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“जैसे साड़ी की दुकान में खरीदारी करने जाना”, ममता बनर्जी ने उत्पाद शुल्क में कटौती को लेकर केंद्र सरकार पर कसा तंज

West Asia Conflict

West Asia Conflict: पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने शुक्रवार को केंद्र सरकार पर कटाक्ष करते हुए पेट्रोल और डीजल पर उत्पाद शुल्क कम करने के उनके फैसले की तुलना साड़ी की दुकान में कीमतों को लेकर मोलभाव करने से की।

ममता बनर्जी ने कहा कि यह साड़ी की दुकान में खरीदारी करने जैसा है। अगर आप साड़ी की कीमत पूछेंगे, तो दुकानदार शायद आपको 1000 रुपये बताएगा। लेकिन मोलभाव के बाद वह 400 रुपये पर मान जाएगा। इसी तरह, उन्होंने पेट्रोल की कीमतें बढ़ा दी हैं। अगर वे अब उत्पाद शुल्क कम भी कर दें, तो भी कीमत आखिर रुकेगी कहां?

West Asia Conflict: हल्दिया से गैस सप्लाई रोकने की मांग क्यों उठी?

एलपीजी संकट के कारण जनता को हो रही असुविधा पर चिंता व्यक्त करते हुए, उन्होंने मांग की कि हल्दिया से गैस सिलेंडर पश्चिम बंगाल से बाहर नहीं भेजे जाने चाहिए। उन्होंने कहा कि मेरी सबसे बड़ी चिंता यह है कि जनता को असुविधा न हो, यद्यपि हमारे क्षेत्र में गैस और पेट्रोल की उपलब्धता पर्याप्त है, फिर भी मैं पुलिस अधिकारियों से लेकर बीडीओ तक, पूरे प्रशासन में आमूलचूल परिवर्तन की मांग करती हूं। मैं यह भी मांग करती हूं कि बंगाल के हल्दिया से गैस सिलेंडर राज्य से बाहर न भेजे जाएं।

इस बीच, केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने केंद्र के इस फैसले की सराहना करते हुए कहा कि ऐसा कदम जन कल्याण के प्रति सरकार की मजबूत प्रतिबद्धता को दर्शाता है। एक्स पर एक पोस्ट में नितिन गडकरी ने कहा कि सरकार ने ऐसे समय में “नागरिक-केंद्रित कदम” उठाया है, जब पश्चिम एशिया संघर्ष के कारण वैश्विक कीमतें आसमान छू रही हैं। (West Asia Conflict)

वैश्विक संकट का भारत की ईंधन कीमतों पर असर

नितिन गडकरी ने कहा कि पश्चिम एशिया में चल रहे ईंधन संकट के बीच, जिसने वैश्विक ऊर्जा कीमतों को ऊपर धकेल दिया है, भारत सरकार ने पेट्रोल और डीजल पर उत्पाद शुल्क कम करके एक समयोचित और नागरिक-केंद्रित कदम उठाया है। उन्होंने आगे कहा कि जहां कई देश ईंधन की कीमतों में वृद्धि जारी रखे हुए हैं, वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में लिया गया यह निर्णय जन कल्याण के प्रति मजबूत प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

केंद्रीय उत्पाद शुल्क अधिनियम, 1944 के प्रावधानों के तहत जारी एक राजपत्र अधिसूचना के अनुसार, केंद्र सरकार ने पेट्रोल पर उत्पाद शुल्क घटाकर 3 रुपये प्रति लीटर कर दिया है और डीजल पर इसे शून्य कर दिया है। इसके अतिरिक्त, डीजल निर्यात पर 21.5 रुपये प्रति लीटर का अप्रत्याशित लाभ कर (विंडफॉल टैक्स) लगाया गया है। (West Asia Conflict)

पश्चिम एशिया तनाव का भारत की ईंधन कीमतों पर प्रभाव

यह निर्णय पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव, विशेष रूप से संयुक्त राज्य अमेरिका, इज़राइल और ईरान के बीच चल रहे संघर्ष के बाद लिया गया है, जिसके कारण होर्मुज जलडमरूमध्य की नाकाबंदी कर दी गई है। यह एक महत्वपूर्ण मार्ग है जिससे विश्व के कच्चे तेल की आपूर्ति का लगभग पांचवां हिस्सा गुजरता है। संकट से पहले, भारत अपने तेल आयात का लगभग 12-15% इसी मार्ग से प्राप्त करता था। (West Asia Conflict)

हालांकि शुल्क में कटौती से कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के कारण नुकसान झेल रही तेल विपणन कंपनियों पर दबाव कम होने की उम्मीद है, लेकिन पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतें अब तक अपरिवर्तित बनी हुई हैं।

इस बीच, सरकार ने कहा है कि देशभर में ईंधन की आपूर्ति स्थिर बनी हुई है। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने एक आधिकारिक बयान में आश्वासन दिया है कि देश भर में सभी खुदरा दुकानें सामान्य रूप से काम कर रही हैं और सभी पेट्रोल पंपों पर पेट्रोल और डीजल का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है। मंत्रालय ने नागरिकों से अफवाहों के बीच घबराकर खरीदारी न करने का भी आग्रह किया है। (West Asia Conflict)


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