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TMC में बड़ी बगावत! 20 सांसदों ने मांगी अलग सीटिंग; ममता बनर्जी पर काकोली घोष का बड़ा हमला, बोलीं- मेरा सर कटेगा लेकिन झुकेगा नहीं…

West Bengal Politics

West Bengal Politics: तृणमूल कांग्रेस (TMC) की बागी सांसद डॉ. काकोली घोष दस्तीदार ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र लिखकर 20 सांसदों के एक गुट के लिए संसद में अलग बैठने की व्यवस्था करने का औपचारिक अनुरोध किया है। उन्होंने साफ किया कि वे सभी सांसद राष्ट्रीय हित और पश्चिम बंगाल के विकास के लिए केंद्र सरकार के साथ मिलकर काम करना चाहते हैं और वे किसी भी राजनीतिक दबाव के आगे नहीं झुकेंगी।

West Bengal Politics: कल्याण बनर्जी पर महिला विरोधी व्यवहार का आरोप

काकोली घोष दस्तीदार और बागी गुट ने पार्टी नेतृत्व और राज्य सरकार के खिलाफ कई गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने राज्य में बिगड़ती कानून व्यवस्था, बेरोजगारी और भ्रष्टाचार को मुख्य वजह बताया है। काकोली घोष ने टीएमसी के मुख्य सचेतक (Chief Whip) कल्याण बनर्जी पर लोकसभा के भीतर महिला सांसदों के प्रति अपमानजनक और महिला विरोधी व्यवहार करने का गंभीर आरोप लगाया है।

“मेरा सर कटेगा लेकिन झुकेगा नहीं” — काकोली घोष का तीखा संदेश

घोष दस्तीदार ने बताया कि टीएमसी से अलग होने का उनका निर्णय पश्चिम बंगाल में पार्टी की वर्तमान स्थिति और शासन संबंधी मुद्दों से गहरी असंतुष्टि के कारण है। उन्होंने आगे कहा, ‘मेरा सर कटेगा लेकिन झुकेगा नहीं। मैंने बहुत सहा है। मैं ममता बनर्जी के 2011 में मुख्यमंत्री बनने के बाद यहां नहीं आई थी। मैं यहां 40 वर्षों से संघर्ष कर रही हूं। और जैसा कि मैंने कहा, ऐसे लोगों के शब्दों का मुझ पर बिल्कुल भी असर नहीं होता।’ (West Bengal Politics)

सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने इस बात पर जोर दिया कि आंतरिक राजनीतिक अटकलों को दरकिनार करते हुए, उनका प्राथमिक ध्यान राष्ट्रीय हितों और देश की सुरक्षा पर केंद्रित है। उन्होंने कहा कि हम देखेंगे कि आगे क्या होता है। फिलहाल, क्या इतना काफी नहीं है कि हम बंगाल के लिए, देश के लिए और भारत को सुरक्षित रखने के लिए काम करना चाहते हैं? यह एक महत्वपूर्ण मुद्दा है। राष्ट्र का मुद्दा हमारे लिए सर्वोपरि है।

“मुझे दरकिनार किया गया” — TMC नेतृत्व पर फूटा काकोली घोष का गुस्सा

चुनाव परिणामों में प्रतिकूल परिणाम आने के बाद जिला अध्यक्ष पद से इस्तीफा देने की बात याद करते हुए, घोष दस्तीदार ने अपने साथ हुए व्यवहार पर निराशा व्यक्त की। उन्होंने कहा, ‘मैंने खराब नतीजों की व्यक्तिगत जिम्मेदारी ली, यह सोचते हुए कि शायद मैंने अपनी भूमिका प्रभावी ढंग से नहीं निभाई, और इसलिए मैंने पद छोड़ दिया। इसके बाद भी, मुझसे कोई मिलने नहीं आया और न ही किसी ने फोन किया। मुझे बस दरकिनार कर दिया गया।’ (West Bengal Politics)

