बांग्लादेश की पहली महिला प्रधानमंत्री और ‘बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी’ (BNP) की अध्यक्ष बेगम खालिदा ज़िया का आज सुबह ढाका के एवरकेयर अस्पताल में निधन हो गया। 80 वर्षीय बेगम ज़िया लंबे समय से स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से जूझ रही थीं। उनके निधन की खबर से पूरे देश में शोक की लहर दौड़ गई है।
आपको बताते चलें कि वह पिछले काफी समय से हृदय रोगों और फेफड़ों के गंभीर संक्रमण (Lung Infection) के कारण अस्पताल में भर्ती थीं। विशेषज्ञों की एक टीम उनकी देखरेख कर रही थी, लेकिन आज सुबह उनकी स्थिति अचानक बिगड़ गई, जिसे नियंत्रित नहीं किया जा सका, जिसके बाद उन्होंने अस्पताल में करीब 6.00 अंतिम सांसे ली।

बेगम खालिदा ज़िया का जाना बांग्लादेश की राजनीति के एक अध्याय का खत्म होना है। वह बांग्लादेश की सत्ता संभालने वाली पहली महिला थीं। और उन्होंने तीन बार प्रधानमंत्री के रूप में देश का नेतृत्व किया था। उन्होंने अपने पति जियाउर रहमान की मृत्यु के बाद, अत्यंत कठिन परिस्थितियों में बीएनपी की कमान संभाली और उसे देश की सबसे बड़ी राजनीतिक शक्तियों में से एक बनाया।
कल भरा नामांकन
खालिदा ज़िया के निधन से ठीक एक दिन पहले, सोमवार को उनकी ओर से बोगुरा-7 सीट से चुनावी नामांकन दाखिल किया गया था। आपको बताते चलें कि बोगुरा-7 सीट का BNP के लिए ऐतिहासिक महत्व रहा है। इसी इलाके में पार्टी के संस्थापक और खालिदा जिया के पति जियाउर रहमान का निवास रहा है। खालिदा जिया ने 1991, 1996 और 2001 में इसी क्षेत्र से चुनाव जीतकर प्रधानमंत्री पद संभाला था। वहीं दूसरी तरफ कल बोगुरा-7 सीट से दोपहर करीब 3 बजे पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने डिप्टी कमिश्नर और रिटर्निंग ऑफिसर के कार्यालय में पर्चा जमा किया था। नामांकन के वक्त यह भी सामने आया था कि खालिदा जिया अस्पताल में भर्ती हैं और वेंटिलेटर पर हैं। इसके बावजूद BNP ने उन्हें चुनावी मैदान में उतारने का फैसला किया था।

खालिदा ज़िया का निधन ऐसे समय में हुआ है। जब बांग्लादेश अपनी राजनीति के सबसे महत्वपूर्ण मोड़ पर खड़ा है। देश 2026 के आम चुनावों की तैयारी कर रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चुनाव से ठीक पहले बेगम जिया का जाना विपक्षी खेमे (BNP) के लिए एक बहुत बड़ा झटका है। उनके समर्थकों के बीच अब भविष्य के नेतृत्व और चुनावी रणनीति को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं।









