Asaduddin Owaisi: ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने ‘आई लव मुहम्मद’ पोस्टर विवाद को लेकर उत्तर प्रदेश सरकार की आलोचना की। उन्होंने कहा कि पैगंबर मुहम्मद के लिए प्यार व्यक्त करना “विश्वास” का मामला है और सवाल किया कि भाजपा इस पर आपत्ति क्यों कर रही है।
यूपी सरकार की कार्रवाई पर Asaduddin Owaisi की तीखी आलोचना
AIMIM अध्यक्ष ने कहा कि यूपी सरकार को उन लोगों को रिहा करना चाहिए जिन्हें’ आई लव मुहम्मद’ पोस्टर विवाद के सिलसिले में गिरफ्तार किया गया है। उन्होंने कहा कि इससे देश में ही नहीं, बल्कि विदेशों में भी अच्छा संदेश नहीं जा रहा है।
पैगंबर मोहम्मद के प्रति प्यार एक विश्वास का मुद्दा
ओवैसी ने कहा कि हमारे लिए दुनिया में सबसे कीमती चीज पैगंबर मोहम्मद के लिए प्यार है। यह हमारे माता-पिता, हमारी संपत्ति, हमारे बच्चों से भी अधिक कीमती है। यह हमारे विश्वास का हिस्सा है। अब, अगर कोई इसे व्यक्त कर रहा है, तो इसमें क्या गलत है? अगर कोई हिंसा का सहारा लेता है, तो यह निंदनीय है।
क्या भाजपा का विरोध उचित है? Asaduddin Owaisi के सवाल
ओवैसी ने आगे कहा कि पोस्टरों के प्रदर्शन से कोई हिंसा नहीं जुड़ी है और उन्होंने जोर देकर कहा कि धार्मिक भक्ति व्यक्त करने वाले प्लेकार्ड पकड़ना संवैधानिक रूप से संरक्षित है। AIMIM प्रमुख ने कहा कि अगर मैं अपनी आस्था व्यक्त करने वाला पोस्टर पकड़े हुए हूं और भारतीय संविधान का अनुच्छेद 25 धार्मिक स्वतंत्रता की गारंटी देता है, तो उस पोस्टर में ऐसा कुछ भी नहीं था जिससे हिंसा भड़क सकती हो। किसी ने कहा, ‘मुझे महादेव से प्यार है,’ ऐसा करो। यही इस देश की खूबसूरती है। इस देश में 98 फीसदी लोग धार्मिक हैं।
मोदी का ‘भगवान हनुमान’ पोस्टर विवाद और दोहरा मानक
एक पुराने वाकये को याद करते हुए ओवैसी ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2018 में केरल के एक कलाकार द्वारा बनाए गए ‘भगवान हनुमान’ के एक पोस्टर का प्रचार किया था। उन्होंने कहा यह हनुमान का पोस्टर था और मोदी ने इसका प्रचार किया और किसी ने आपत्ति नहीं की। हम आज भी ऐसा नहीं कर रहे हैं।
भारत की धार्मिक विविधता
इससे पहले, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और भाजपा पर निशाना साधते हुए ओवैसी ने कहा कि भारत एक ऐसा देश है जिसका कोई धर्म नहीं है, लेकिन भाजपा और आरएसएस मानते हैं कि उनका सिर्फ एक ही धर्म है। संविधान कहता है कि इस देश का कोई धर्म नहीं है, हम सभी धर्मों में विश्वास करते हैं। अगर कोई किसी धर्म को नहीं मानता, तो भी हम उसका जश्न मनाते हैं। (Asaduddin Owaisi)
“आई लव मुहम्मद” विवाद की शुरुआत
“आई लव मुहम्मद” विवाद हाल ही में उत्तर प्रदेश के विभिन्न शहरों में चर्चा में आया है, जिसमें कानपुर और बरेली प्रमुख हैं। यह विवाद तब शुरू हुआ जब कुछ लोगों ने सार्वजनिक स्थानों पर “आई लव मुहम्मद” लिखे बैनर और पोस्टर लगाए, जिससे धार्मिक भावनाएं आहत होने का आरोप लगाया गया।
