यों, विशेष रूप से मणिकर्णिका और हरिश्चंद्र घाट के पुनरुद्धार का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने उन्होंने वाराणसी के मणिकर्णिका घाट पर दाह संस्कार से जुड़ी चुनौतियों पर जोर दिया।

मुख्यमंत्री ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बोलते हुए कहा कि कुछ लोग है जो काशी को बदनाम करते हैं। मुझे याद है, जब काशी विश्वनाथ का काम शुरू हुआ था तो उसके खिलाफ साजिश की थी। आज भी वही लोग काशी को बदनाम कर रहे हैं और टूटी हुई मूर्तियों की तस्वीरें सोशल मीडिया पर डाल कर भ्रम फैला रहे हैं और भ्रम फैला रहे हैं कि मूर्तियां तोड़ी जा रही हैं। इससे ज़ादा सफेद झूठ कुछ नहीं हो सकता।

सीएम योगी ने कहा कि आज काशी को एक नई वैश्विक पहचान मिली है। पीएम ने हमेशा इस बारे में बात की है कि काशी की प्राचीन विरासत को संरक्षित करते हुए, इसे देश और दुनिया के सामने एक नए रूप में भी प्रस्तुत किया जाना चाहिए। वहीं, विपक्ष (सपा, कांग्रेस) आरोप लगा रहा है कि विकास के नाम पर सदियों पुरानी मूर्तियां, विशेषकर देवी अहिल्याबाई होल्कर की प्रतिमा, तोड़ी गई हैं।

परियोजना का उद्देश्य सुविधाओं का आधुनिकीकरण करना (Varanasi Manikarnika Ghat)

मुख्यमंत्री ने आगे मानसून के मौसम में दाह संस्कार की कठिनाइयों पर जोर दिया, जिनमें अधजले शव, प्रदूषण और दाह संस्कार प्रक्रिया के दौरान गरिमा और पर्यावरणीय सुरक्षा बनाए रखने के लिए संघर्ष शामिल है। उन्होंने कहा कि मणिकर्णिका घाट और महाराजा हरिश्चंद्र घाट दो मुख्य घाट हैं, जहां दाह संस्कार किए जाते हैं। आप मणिकर्णिका घाट पर दाह संस्कार की प्रक्रिया देख सकते हैं। दाह संस्कार सनातन धर्म के 16 अनुष्ठानों में से एक है, और इसे सम्मानपूर्वक और स्वच्छ वातावरण में किया जाना चाहिए।

आदित्यनाथ ने आगे कहा कि सरकार की इस परियोजना का उद्देश्य परंपरा को बनाए रखते हुए सुविधाओं का आधुनिकीकरण करना है। उन्होंने आगे कहा कि सरकार इन अनुष्ठानों के सुचारू संचालन में सहायता करने के लिए प्रतिबद्ध है, और इसलिए कुछ परियोजनाएं शुरू की गई हैं। मानसून के मौसम में दाह संस्कार बहुत मुश्किल हो जाते हैं, और कभी-कभी शव आधे जले हुए ही रह जाते हैं। कल्पना कीजिए कि शोक संतप्त परिवारों को क्या सहना पड़ता है। (Varanasi Manikarnika Ghat)

सीएम योगी ने विपक्ष पर साधा निशाना

कांग्रेस की आलोचना का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री ने धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व को संरक्षित करने के उद्देश्य से सरकार द्वारा वित्त पोषित पहलों का जिक्र किया। इन सुविधाओं में श्मशान चबूतरे, प्रतीक्षा क्षेत्र, लकड़ी भंडारण, शौचालय, रैंप, जल निकासी और अपशिष्ट प्रबंधन शामिल हैं। उन्होंने आगे कहा कि जब इस उद्देश्य से कोई परियोजना शुरू की जाती है, और वह भी सरकारी अनुदान के बिना, तो वे (विपक्ष) इसे बदनाम करने का अपना एजेंडा शुरू कर देते हैं।

