Nepal Flash Floods: नेपाल में अचानक आई विनाशकारी बाढ़ और भूस्खलन से मरने वालों की संख्या बढ़कर 788 तक पहुंच गई है, जबकि 2,500 से अधिक लोग अब भी लापता हैं। इस भीषण प्राकृतिक आपदा के बीच भारत सरकार ने बड़े पैमाने पर राहत अभियान चलाकर 140 से अधिक भारतीय नागरिकों को सुरक्षित स्थानों पर पहुँचाया है। तिब्बत सीमा पर लांगटांग लिरुंग पर्वत शृंखला में हुए एक बड़े भूस्खलन और मलबे के बहाव के कारण 26 अगस्त को अचानक भोटेकोशी और त्रिशूली नदियों में यह विनाशकारी सैलाब आया था।
Nepal Flash Floods: ग्लेशियर ढहने से आई विनाशकारी बाढ़, मचा हाहाकार
शुरुआती आकलनों के अनुसार, इस तबाही की मुख्य वजह तिब्बत सीमा के पास ऊंचे पर्वतीय क्षेत्र में एक विशाल ग्लेशियर का ढहना या भूस्खलन माना जा रहा है। उपग्रहीय तस्वीरों से संकेत मिले हैं कि इस भूगर्भीय हलचल के कारण भोटेकोशी नदी में बुधवार सुबह अचानक तीव्र गति से पानी और भारी मलबा नीचे की ओर बहा। इसके रास्ते में जो भी बुनियादी ढांचा आया, वह ताश के पत्तों की तरह ढह गया। नेपाल के रसुवा, नुवाकोट, धादिंग, गोरखा, तनहुन, नवलपरासी और चितवन जैसे जिले इस आपदा से सबसे बुरी तरह प्रभावित हुए हैं।
बाढ़ का वेग इतना भयानक था कि यह मलबे और शवों को बहाकर सैकड़ों किलोमीटर दूर भारत के तटीय जिलों तक ले गया। नेपाल आपदा प्राधिकरण (NDRRMA) के अनुसार, वर्तमान में सबसे अधिक मौतें चितवन (264), नवलपरासी ईस्ट (194) और नवलपरासी वेस्ट (120) में दर्ज की गई हैं। (Nepal Flash Floods)
नेपाल में राहत-बचाव अभियान तेज, भारतीय नागरिकों का रेस्क्यू
इस आपदा के समय बड़ी संख्या में भारतीय नागरिक, जिनमें मुख्य रूप से तीर्थयात्री, पर्यटक और जलविद्युत परियोजनाओं के कर्मचारी शामिल थे, प्रभावित क्षेत्रों में फंसे हुए थे। भारत के विदेश मंत्रालय (MEA) के अनुसार, अब तक लगभग 149 से 180 भारतीय नागरिकों को सफलतापूर्वक एयरलिफ्ट और जमीनी रास्तों से निकालकर सुरक्षित स्थानों पर पहुँचाया जा चुका है। तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश के तीर्थयात्रियों के जत्थों को सुरक्षित स्थानों पर वापस लाने के विशेष इंतजाम किए गए हैं।
आपदा के समय चीन (तिब्बत) की ओर फंसे लगभग 598 भारतीय नागरिक भी जमीनी रास्ते से सुरक्षित रूप से नेपाल सीमा में प्रवेश कर चुके हैं। अधिकारियों के मुताबिक, अभी भी करीब 275 से 320 भारतीय नागरिक लापता या संपर्क से बाहर बताए जा रहे हैं, जिनकी खोजबीन के लिए युद्धस्तर पर प्रयास जारी हैं। (Nepal Flash Floods)
सुरंगों में फंसे मजदूरों की तलाश, भारत-चीन जुटे
बाढ़ के कारण नेपाल की प्रमुख जलविद्युत परियोजनाओं, विशेषकर त्रिशूली 3A और 3B (Trishuli 3A and 3B), की सुरंगों में भारी मलबा और पानी भर गया। इन प्रोजेक्ट्स में काम करने वाले 900 से अधिक कर्मचारी लापता हैं, जिनमें से लगभग 100 कर्मचारियों के सुरंगों के भीतर जीवित फंसे होने की उम्मीद है। नेपाल सेना के साथ मिलकर भारत और चीन के विशेषज्ञ भारी मशीनरी के जरिए सुरंगों की छतों में ड्रिलिंग (छेद) करके अंदर घुसने और जीवित बचे लोगों को निकालने का प्रयास कर रहे हैं।
नेपाल में शवों की बढ़ती संख्या बनी बड़ी चुनौती
संकट की इस घड़ी में भारत सरकार ने नेपाल को केवल खाद्य सामग्री ही नहीं, बल्कि तकनीकी विशेषज्ञता भी प्रदान की है। भारत ने चिलिमे और लांगटांग प्रोजेक्ट साइटों पर जटिल रेस्क्यू ऑपरेशन के लिए अपनी विशेष टनल बचाव टीम तैनात की है। नेपाल में बरामद शवों की संख्या इतनी अधिक है कि वहां के अस्पतालों के फ्रीजर छोटे पड़ रहे हैं, जिससे शवों के सड़ने और महामारी फैलने का खतरा बढ़ गया है। (Nepal Flash Floods)
इस समस्या से निपटने और पीड़ितों की पहचान स्थापित करने के लिए भारत की 19 सदस्यीय फोरेंसिक टीम डीएनए (DNA) जांच और शिनाख्त कार्य में काठमांडू के अस्पतालों की मदद कर रही है। भारतीय वायुसेना के विमानों द्वारा अब तक 68.5 टन से अधिक आपातकालीन राहत आपूर्ति (दवाएं, टेंट, कपड़े और भोजन) नेपाल पहुंचाई जा चुकी है।
भोटेकोशी नदी में फिर बढ़ा जलस्तर, फ्लैश फ्लड का खतरा
बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में मौसम लगातार खराब बना हुआ है, जिससे हवाई रेस्क्यू ऑपरेशनों में भारी रुकावटें आ रही हैं। इस बीच, चीनी अधिकारियों द्वारा नेपाल सरकार को ऊपरी क्षेत्र से पानी का बहाव बढ़ने की चेतावनी दी गई है। इसके बाद भोटेकोशी नदी का जलस्तर एक बार फिर खतरनाक रूप से बढ़ गया है, जिससे निचले इलाकों में दोबारा फ्लैश फ्लड का खतरा मंडरा रहा है। प्रशासन ने नदी के किनारे रहने वाले लोगों को तुरंत सुरक्षित स्थानों पर जाने और राहत दलों को अत्यधिक सतर्कता बरतने की सलाह दी है। (Nepal Flash Floods)









