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‘छात्रों का असली दुश्मन RSS’, लोकसभा में राहुल गांधी के बयान से मचा बवाल; शिक्षा व्यवस्था पर लगाए गंभीर आरोप

Rahul Gandhi

Rahul Gandhi: लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने बुधवार को सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 पर चर्चा के दौरान केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने देश की शिक्षा व्यवस्था में बार-बार होने वाले पेपर लीक को लेकर सीधे तौर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और केंद्र सरकार को निशाने पर लिया।

Rahul Gandhi: धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा ‘सतही’, राहुल बोले- फैसले मंत्री नहीं, OSD और RSS लेते हैं

राहुल गांधी ने दावा किया कि देश के युवाओं और छात्रों का असली दुश्मन RSS है। उन्होंने आरोप लगाया कि संघ छात्रों को स्वतंत्र रूप से सोचने की आजादी नहीं दे रहा है और उन्हें “अंधभक्त” बनाना चाहता है। राहुल गांधी ने कहा कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा मांगना या उनका इस्तीफा देना बेहद सतही (superficial) होगा, क्योंकि शिक्षा मंत्रालय वास्तव में धर्मेंद्र प्रधान नहीं बल्कि RSS चला रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि मंत्री के दफ्तर में बैठा एक ओएसडी (OSD) इस मंत्रालय को नियंत्रित करता है।

लोकसभा में बहस में भाग लेते हुए गांधी (Rahul Gandhi) ने आरोप लगाया कि देश की शिक्षा प्रणाली पर आरएसएस का कब्जा हो गया है और सरकार पर छात्रों को स्वतंत्र रूप से सोचने की स्वतंत्रता से वंचित करने का आरोप लगाया। गांधी ने कहा, “हमारी व्यवस्था भयानक है, यह क्रूर है… सब कुछ निजीकरण किया जा रहा है… यह एक जबरन वसूली की व्यवस्था है, यह एक क्रूर, भयानक व्यवस्था है। व्यवस्था की आत्मा पर आरएसएस का कब्जा हो चुका है।”

लोकसभा में राहुल गांधी का बड़ा हमला, बोले- शिक्षा मंत्रालय नहीं, RSS चला रहा है व्यवस्था

केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग का जिक्र करते हुए गांधी (Rahul Gandhi) ने कहा, “राजनाथ सिंह ने कहा था कि हम यूपीए नहीं हैं, हमारे मंत्री कभी इस्तीफा नहीं देते। वे सही हैं। धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा दिखावटी है क्योंकि धर्मेंद्र प्रधान ने कभी शिक्षा मंत्रालय नहीं चलाया। शिक्षा मंत्रालय चलाने वाली संस्था आरएसएस है। इसे चलाने वाला व्यक्ति मंत्री के कार्यालय में बैठा एक ओएसडी है।”

कांग्रेस नेता ने आगे आरोप लगाया कि छात्रों को अपनी रुचियों को आगे बढ़ाने और व्यवस्था पर सवाल उठाने से रोका जा रहा है। उन्होंने कहा, “छात्रों की असली नाराजगी इस बात से है कि उन्हें भारत में छात्र बनकर रहने की इजाजत नहीं है, उन्हें अपने जुनून को निभाने की इजाजत नहीं है, उन्हें अपनी मर्जी की बातें कहने की इजाजत नहीं है, उन्हें अपने मनचाहे सवाल पूछने की इजाजत नहीं है। उन्हें आरएसएस द्वारा गढ़े गए इस बेतुके इतिहास को मानना पड़ता है… धर्मेंद्र प्रधान एक प्रतीक हैं, असली दुश्मन आरएसएस है … यही वो लोग हैं जो चाहते हैं कि आप ‘अंधभक्त’ बनें।”

परीक्षा संशोधन विधेयक पर गरमाई लोकसभा

भाषण के दौरान उन्होंने लोगों को दो श्रेणियों में बांटा—एक ‘छात्र’ (जो सीखना चाहते हैं) और दूसरे ‘इडियट्स’ व ‘अंधभक्त’ (जो दूसरों की बात नहीं सुनते)। इस टिप्पणी पर सत्तापक्ष के सांसदों ने संसद में भारी हंगामा किया। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रीजीजू और भाजपा के अन्य वरिष्ठ नेताओं ने राहुल गांधी (Rahul Gandhi) की भाषा पर सख्त आपत्ति जताई। उन्होंने आरोप लगाया कि नेता प्रतिपक्ष संसद में “अमर्यादित और अपमानजनक” शब्दों का प्रयोग कर रहे हैं।

ट्रेजरी बेंच (सत्तापक्ष) और लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने राहुल गांधी को टोकते हुए कहा कि वे बिना किसी पुख्ता सबूत या आदेश के गृह मंत्री या अन्य मंत्रियों पर सीधे और गंभीर आरोप न लगाएं। सदन में बढ़ते गतिरोध के कारण कार्यवाही को कुछ समय के लिए स्थगित भी करना पड़ा। केंद्रीय मंत्रियों ने विपक्षी दलों से अपील की कि वे छात्रों के भविष्य और परीक्षाओं से जुड़े इस संवेदनशील विधेयक पर राजनीति करने के बजाय सकारात्मक सुझाव दें।

क्या है यह परीक्षा संशोधन विधेयक, 2026?

यह बहस केंद्र सरकार द्वारा संसद में पेश किए गए सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 पर हो रही थी। सरकार ने साल 2024 के मूल कानून को और अधिक सख्त बनाने के लिए यह संशोधन पेश किया है। इसके अंतर्गत व्यक्तिगत रूप से गड़बड़ी करने वालों के लिए जेल की सजा को बढ़ाकर 5 से 10 साल और जुर्माने को 50 लाख रुपये तक करने का प्रस्ताव है। पेपर लीक कराने वाले संगठित गिरोहों के लिए 7 से 10 साल की जेल और न्यूनतम 10 करोड़ रुपये के जुर्माने का प्रावधान है। (Rahul Gandhi)

इसके अलावा, मामलों की त्वरित सुनवाई के लिए विशेष फास्ट-ट्रैक अदालतें बनाई जाएंगी, जो रोजाना सुनवाई कर 3 महीने के भीतर फैसला सुनाएंगी। साथ ही जांच के लिए 2 महीने की सख्त समयसीमा के साथ विशेष कार्य बल (STF) के गठन का अधिकार केंद्र को दिया गया है। जहां सरकार इस कानून को पेपर लीक रोकने और छात्रों के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए एक ऐतिहासिक कदम बता रही है, वहीं विपक्ष इसे केवल एक “दिखावा और कॉस्मेटिक बदलाव” करार देते हुए पूरी शिक्षा प्रणाली में गहरे सुधारों की मांग कर रहा है।

Vaishali
Author: Vaishali

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