साल 2025 में ‘आई लव मुहम्मद’ विवाद तब शुरू हुआ, जब बारावफात (ईद-ए-मिलाद-उन-नबी) के एक जुलूस के दौरान उत्तर प्रदेश के कानपुर में ‘आई लव मुहम्मद’ लिखे हुए पोस्टर और बैनर लगाए गए। इस घटना से सांप्रदायिक तनाव बढ़ गया और यह विवाद देश के कई अन्य राज्यों में भी फैल गया।
कानपुर में शुरुआत: 4 सितंबर, 2025 को कानपुर के रावतपुर इलाके में बारावफात के जुलूस के दौरान ‘आई लव मुहम्मद’ लिखा हुआ एक लाइटबोर्ड लगाया गया था। कुछ हिंदू संगठनों ने इस पर आपत्ति जताई और इसे एक “नई परंपरा” बताकर माहौल बिगाड़ने का आरोप लगाया।
कानपुर पुलिस ने शुरू में कहा कि एफआईआर बैनर के खिलाफ नहीं, बल्कि जुलूस के पारंपरिक रास्ते से हटकर टेंट लगाने को लेकर दर्ज की गई थी। हालांकि, 9 सितंबर को इस मामले में 24 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई।
विरोध प्रदर्शनों का फैलाव: कानपुर के बाद, यह विवाद बरेली, लखनऊ, मुंबई, मेरठ और देश के अन्य हिस्सों में भी फैल गया। कुछ जगहों पर प्रदर्शन हिंसक हो गए, जिसके बाद पुलिस को लाठीचार्ज भी करना पड़ा।
बरेली में प्रदर्शन: 26 सितंबर को, इत्तेहाद-ए-मिल्लत काउंसिल (IMC) के नेता मौलाना तौकीर रजा खान द्वारा बुलाए गए प्रदर्शन के लिए सैकड़ों लोग बरेली की गलियों में इकट्ठा हुए। प्रदर्शन के अचानक रद्द होने से नाराज भीड़ ने पथराव शुरू कर दिया, जिससे पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा।
इस हिंसा में कई पुलिसकर्मी घायल हुए, और बाद में पुलिस ने मौलाना तौकीर रजा समेत कई लोगों को गिरफ्तार कर लिया। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए अधिकारियों ने 28 सितंबर को बरेली में इंटरनेट सेवाएँ निलंबित कर दीं।
सोशल मीडिया और प्रति-अभियान: सोशल मीडिया पर ‘आई लव मुहम्मद’ हैशटैग तेजी से ट्रेंड हुआ, जिसके जवाब में हिंदू संगठनों ने ‘#आई लव महादेव’ और ‘#आई लव राम’ जैसे हैशटैग के साथ प्रति-अभियान चलाया।
राजनीतिक प्रतिक्रिया: इस विवाद पर राजनीतिक नेताओं ने भी प्रतिक्रिया दी। एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि पैगंबर से प्यार जताना कोई अपराध नहीं है और यह अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता है। वहीं, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कानून-व्यवस्था बिगाड़ने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी।
गिरफ्तारियां: विवाद के अलग-अलग मामलों में कई राज्यों में गिरफ्तारियां हुईं। पुलिस ने कानून-व्यवस्था बिगाड़ने के आरोपों में कई लोगों को हिरासत में लिया। कुछ रिपोर्ट्स में यह भी आरोप लगाया गया कि मुस्लिम समुदाय के धार्मिक पोस्टरों को भी नुकसान पहुँचाया गया था।
यह विवाद एक धार्मिक नारे के सार्वजनिक प्रदर्शन को लेकर शुरू हुआ, जिसने देश के कई हिस्सों में धार्मिक स्वतंत्रता, सार्वजनिक व्यवस्था और सांप्रदायिक सद्भाव पर बहस छेड़ दी। (Asaduddin Owaisi)









