Mayawati Sacks Nephew Akash Anand From BSP: भारतीय राजनीति में वंशवाद और उत्तराधिकार की कहानियां नई नहीं हैं, लेकिन बहुजन समाज पार्टी (बसपा) जैसी कैडर-आधारित और कड़े अनुशासन वाली पार्टी में जब यह स्क्रिप्ट बार-बार लिखी और मिटाई जाए, तो वह पूरे देश का ध्यान खींचती है। बसपा सुप्रीमो मायावती के भतीजे आकाश आनंद का राजनीतिक सफर इसका सबसे बड़ा उदाहरण बन चुका है। पिछले कुछ वर्षों में उनके करियर में जो कुछ भी घटा है, उसे राजनीतिक विश्लेषक केवल तीन शब्दों में समेट रहे हैं—’प्रमोट, पनिश और रिपीट’।
मायावती ने आकाश आनंद को ‘डबल माइंडेड’ और ‘राजनीतिक रूप से अपरिपक्व’ बताते हुए एक बार फिर पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया है। आइए जानते हैं कि लंदन से पढ़े-लिखे एक युवा नेता का बहुजन आंदोलन में यह उतार-चढ़ाव भरा सफर कैसा रहा और क्यों बसपा में अनुशासन और महात्वाकांक्षा के बीच यह जंग चल रही है।
Mayawati Sacks Nephew Akash Anand From BSP: एंट्री और पहला प्रमोशन- ‘अर्श’ पर आकाश (2019 – 2023)
आकाश आनंद पहली बार 2019 के लोकसभा चुनाव के दौरान चर्चा में आए जब वे अखिलेश यादव और मायावती के मंचों पर नजर आने लगे थे। लंदन से एमबीए की डिग्री पूरी करने के बाद जब वे राजनीति में लौटे, तो उन्हें बसपा के आधुनिक और युवा चेहरे के रूप में देखा गया।
2023 में मायावती ने लखनऊ की एक बड़ी बैठक में आधिकारिक तौर पर आकाश आनंद को अपना राजनीतिक उत्तराधिकारी घोषित किया। उन्हें पार्टी का राष्ट्रीय संयोजक बनाया गया और उत्तर प्रदेश को छोड़कर अन्य राज्यों में पार्टी के विस्तार की बड़ी जिम्मेदारी दी गई। यह उनका पहला बड़ा ‘प्रमोशन’ था, जहां वे सीधे नंबर दो की हैसियत में आ गए थे।
पहली सजा और यू-टर्न (2024)
2024 के लोकसभा चुनावों के दौरान आकाश आनंद को उत्तर प्रदेश और अन्य राज्यों में रैलियों की कमान सौंपी गई। युवा खून और नया अंदाज लेकर आए आकाश ने अपने भाषणों में आक्रामकता दिखाना शुरू किया। उन्होंने भाजपा सरकार की तुलना ‘तालिबान’ से कर दी और उन पर तीखे हमले किए, जिसके चलते उन पर एफआईआर (FIR) भी दर्ज हुई। मायावती को आकाश की यह आक्रामकता और ‘अपरिपक्वता’ पसंद नहीं आई।
चुनाव के बीच में ही उन्हें राष्ट्रीय संयोजक और उत्तराधिकारी के पद से हटा दिया गया। यह ‘पनिश’ का दौर लंबा नहीं चला। जून 2024 में उनकी फिर से बहाली हुई, लेकिन असल वापसी अप्रैल 2025 में एक सार्वजनिक माफीनामे के बाद हुई। आकाश ने सोशल मीडिया पर पोस्ट लिखकर मायावती को अपना एकमात्र ‘राजनीतिक गुरु’ माना और इन-लॉज के प्रभाव से दूर रहने की कसम खाई। इसके बाद मई 2025 में मायावती ने उन्हें दोबारा पार्टी का चीफ नेशनल कोऑर्डिनेटर बना दिया। (Mayawati Sacks Nephew Akash Anand From BSP)
‘रिपीट’ हुआ इतिहास: सितंबर 2026 का बड़ा झटका