40 साल पुराने रिश्ते में दरार, ममता बनर्जी पर साधा निशाना

सांसद, जिनका बनर्जी के साथ चार दशकों से संबंध रहा है, उन्होंने अपने पेशेवर संबंधों में आई गिरावट पर दुख जताया। उन्होंने कहा, ‘मैं ममता बनर्जी के साथ 40 साल से हूं। मैंने कभी कल्पना भी नहीं की थी कि मुझे वह दिन देखना पड़ेगा जब वह किसी को मुझ पर अपशब्द बोलने का निर्देश देंगी। ऐसा लगा जैसे उन्होंने किसी को भौंकने के लिए छोड़ दिया हो।’

काकोली घोष का बड़ा दावा- हमारे साथ 20 सांसद, बंगाल के लिए अलग राह चुनेंगे

इससे पहले, दस्तीदार ने यह घोषणा करके अपनी पार्टी के भीतर आंतरिक संकट को और बढ़ा दिया कि 20 सांसदों के एक गुट ने लोकसभा अध्यक्ष से अलग बैठने की व्यवस्था के लिए औपचारिक रूप से अनुरोध किया है। मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने बताया, ‘हम 20 सांसद हैं, जिन्होंने अध्यक्ष से अलग बैठने की व्यवस्था का अनुरोध किया है, और हम पश्चिम बंगाल के विकास के लिए केंद्र और राज्य सरकार के साथ मिलकर काम करेंगे।’ (West Bengal Politics)

घोष दस्तीदार ने आगे कहा, “हम पिछले कुछ वर्षों से पश्चिम बंगाल राज्य में व्याप्त अराजकता, कुशासन और बेरोजगारी के खिलाफ हैं। हालात बद से बदतर होते जा रहे हैं, और मैं ममता बनर्जी के साथ 40 वर्षों से जुड़ी हुई हूं। यह कहना व्यर्थ है कि पश्चिम बंगाल में उनके सत्ता में न होने से मैंने उनका साथ छोड़ दिया है। ऐसा बिल्कुल नहीं है।’

घोष ने आरोप लगाया कि पिछले तीन से चार वर्षों में, सरकारी अधिकारियों पर कुछ नेतृत्व की सनक और इच्छाओं के अनुसार काम करने का बहुत अधिक दबाव था। उन्होंने कहा, “हम राज्य के विकास, राष्ट्रीय हित और राष्ट्र की सुरक्षा के लिए काम करना चाहते हैं। इसीलिए हम अलग-अलग काम करना चाहते हैं।” (West Bengal Politics)

राष्ट्रीय हित के नाम पर TMC से बगावत, 20 सांसदों का शक्ति प्रदर्शन

काकोली घोष दस्तीदार का यह बयान पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों में पार्टी की हार के बाद तेज हुई आंतरिक उथल-पुथल के बीच आया है, जिसमें राज्य ने अपनी पहली भाजपा सरकार चुनी। इस बीच, दलबदल विरोधी कानून के तहत किसी गुट को स्वतः अयोग्य घोषित होने से बचने के लिए पार्टी की कम से कम दो-तिहाई बहुमत की आवश्यकता होती है।

टीएमसी के पास 28 सीटें हैं, ऐसे में बागी सांसदों को अपने कदम को कानूनी रूप से वैध बनाने के लिए केवल 19 सांसदों के समर्थन की आवश्यकता है। काकोली के 20 सांसदों के समर्थन का दावा देखते हुए ममता बनर्जी गुट का पतन निकट प्रतीत होता है। ये घटनाक्रम टीएमसी नेतृत्व के लिए अब तक की सबसे महत्वपूर्ण संसदीय चुनौती पेश करते हैं, जो पश्चिम बंगाल के राजनीतिक परिदृश्य में एक अस्थिर नए अध्याय का संकेत देते हैं। (West Bengal Politics)

इससे पहले पार्टी को अपने विधायकों के विद्रोह का सामना करना पड़ा था, जिसमें निष्कासित विधायक ऋतब्रता बनर्जी ने कहा था कि टीएमसी के 58 विधायकों को विधानसभा में विपक्षी समूह के रूप में मान्यता दी गई है।

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