बिहार की गलियों में एक ऐसा ‘अदृश्य बैंक’ चल रहा है, जहाँ नोटों की गड्डियाँ इंसानियत और मर्यादा की कीमत पर दी जाती हैं। इसे नाम दिया गया है— ‘गुंडा बैंक’। यहाँ कर्ज मिलने का आधार सिविल स्कोर या गारंटी नहीं, बल्कि कर्जदार के घर की महिलाओं की ‘सूरत’ है। एक निजी न्यूज़ मीडिया के सनसनीखेज स्टिंग ऑपरेशन ने बिहार के इस स्याह चेहरे को बेनकाब कर दिया है, जिसे सुनकर किसी भी सभ्य समाज की रूह कांप जाए।
खौफनाक डील:
“बीवी देखकर तय होता है कर्ज” यह हम नहीं बिहार का वो गुंडे बैंक का दलाल बोल रहा है, जो बिहार कि गुंडागर्दी कि पोल खोल रहा है।
यह सनसनीखेज खुलासा उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के उस चैलेंज के बाद आया है, जिसमें उन्होंने कहा था कि ‘गुंडा बैंक’ जैसा कुछ नहीं है।
स्टिंग के दौरान जब रिपोर्टर ने कर्ज की बात की, तो एजेंट ने दो टूक शब्दों में कहा— “पैसा नहीं लौटा पाए, तो तुम्हारी बीवी को उठा ले जाएंगे।”
यहाँ ब्याज दरें बैंक की नहीं, बल्कि गुंडों की मर्जी से तय होती हैं। और वसूली का तरीका? घर की महिलाओं को बंधक बनाना या उन्हें उठा ले जाना। हाल ही में मंत्री सम्राट चौधरी ने सदन और सार्वजनिक मंचों से इन गुंडा बैंकों के अस्तित्व को नकारते हुए चुनौती दी थी। लेकिन इस स्टिंग ने शासन और प्रशासन के दावों की धज्जियां उड़ा दी हैं।
आरोप है कि इन गुंडा बैंकों को स्थानीय दबंगों और कुछ सफेदपोशों का मौन समर्थन प्राप्त है, जिसके दम पर ये सरेआम महिलाओं की अस्मत पर सौदेबाजी करते हैं।
यह खबर केवल एक आर्थिक अपराध नहीं है, बल्कि बिहार की कानून-व्यवस्था पर सबसे बड़ा तमाचा है। एक ओर सरकार ‘महिला सशक्तिकरण’ के नारे लगा रही है, तो दूसरी ओर ‘गुंडा बैंक’ के एजेंट सरेआम महिलाओं को उठाने की धमकियां दे रहे हैं। असल में बिहार नहीं गुंडाराज है ये।
फिलहाल देखना दिलचस्प होगा कि, इस खुलासे के बाद क्या प्रशासन इन ‘भेड़ियों’ पर नकेल कसेगा या फिर जांच की फाइलों में यह सच यूं ही दबकर रह जाएगा?