साल 2026 में 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों की तैयारियां तेज हो चुकी थीं। अगस्त 2026 में आकाश आनंद को एक बार फिर बड़ी रैलियों (जैसे हापुड़, जेवर और नोएडा) के जरिए बसपा के चेहरे के रूप में प्रोजेक्ट किया जाने लगा। उन्होंने सोशल मीडिया पर दलितों के मुद्दों (जैसे लखनऊ के रैपिडो ड्राइवर का मामला) को लेकर आक्रामक स्टैंड लिया। वे अखिलेश यादव और राहुल गांधी को अंकल कहकर उन पर चुटकी लेते दिखे। लेकिन इतिहास ने खुद को फिर दोहराया।
3 सितंबर 2026 को मायावती ने अचानक राष्ट्रीय पदाधिकारियों की बैठक बुलाई और आकाश आनंद को फिर से राष्ट्रीय संयोजक के पद से हटा दिया। 10 सितंबर 2026 यानी आज मायावती ने उन्हें पूरी तरह से पार्टी से बेदखल कर दिया। मायावती ने आरोप लगाया कि आकाश आनंद अपने राजनीतिक करियर और बहुजन मिशन से ज्यादा अपने ससुर अशोक सिद्धार्थ (पूर्व राज्यसभा सांसद) और पारिवारिक रिश्तों को तवज्जो दे रहे हैं। उन्होंने आकाश को ‘डबल माइंडेड’ कहा। इस राजनीतिक उथल-पुथल के बीच मायावती ने अब आकाश आनंद को किनारे कर उनके छोटे भाई ईशान आनंद को बड़ी संगठनात्मक जिम्मेदारियां सौंप दी हैं। (Mayawati Sacks Nephew Akash Anand From BSP)
यह उतार-चढ़ाव बसपा के लिए क्या संकेत है?
मायावती ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि बसपा में उनके फैसले ही अंतिम हैं। चाहे वह उनका सगा भतीजा ही क्यों न हो, अगर कोई पार्टी की लाइन या उनके तय किए गए रास्ते से अलग जाने की कोशिश करेगा, तो उसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। हालिया निष्कासन के पीछे पारिवारिक और राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं का टकराव सबसे बड़ा कारण बनकर उभरा है। मायावती की फटकार के बाद आकाश के ससुर अशोक सिद्धार्थ ने राजनीति से संन्यास की घोषणा भी की, लेकिन मायावती ने इसे ‘देर से लिया गया फैसला’ बताया और आकाश को ‘मुक्त’ कर दिया।
बसपा का गिरता ग्राफ और संकट
यह आंतरिक कलह ऐसे समय पर आ रही है जब बसपा का वोट शेयर उत्तर प्रदेश में लगातार गिर रहा है। ऐसे में नेतृत्व को लेकर बार-बार होने वाले ये बदलाव कार्यकर्ताओं को भ्रमित कर रहे हैं और चंद्रशेखर आज़ाद जैसे युवा दलित नेताओं को उभरने का मौका दे रहे हैं। (Mayawati Sacks Nephew Akash Anand From BSP)
आकाश आनंद का राजनीतिक सफर किसी रोलर-कोस्टर राइड से कम नहीं रहा है। वे कभी फर्श से अर्श पर पहुंचते हैं, तो कभी सिर्फ एक साधारण कार्यकर्ता या ‘सपोर्टर’ बनकर रह जाते हैं। फिलहाल, आकाश आनंद ने अपने सोशल मीडिया बायो को बदलकर ‘बसपा सपोर्टर’ कर लिया है और कहा है कि बहुजन मूवमेंट की लड़ाई लंबी है। लेकिन यह ‘प्रमोट, पनिश और रिपीट’ का चक्र यहीं थमेगा या भविष्य में कोई नया मोड़ लेगा, यह पूरी तरह से बसपा सुप्रीमो मायावती के अगले कदम और उत्तर प्रदेश की बदलती सियासत पर निर्भर करता है।









