अयोध्या में प्रभु श्री राम के भव्य मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा की आज दूसरी वर्षगांठ है। इस ऐतिहासिक अवसर पर पूरी धर्मनगरी उत्सव के रंग में सराबोर हो गई है। आज सुबह से ही राम जन्मभूमि परिसर में वैदिक मंत्रोच्चार के बीच रामलला का विशेष विधि-विधान से अभिषेक किया गया।
अयोध्या आज एक बार फिर उसी अलौकिक उत्साह में डूबी है, जैसा माहौल दो साल पहले प्राण-प्रतिष्ठा के समय था। रामलला की ‘प्राण-प्रतिष्ठा द्वादशी’ यानी दूसरी वर्षगांठ के मौके पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और सीएम योगी आदित्यनाथ ने न केवल रामलला की आरती उतारी, बल्कि अन्नपूर्णा मंदिर पर धर्म ध्वजा भी फहराई। जहाँ सीएम योगी ने गर्व से बताया कि पिछले 5 साल में 45 करोड़ से ज्यादा श्रद्धालु अयोध्या आए हैं और अब ‘राम जी की योजना’ के जरिए यहाँ रोजगार की नई गंगा बहने वाली है।

सीएम योगी आदित्यनाथ ने अयोध्या में क्या कहा
सीएम योगी ने कहा, ‘पिछले 11 वर्षों में पीएम मोदी के यशस्वी नेतृत्व में उन तीन अहम घटनाओं को विस्मृत नहीं किया जा सकता। याद करिए 5 अगस्त 2020 जब देश का कोई पीएम स्वयं अयोध्या धाम पधारे और 500 वर्षों के कलंक को समाप्त करते हुए अपने करकमलों से राम जन्मभूमि के कार्यक्रम को संपन्न किया था।’
सीएम योगी ने आगे कहा, ‘दूसरी तारीख 22 जनवरी 2024 को पीएम मोदी स्वयं अयोध्या पधारे और श्री रामलला के प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम को अपने कर कमलों से संपन्न किया। तीसरा जब अभी 25 नवंबर को विवाह पंचमी के शुभ अवसर पर प्रधानमंत्री स्वयं आए और राम मंदिर के मुख्य शिखर पर उन्होंने सनातन धर्म की ध्वजा को प्रतिष्ठित करके सनातन से ऊपर कोई नहीं का संदेश दिया। सनातन की पताका यूं ही लहराती रहेगी, यह संदेश पूरी दुनिया को दिया।’

यहां हनुमान जी स्वयं विराजमान है
सीएम योगी ने कहा, ‘अयोध्या ने जो संघर्ष देखा था। पिछली सरकार ने अयोध्या को लहूलुहान करने का काम किया था। जिनके शासन में आतंकी हमले कर अयोध्या को लहूलुहान करने का प्रयास हुआ था। लेकिन प्रभु की कृपा और बजरंग बली जहां की रक्षा स्वयं कर रहे हों वहां तो भूत पिशाच निकट नहीं आवे.. महावीर जब नाम सुनावे.. यहां तो हनुमान जी स्वयं विराजमान हैं। फिर कोई आतंकी यहां कैसे प्रवेश कर जाता।’
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह का बयान
वहीं, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस मौके पर एक बहुत ही महत्वपूर्ण बात कही, जिसने सबका ध्यान खींचा। उन्होंने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ का जिक्र करते हुए भारत की सैन्य शक्ति को प्रभु राम की मर्यादा से जोड़ा। राजनाथ सिंह ने कहा कि जैसे राम शत्रु से युद्ध करते हुए भी मर्यादा नहीं लांघते, वैसे ही भारत ने भी आतंकियों के आकाओं को सबक सिखाते वक्त ‘सीमित और नियंत्रित’ कार्रवाई कर साबित किया कि हम राम के असली उत्तराधिकारी हैं।









