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“अगर वक्फ बोर्ड ने कल्याण के लिए काम किया होता तो मुसलमानों को आज…”, SC की अंतरिम रोक के बाद सूफी कशिश वारसी

मुरादाबाद: भारतीय सूफी फाउंडेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष कशिश वारसी ने राजनीतिक दलों से अपील की है कि वे सुप्रीम कोर्ट के अंतरिम आदेश का फायदा न उठाएं, जिसमें वक्फ (संशोधन) अधिनियम 2025 के विशिष्ट प्रावधानों पर रोक लगा दी गई है।

वारसी ने कहा कि मुस्लिम समुदाय को न्याय व्यवस्था पर भरोसा रखना चाहिए और आदेश का पालन करना चाहिए। उन्होंने वक्फ बोर्डों की आलोचना करते हुए कहा कि उन्होंने लोगों की निजी संपत्ति छीन ली है और मुसलमानों के कल्याण के लिए काम नहीं किया है।

वारसी ने कहा कि मुस्लिम समुदाय सर्वोच्च न्यायालय गया और व्यवस्था पर भरोसा जताया। अब आदेश का पालन किया जाना चाहिए। ठीक उसी तरह जैसे बाबरी मस्जिद और राम जन्मभूमि मामले में फैसले का पालन किया गया था। मैं लोगों से अनुरोध करना चाहूंगा कि वे इस आदेश से न तो खुश हों और न ही दुखी। बल्कि इसका पालन करें, यह सर्वोच्च न्यायालय का आदेश है। हमें यह दिखाना चाहिए कि हमें न्याय व्यवस्था पर भरोसा है और हम इस पर भरोसा करते रहेंगे।

भारतीय सूफी फाउंडेशन के अध्यक्ष ने आगे कहा, “किसी भी राजनीतिक दल को इसका फायदा नहीं उठाना चाहिए। दरअसल, मुस्लिम समुदाय को यह समझना चाहिए कि उनके दोस्त और दुश्मन कौन हैं। मैं यह भी कहना चाहूंगा कि देश में सांप्रदायिक सद्भाव की जड़ें मजबूत हैं और आगे भी मजबूत रहेंगी। अगर कुछ लोग इन जड़ों को तोड़ने की कोशिश करते हैं, तो दूसरों को इससे प्रभावित नहीं होना चाहिए।”

वक्फ बोर्ड की आलोचना करते हुए उन्होंने दावा किया कि बोर्ड ने लोगों की निजी संपत्ति छीन ली है। उन्होंने कहा, ” वक्फ बोर्ड ने मुसलमानों के खिलाफ जो काम किए हैं, उनकी संपत्तियां चुराई हैं, अगर आज वक्फ बोर्ड उस पैसे से अच्छे काम कर पाता, तो एक मुस्लिम बच्चा शिक्षा पाने के लिए संघर्ष नहीं कर रहा होता। हम आयुष्मान कार्ड पाने के लिए परेशान नहीं होते। लोग पीएम आवास योजना का लाभ पाने के लिए संघर्ष नहीं कर रहे होते। आज आदेश आ गया है। मुझे सरकार पर पूरा भरोसा है।”

सुप्रीम कोर्ट का अंतरिम आदेश

उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को संपूर्ण वक्फ (संशोधन) अधिनियम 2025 पर रोक लगाने से इनकार कर दिया, लेकिन अधिनियम की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर अंतिम निर्णय होने तक इसके कुछ प्रावधानों पर रोक लगा दी। भारत के मुख्य न्यायाधीश बी. आर. गवई और न्यायमूर्ति ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की पीठ ने कहा कि संशोधित अधिनियम की कुछ धाराओं को संरक्षण की आवश्यकता है।

अंतरिम आदेश पारित करते हुए, पीठ ने अधिनियम के उस प्रावधान पर रोक लगा दी, जिसके तहत वक्फ बनाने के लिए किसी व्यक्ति को पाँच साल तक इस्लाम का अनुयायी होना ज़रूरी था। साथ ही, पीठ ने कहा कि यह प्रावधान तब तक स्थगित रहेगा, जब तक यह तय करने के लिए नियम नहीं बन जाते कि कोई व्यक्ति इस्लाम का अनुयायी है या नहीं।

शीर्ष अदालत ने उस प्रावधान पर भी रोक लगा दी जिसके तहत कलेक्टर को यह तय करने का अधिकार था कि वक्फ संपत्ति ने सरकारी संपत्ति पर अतिक्रमण किया है या नहीं। हालांकि, न्यायालय ने पंजीकरण को अनिवार्य करने वाले प्रावधान में हस्तक्षेप नहीं किया, क्योंकि यह कोई नई आवश्यकता नहीं है, क्योंकि यह शर्त 1995 और 2013 के पिछले अधिनियमों में भी थी। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने 5 अप्रैल को वक्फ (संशोधन) विधेयक, 2025 को अपनी मंजूरी दे दी, जिसे पहले संसद के दोनों सदनों में गरमागरम बहस के बाद पारित किया गया था।

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