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झारखंड में अब ‘अपनी धरती, अपना राज’! कैबिनेट ने PESA नियमावली को दी मंजूरी।

झारखंड सरकार ने राज्य के आदिवासी समाज की वर्षों पुरानी मांग को पूरा करते हुए एक ऐतिहासिक फैसला लिया है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में ‘पेसा’ (PESA – Provisions on the Panchayats Extension to Scheduled Areas) नियमावली को आधिकारिक मंजूरी दे दी गई है। इस फैसले के बाद राज्य के अनुसूचित क्षेत्रों में ‘लोकतंत्र की जड़ें’ और गहरी होंगी और सत्ता की असली चाबी सीधे जनता के हाथों में होगी।

गांव की सरकार, अब होगी और भी दमदार

​यदि देखा जाए तो पेसा नियमों के लागू होने से झारखंड के ग्रामीण और जनजातीय क्षेत्रों में ग्राम सभाओं को अभूतपूर्व शक्तियां मिलेंगी। यह खबर राज्य के लाखों लोगों के लिए खुशियां और गर्व का विषय है, क्योंकि अब उनके जल, जंगल और जमीन से जुड़े फैसले कोई बाहर वाला नहीं, बल्कि वे खुद अपनी ग्राम सभा में लेंगे।

आपको बताते चलें कि, अब गांव के प्राकृतिक संसाधनों (लघु वन उपज, खनिज आदि) के प्रबंधन और संरक्षण में ग्राम सभा की भूमिका निर्णायक होगी। देखा जाए तो, ग्राम सभाओं के पास अब यह शक्ति होगी कि वे अनुसूचित क्षेत्रों में आदिवासियों की जमीन के अवैध हस्तांतरण को रोक सकें और छीनी गई जमीन की वापसी के लिए पहल कर सकें। छोटे-मोटे विवादों को अब पारंपरिक रीति-रिवाजों के आधार पर ग्राम स्तर पर ही सुलझाया जा सकेगा। और गांव में होने वाली किसी भी विकास योजना के लिए अब ग्राम सभा की सहमति अनिवार्य होगी, जिससे भ्रष्टाचार पर लगाम लगेगी। सबसे बड़ी बात कि, गांव में शराब की दुकानों और अन्य नशीले पदार्थों की बिक्री पर नियंत्रण का अधिकार भी ग्राम सभा के पास होगा।

इस निर्णय का स्वागत करते हुए आदिवासी संगठनों और ग्रामीण प्रतिनिधियों ने इसे “ऐतिहासिक न्याय” बताया है। जानकारों का मानना है कि इससे न केवल स्वशासन को मजबूती मिलेगी, बल्कि झारखंड की समृद्ध जनजातीय परंपराओं और संस्कृति का संरक्षण भी सुनिश्चित होगा। पेसा नियमावली का लागू होना झारखंड के लिए मात्र एक प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि एक सामाजिक और आर्थिक क्रांति की शुरुआत है। यह नियम आदिवासियों के गौरव ‘माझी-परगना’ और ‘मुंडा-मानकी’ जैसी पारंपरिक शासन व्यवस्थाओं को कानूनी मजबूती प्रदान करेगा।

ग्राम सभा की बैठकें, नियम और प्रविधान

पेसा नियमावली के अनुसार ग्राम सभा का गठन होगा और प्रत्येक माह कम से कम एक बैठक आयोजित की जाएगी। ग्राम सभा के दसवें हिस्से या आधे सदस्यों की लिखित मांग पर ग्राम प्रधान को सात दिनों के भीतर बैठक बुलानी होगी।

बैठक के लिए कोरम हेतु ग्राम सभा के कुल सदस्यों का एक-तिहाई उपस्थित होना अनिवार्य होगा, जिसमें से एक-तिहाई महिलाएं होनी चाहिए। ग्राम सभा की अध्यक्षता परंपरागत रूप से मान्यता प्राप्त ग्राम प्रधान (जैसे मांझी, मुंडा, पाहन, महतो आदि) या उनके द्वारा नामित व्यक्ति करेगा।

यदि निर्धारित समय पर कोरम पूरा नहीं होता तो अध्यक्ष बैठक को अगली तिथि और समय के लिए स्थगित कर सकता है। ग्राम सभा की पहली बैठक से पहले अध्यक्ष को पंचायत समिति के सचिव द्वारा अधिकारी के समक्ष शपथ लेनी होगी।

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