Supreme Court New Judges: सुप्रीम कोर्ट में पांच नए न्यायधीशों की नियुक्ति हो गई है। अब कुल जजों की संख्या 37 हो गई है। भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने मंगलवार को सर्वोच्च न्यायालय के प्रशासनिक भवन परिसर के ऑडिटोरियम में पांच नए न्यायाधीशों को पद की शपथ दिलाई, जिसके बाद शीर्ष अदालत में कार्यरत जजों की कुल संख्या 37 हो गई है।
Supreme Court New Judges: शपथ लेने वाले 5 नए न्यायधीश
शपथ लेने वाले 5 नए न्यायाधीश सर्वोच्च न्यायालय कॉलेजियम की सिफारिश पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की मंजूरी के बाद इन पांचों न्यायाधीशों को नियुक्त किया गया है।
- न्यायमूर्ति शील नागू (पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश)
- न्यायमूर्ति श्री चंद्रशेखर (बॉम्बे हाईकोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश)
- न्यायमूर्ति संजीव सचदेवा (मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश)
- न्यायमूर्ति अरुण पल्ली (जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाईकोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश)
- वरिष्ठ अधिवक्ता वी. सुब्रमणि मोहना (बार एसोसिएशन से सीधे प्रमोट हुईं)
वरिष्ठ अधिवक्ता मोहना की पदोन्नति से सर्वोच्च न्यायालय में महिलाओं के प्रतिनिधित्व को मजबूती मिलने की उम्मीद है। वर्तमान में सर्वोच्च न्यायालय में केवल एक महिला न्यायाधीश, न्यायमूर्ति बी.वी. नागरत्ना हैं। अगस्त 2021 के बाद से सर्वोच्च न्यायालय में किसी भी महिला की नियुक्ति नहीं हुई है। (Supreme Court New Judges)
सर्वोच्च न्यायालय कॉलेजियम ने 27 मई को भारत के सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की नियुक्ति के लिए केंद्र सरकार को पांच नामों की सिफारिश की थी। यह सिफारिश 22 और 27 मई को आयोजित कॉलेजियम की बैठकों में की गई थी। केंद्र सरकार ने 1 जून को सर्वोच्च न्यायालय में पांच न्यायाधीशों की नियुक्ति को मंजूरी दे दी।
सुप्रीम कोर्ट में जजों की स्वीकृत संख्या बढ़कर हुई 38
हाल ही में सर्वोच्च न्यायालय में स्वीकृत न्यायाधीशों की संख्या में चार की वृद्धि की गई है, जिससे भारत के मुख्य न्यायाधीश सहित कुल न्यायाधीशों की संख्या 38 हो गई है। वर्तमान में, सर्वोच्च न्यायालय में 32 न्यायाधीश कार्यरत हैं, जबकि न्यायमूर्ति जे. के. माहेश्वरी और न्यायमूर्ति पंकज मिथल की सेवानिवृत्ति के बाद जून में दो और पद रिक्त हो जाएंगे।
जजों की संख्या में इस बढ़ोत्तरी का मुख्य उद्देश्य देश की शीर्ष अदालत में लंबित मामलों के बोझ को कम करना और नियमित रूप से संविधान पीठों (Constitution Benches) का गठन कर न्यायिक प्रक्रिया में तेजी लाना है। (Supreme Court New Judges)
न्यायमूर्ति शील नागू (Justice Sheel Nagu): मध्य प्रदेश से सुप्रीम कोर्ट तक का सफर

न्यायमूर्ति शील नागू का जन्म 1 जनवरी, 1965 को हुआ था। उन्होंने वर्ष 1987 में एक वकील के रूप में अपना करियर शुरू किया। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट (जबलपुर) में वकालत करने के बाद, मई 2011 में उन्हें मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय का अतिरिक्त न्यायाधीश नियुक्त किया गया। 9 जुलाई 2024 को उन्होंने पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के रूप में शपथ ली। उनकी उत्कृष्ट कानूनी सेवाओं को देखते हुए उन्हें, 2 जून 2026 में सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश के रूप में नियुक्त किया गया।
न्यायमूर्ति श्री चंद्रशेखर (Justice Shree Chandrashekhar): कई चर्चित मामलों की सुनवाई का अनुभव

