UP Flood: उत्तर प्रदेश के मथुरा समेत कई जिलों में बाढ़ का प्रकोप देखने को मिल रहा है। मथुरा में यमुना खतरे के निशान से ऊपर बह रही है। जिस कारण कई स्थानों पर खेत-खलिहान, मंदिर सब डूब चुके हैं। जिसे लेकर NDRF और पुलिस प्रशासन लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने में जुटी है।
इस बीच मंगलवार को संत प्रेमानंद महाराज वृंदावन में बाढ़ का जायजा लेने निकले। प्रेमानंद महाराज ने बाढ़ प्रभावित इलाकों का जायजा लेने के लिए स्टीमर से एक घंटे तक भ्रमण किया। इस दौरान उन्होंने बाढ़ से प्रभावित लोगों से बातचीत की और उन्हें धैर्य और साहस के साथ काम लेने की सलाह दी।
प्रेमानंद महाराज ने कहा कि इस आपदा को ईश्वरीय प्रकोप न मानें, बल्कि इसे प्रकृति का एक हिस्सा समझें। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत सामग्री पहुंचाने में मदद करें।
वहीं, वाराणसी में गंगा नदी का जलस्तर चेतावनी बिंदु को पार कर गया है, जिससे बाढ़ की स्थिति गंभीर हो गई है। केंद्रीय जल आयोग के अनुसार, गंगा का जलस्तर 70.98 मीटर दर्ज किया गया है, जो चेतावनी बिंदु 70.262 मीटर से ऊपर है। जलस्तर में वृद्धि के कारण वरुणा नदी में भी पलट प्रवाह हो गया है, जिससे शहर के निचले इलाकों में पानी भर गया है।
बाढ़ के प्रभाव:
- वरुणा नदी का पलट प्रवाह: वरुणा नदी में पलट प्रवाह के कारण शहर के निचले इलाकों जैसे नगवा, संगमपुरी कॉलोनी और बस्ती में पानी भर गया है।
- घाटों पर पानी: गंगा के जलस्तर में वृद्धि के कारण सभी प्रमुख घाट जलमग्न हो चुके हैं।
- शवदाह में कठिनाई: मणिकर्णिका घाट पर शवदाह के लिए जगह कम होने के कारण गलियों में अंतिम संस्कार हो रहा है।
- फसलों को नुकसान: बाढ़ के कारण 6,244 किसानों की 1,721 एकड़ जमीन डूब चुकी है।
प्रशासन की तैयारी:
प्रशासन ने बाढ़ राहत शिविर स्थापित किए हैं और लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा रहा है। जिला प्रशासन और जल पुलिस बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में निगरानी और बचाव कार्य में जुटी हुई है।









