उत्तर प्रदेश की राजनीति के लिए आज यानी 24 दिसंबर 2025 का दिन बेहद निर्णायक होने वाला है। विधानभवन में चल रहे शीतकालीन सत्र का आज आखिरी दिन होने की संभावना है। सत्र के समापन से पहले आज सदन की कार्यवाही में भारी गहमागहमी देखने को मिल सकती है, क्योंकि योगी सरकार आज कई महत्वपूर्ण वित्तीय और विधायी कार्यों को अंतिम रूप देगी। आज सदन की मेज पर कई ऐसे प्रस्ताव होंगे जिनका सीधा असर उत्तर प्रदेश की जनता और विकास कार्यों पर पड़ेगा। सरकार द्वारा पेश किए गए अनुपूरक बजट पर चर्चा के बाद आज इसे पारित किया जा सकता है। इसमें आगामी महाकुंभ, बुनियादी ढांचे और जनकल्याणकारी योजनाओं के लिए अतिरिक्त फंड का प्रावधान है। और महिला सुरक्षा, शिक्षा और राजस्व से जुड़े कई प्रमुख विधेयकों को आज सदन की मंजूरी भी मिल सकती है।
घरौनी कानून को मिलेगी मंज़ूरी
भारत सरकार की स्वामित्व योजना के तहत ड्रोन तकनीक से तैयार किए गए ‘घरौनी’ को स्थायी कानूनी ढांचा देने के लिए उत्तर प्रदेश ग्रामीण आबादी अभिलेख विधेयक–2025 सदन में रखा गया. इसके लागू होने से गांवों में रहने वाले लोग अपनी संपत्ति के पक्के कागजात के आधार पर बैंक से लोन और अन्य आर्थिक सुविधाएं ले सकेंगे. इससे गांव में रहने वाले लोगों को काफी मदद मिलेगी। इसको लेकर यूपी सरकार में मंत्री जयवीर सिंह ने सदन में बताया कि यह विधेयक ग्रामीण आबादी क्षेत्रों के स्वामित्व अभिलेखों को कानूनी मान्यता देने के लिए लाया गया है. अब ड्रोन सर्वे से बनी घरौनी का संरक्षण, समय-समय पर अपडेट और कानूनी प्रबंधन संभव हो सकेगा. उन्होंने कहा कि स्वामित्व योजना का मुख्य उद्देश्य गांवों में सही सर्वे कर लोगों को उनकी जमीन और मकान के पक्के दस्तावेज देना है, ताकि वे आर्थिक रूप से सशक्त बन सकें.
घरौनी से कैसे मिलेगा गांवों को लोन?
मंत्री जयवीर सिंह ने जब इस बिल को सदन के पटल पर रखा और इसके फायदे को बताया कि घरौनी मिलने के बाद ग्रामीण अपनी संपत्ति के आधार पर बैंक लोन ले सकेंगे। इसके साथ ही संपत्ति कर तय करने, भूमि के सही रिकॉर्ड तैयार करने और ग्राम पंचायतों की विकास योजनाएं बनाने में भी मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि जीआईएस आधारित नक्शों से गांवों की योजना बनाना ज्यादा आसान और पारदर्शी होगा। मंत्री ने आगे बताया कि स्वामित्व योजना को लेकर भारत सरकार और उत्तर प्रदेश सरकार के बीच एमओयू किया गया है। प्रदेश के 1,10,344 गांव इस योजना के तहत अधिसूचित किए गए हैं। गैर-आबादी वाले गांवों को छोड़कर 90,573 गांवों में ड्रोन सर्वे पूरा हो चुका है। 9 मई 2025 तक करीब 1 करोड़ 6 लाख से ज्यादा घरौनियां तैयार की गईं, जिनमें से 1 करोड़ 1 लाख से अधिक घरौनियां ग्रामीणों को वितरित की जा चुकी हैं।
विधेयक में क्या-क्या प्रावधान
ग्रामीण आबादी का अभिलेख ‘घरौनी’ कहलाएगा। इसमें स्वामी का नाम-पता, भूखंड का विवरण, क्षेत्रफल, रेखाचित्र और स्थानीय जानकारी के बारे में पता होना चाहिए। अगर किसी गांव की बात करें तो सभी घरौनियों का संकलन ‘घरौनी रजिस्टर’ होगा। एक अलग आबादी मानचित्र भी तैयार किया जाएगा और इसमें सर्वेक्षण अधिकारी, अभिलेख अधिकारी और अधिसूचना जारी करने की स्पष्ट प्रक्रिया तय की गई है।









