West Bengal Politics: पश्चिम बंगाल की राजनीति में आज का दिन एक बड़े ‘पावर शिफ्ट’ का गवाह बनने जा रहा है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के राजनीतिक गढ़ कहे जाने वाले बंगाल में भाजपा ने अपनी सबसे आक्रामक घेराबंदी शुरू कर दी है। रणनीतिक गलियारों में चर्चा है कि ममता के किले को ढहाने के लिए भाजपा ने ‘बिहार मॉडल’ को अम्लीय जामा पहनाना शुरू कर दिया है।
West Bengal Politics: भाजपा के 7 धाकड़ प्रदेश पदाधिकारी
खबर है कि भाजपा ने बिहार के 7 धाकड़ प्रदेश पदाधिकारियों को बंगाल के रण में उतार दिया है। इनमें से 5 नेताओं को सीधे लोकसभा का प्रभारी बनाकर युद्धस्तर पर काम करने की जिम्मेदारी दी गई है। इन ‘सैनिकों’ ने पिछले कई महीनों से बंगाल के गांव-गांव में जाकर ममता सरकार की जड़ों को हिलाने के लिए घेराबंदी (चक्रवयू) तैयार कर ली है।

आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद इस मोर्चे की कमान संभालने बंगाल पहुंच रहे हैं। उन्होंने सिंगुर को चुना है, जो ममता बनर्जी के उदय की ऐतिहासिक धरती रही है। यहां पीएम मोदी ₹830 करोड़ की विकास परियोजनाओं के जरिए बंगाल की जनता को यह संदेश देने की कोशिश करेंगे कि ‘परिवर्तन’ अब विकास के रास्ते ही आएगा।आपको बता दें कि, मोदी का सिंगुर जाना कोई इत्तेफाक नहीं, बल्कि तृणमूल कांग्रेस के सबसे मजबूत स्तंभ पर सीधा प्रहार है। (West Bengal Politics)
नबन्ना में हलचल: राज्य सरकार की प्रतिक्रिया की पड़ताल
भाजपा की इस सधी हुई रणनीति और प्रधानमंत्री के सीधे हस्तक्षेप ने राज्य सरकार की नींद उड़ा दी है। नबन्ना (सचिवालय) में हलचल तेज है। जिस तरह से भाजपा ने ‘बिहार मॉडल’ के तहत माइक्रो-मैनेजमेंट शुरू किया है, उससे साफ है कि इस बार मुकाबला केवल नारों का नहीं, बल्कि जमीन पर कब्जा करने का है। (West Bengal Politics)
फिलहाल आप जान लीजिये, जब सेनापति खुद रणभूमि में उतरता है, तो समझ लीजिए कि युद्ध अब अंतिम चरण में है। भाजपा के ये 7 ‘सैनिक’ और मोदी का विकास कार्ड मिलकर बंगाल की सत्ता की चाबी अपने नाम करने की पूरी तैयारी कर चुके हैं। और अब सवाल यह उठता है कि, क्या ममता बनर्जी अपने इस किले को भाजपा के इन ‘7 शूरवीरों’ और ‘सेनापति मोदी’ के प्रहार से बचा पाएंगी? सिंगुर की धरती से आज जो हुंकार भरी जाएगी, उसकी गूँज 2026 के विधानसभा चुनावों तक सुनाई देगी। (West Bengal Politics)