न्यायमूर्ति श्री चंद्रशेखर का जन्म 25 मई, 1965 को रांची, झारखंड में हुआ था। वे एक प्रमुख भारतीय न्यायविद हैं। उन्होंने बॉम्बे उच्च न्यायालय के 49वें मुख्य न्यायाधीश के रूप में कार्य किया है। उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय के कैंपस लॉ सेंटर से एलएलबी की पढ़ाई पूरी की। 1993 में बार काउंसिल में पंजीकरण के बाद उन्होंने लगभग दो दशकों तक वकालत की। उन्होंने मुख्य रूप से सुप्रीम कोर्ट में काम किया और कई बोर्ड व निगमों के लिए स्थायी वकील रहे। (Supreme Court New Judges)
जनवरी 2013 में उन्हें झारखंड उच्च न्यायालय का अतिरिक्त न्यायाधीश नियुक्त किया गया और जून 2014 में स्थायी न्यायाधीश बनाया गया। उन्होंने झारखंड उच्च न्यायालय के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश के तौर पर भी सेवाएं दीं। इसके बाद उनका तबादला राजस्थान हाईकोर्ट में हुआ। 5 सितंबर 2025 को उन्होंने बॉम्बे उच्च न्यायालय के 49वें मुख्य न्यायाधीश के रूप में शपथ ग्रहण की। न्यायमूर्ति चंद्रशेखर ने सोहराबुद्दीन शेख फर्जी मुठभेड़ और मालेगांव विस्फोट जैसे कई हाई-प्रोफाइल मामलों में पीठ का नेतृत्व किया है।
न्यायमूर्ति संजीव सचदेवा (Justice Sanjeev Sachdeva): बार से बेंच तक का लंबा अनुभव

न्यायमूर्ति संजीव सचदेवा का जन्म 26 दिसंबर 1964 को हुआ था। उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय के श्री राम कॉलेज ऑफ कॉमर्स और कैंपस लॉ सेंटर से स्नातक की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने 1995 में सर्वोच्च न्यायालय में एडवोकेट-ऑन-रिकॉर्ड के रूप में योग्यता प्राप्त की और 2011 में दिल्ली उच्च न्यायालय द्वारा उन्हें वरिष्ठ अधिवक्ता नामित किया गया। (Supreme Court New Judges)
सचदेवा दो दशकों से अधिक समय तक बार काउंसिल ऑफ इंडिया के स्थायी वकील के रूप में कार्य किया और न्यायपालिका में मानव संसाधन विकास से संबंधित राष्ट्रीय न्यायालय प्रबंधन प्रणाली उप-समिति का नेतृत्व भी किया। उन्हें 17 अप्रैल 2013 को दिल्ली उच्च न्यायालय का अतिरिक्त न्यायाधीश नियुक्त किया गया और 18 मार्च 2015 को वे स्थायी न्यायाधीश बन गए। उनका तबादला 2024 में मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय में कर दिया गया और बाद में उन्होंने 17 जुलाई 2025 को इसके 29वें मुख्य न्यायाधीश के रूप में शपथ ली। उन्हें 2 जून 2026 को भारत के सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में पदोन्नत किया गया।
न्यायमूर्ति अरुण पल्ली (Justice Arun Palli): कानूनी विरासत और न्यायिक योगदान

न्यायमूर्ति अरुण पल्ली भारत के सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश नामित किए गए हैं। इससे पहले, उन्होंने अप्रैल 2025 से जून 2026 तक जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस का दायित्व निभाया। 18 सितंबर 1964 को जन्मे जस्टिस पल्ली मूल रूप से पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय से आते हैं, जहाँ उन्होंने दिसंबर 2013 से अप्रैल 2025 तक न्यायाधीश के रूप में कार्य किया। वह एक प्रतिष्ठित कानूनी परिवार से आते हैं। उनके पिता प्रेम किशन पल्ली हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश थे। न्यायमूर्ति अरुण पल्ली की उत्कृष्ट कानूनी सेवाओं को देखते हुए उन्हें, 2 जून 2026 में सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश के रूप में नियुक्त किया गया। (Supreme Court New Judges)
वी. सुब्रमणि मोहना (senior advocate V Mohana): बार से सीधे सुप्रीम कोर्ट पहुंचने वाली दूसरी महिला

वरिष्ठ अधिवक्ता वेंकिता सुब्रमणि मोहना (V. Mohana) को सीधे सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश के रूप में पदोन्नत किया गया है, और वे न्यायमूर्ति इंदु मल्होत्रा (2018) के बाद बार से सीधे सर्वोच्च न्यायालय में पदोन्नत होने वाली भारत की केवल दूसरी महिला वकील हैं। वे बार (सीधे वकालत) से पदोन्नत होकर सर्वोच्च न्यायालय तक पहुँचने वाली देश की 11वीं और दूसरी महिला न्यायाधीश हैं। उन्होंने अपने करियर में संवैधानिक कानून, आपराधिक कानून, सेवा विवाद और संपत्ति/गिरवी मामलों में गहरी विशेषज्ञता हासिल की है।
एक वकील होने के साथ-साथ उन्होंने भारत सरकार के लिए एक पैनल वकील के रूप में कार्य किया है, सर्वोच्च न्यायालय में मध्यस्थ (Mediator) की भूमिका निभाई है, और कई बार ‘एमिकस क्यूरी’ (न्याय मित्र) के रूप में भी अदालत में पेश हुई हैं। उनकी नियुक्ति के बाद, शीर्ष न्यायालय में कार्यरत महिला न्यायाधीशों की संख्या बढ़कर दो (न्यायमूर्ति बी.वी. नागरत्ना के साथ) हो गई है। (Supreme Court New Judges)