मुख्यमंत्री की प्रदूषण के खिलाफ रणनीति

सीएम योगी ने प्रदूषण के बारे में भी बात की। उन्होंने कहा कि कुछ प्रथाओं के कारण गंगा के पानी में जैव रासायनिक ऑक्सीजन मांग (BOD), रासायनिक ऑक्सीजन मांग (COD), नाइट्रेट और फ्लोराइड की मात्रा बढ़ सकती है। इसके अलावा, कई परिवार पूर्ण दाह संस्कार के लिए पर्याप्त लकड़ी का खर्च वहन नहीं कर सकते, जिसकी वजह से अपूर्ण दाह संस्कार होते हैं और कई बार पूरे शवों को नदी में विसर्जित कर दिया जाता है।

मुख्यमंत्री ने हजारों वर्षों से इन रीति-रिवाजों का पालन करते आ रहे डोम समुदाय को परंपराओं को सुचारू रूप से जारी रखने के लिए समर्थन का आश्वासन दिया। (Varanasi Manikarnika Ghat)

अतिक्रमण हटाने की मुहिम

वाराणसी में अतिक्रमण हटाने की मुहिम को लेकर उठे विवाद के बाद यह घटना सामने आई है। अतिक्रमण और पुरानी इमारतों को हटाने के लिए भारी मशीनरी और बुलडोजर का इस्तेमाल किया गया। इस मुहिम के दौरान कई प्राचीन मूर्तियां और कलाकृतियां मिलीं। स्थानीय अधिकारियों का कहना है कि इन्हें निर्माण के बाद दोबारा स्थापित करने के लिए संस्कृति विभाग ने सुरक्षित कर लिया है। (Varanasi Manikarnika Ghat)

स्थानीय लोगों और पुरोहितों ने चिंता व्यक्त की कि आधुनिक निर्माण से घाट का प्राचीन आध्यात्मिक स्वरूप बदल सकता है। कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के राजनीतिक नेताओं ने इस निर्माण की आलोचना करते हुए अहिल्याबाई होलकर की प्रतिमा सहित विरासत को नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाया।

मणिकर्णिका घाट का जीर्णोद्धार और पुनर्विकास

मणिकर्णिका घाट के जीर्णोद्धार और पुनर्विकास की योजना का शुभारंभ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 7 जुलाई, 2023 को आधारशिला रखने के साथ हुआ था। इस परियोजना की कुल जीर्णोद्धार लागत लगभग 17.56 करोड़ रुपये होने की उम्मीद है। (Varanasi Manikarnika Ghat)

प्रशासन की मास्टर प्लान के तहत मणिकर्णिका घाट से सिंधिया घाट तक के क्षेत्र को सुव्यवस्थित और विस्तृत किया जाएगा। इसमें घाटों पर आने वाले तीर्थयात्रियों के लिए बेहतर सुविधाएं, दाह संस्कार के लिए आने वालों के लिए सुगम पहुंच और बैठने की व्यवस्था, और सिंधिया घाट से संपर्क को मजबूत करना शामिल है।

नए मणिकर्णिका घाट में छत पर वीआईपी बैठने की व्यवस्था होगी। इसके अलावा, रैंप, दर्शन क्षेत्र, बैठने की व्यवस्था और अन्य बुनियादी सुविधाओं पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। मणिकर्णिका घाट पर एक लकड़ी का प्लाजा भी बनाया जाएगा, जहां शोक संतप्त लोग अंतिम संस्कार के लिए लकड़ी खरीद सकेंगे। (Varanasi Manikarnika Ghat)

काशी का महाश्मशान: धार्मिक महत्व और वैश्विक पहचान

काशी का महान श्मशान घाट, मणिकर्णिका घाट, अत्यंत धार्मिक महत्व रखता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, काशी में मृत्यु के बाद, भगवान शिव स्वयं मृतक के कान में तारक मंत्र का उच्चारण करते हैं, जिससे उन्हें मोक्ष प्राप्त होता है। यह दुनिया का एकमात्र श्मशान घाट है, जहाँ चौबीसों घंटे चिताएं जलती रहती हैं। इसी कारण इसे महाश्मशान (महान श्मशान घाट) के नाम से जाना जाता है, और दुनिया भर से लोग इस पवित्र स्थल के दर्शन करने आते हैं। (Varanasi Manikarnika Ghat)

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