25 Years of PM Modi: 7 अक्टूबर 2001 को जब गुजरात में नरेंद्र मोदी ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी, तब शायद ही किसी ने सोचा होगा कि ये शख्स आगे चलकर 13 साल तक गुजरात की कमान संभालेगा और फिर देश की राजनीति की तस्वीर ही बदल देगा। अब वही नरेंद्र मोदी अपने सार्वजनिक जीवन के 25 साल पूरे करने जा रहे हैं। लेकिन इन 25 सालों की कहानी सिर्फ चुनाव जीतने और सरकार चलाने की कहानी नहीं है।
ये कहानी है एक छोटे से गांव के उस लड़के की, जिसने कभी चाय बेची, फिर RSS से जुड़ा और धीरे-धीरे राजनीति की सीढ़ियां चढ़ते हुए देश की सबसे बड़ी राजनीतिक कुर्सी तक पहुंच गया।

25 Years of PM Modi: किसी ने देश तो किसी ने राज्य संभाला, मोदी का सफर दोनों स्तरों पर लंबा
नरेंद्र मोदी लगभग 13 साल गुजरात के मुख्यमंत्री रहे और पिछले 12 साल से ज्यादा समय से देश के प्रधानमंत्री हैं। हालांकि प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के तौर पर देश में कई नेताओं ने लंबे समय तक कमान संभाली है। प्रधानमंत्री की बात करें तो पंडित जवाहरलाल नेहरू करीब 16 साल 286 दिन तक देश के प्रधानमंत्री रहे, इंदिरा गांधी करीब 15 साल तक इस पद पर रहीं और डॉ. मनमोहन सिंह ने करीब 10 साल तक प्रधानमंत्री के तौर पर देश की कमान संभाली।
वहीं राज्यों में देखें तो सिक्किम के पवन कुमार चामलिंग करीब 24 साल 165 दिन तक मुख्यमंत्री रहे, नवीन पटनायक ने ओडिशा की करीब 24 साल तक कमान संभाली और पश्चिम बंगाल में ज्योति बसु करीब 23 साल तक मुख्यमंत्री रहे। यानी किसी ने देश की सत्ता में लंबा वक्त बिताया, तो किसी ने अपने राज्य में दशकों तक सरकार चलाई। (25 Years of PM Modi)
लेकिन नरेंद्र मोदी का सफर इसलिए अलग है, क्योंकि उन्होंने करीब 13 साल गुजरात के मुख्यमंत्री के तौर पर कमान संभाली और उसके बाद 2014 से लगातार देश के प्रधानमंत्री हैं। यानी राज्य की सत्ता से लेकर केंद्र की सत्ता तक, दोनों स्तरों पर इतने लंबे समय तक राजनीतिक नेतृत्व करना ही मोदी के 25 साल के सफर को खास बनाता है।

वडनगर से शुरू हुआ सफर, देश की सत्ता तक पहुंची कहानी
इस कहानी की शुरुआत गुजरात के वडनगर से होती है, जहां 17 सितंबर 1950 को नरेंद्र मोदी का जन्म हुआ। साधारण परिवार से आने वाले मोदी का बचपन आर्थिक चुनौतियों के बीच बीता और इसी दौरान उनका जुड़ाव RSS यानी संघ से हो गया। करीब 8 साल की उम्र से वे संघ की शाखाओं में जाने लगे। आगे चलकर देश और समाज को समझने की उनकी तलाश उन्हें कुछ समय के लिए घर से दूर भी ले गई। लेकिन उनकी राजनीतिक दिशा तब साफ हुई, जब 1971 में वे पूरी तरह संघ के प्रचारक बन गए। (25 Years of PM Modi)
अहमदाबाद में रहते हुए उन्होंने संगठन के छोटे-छोटे कामों से शुरुआत की और धीरे-धीरे संघ की कार्यशैली, लोगों से जुड़ने और संगठन को मजबूत करने का तरीका सीखा। यहीं से नरेंद्र मोदी की वो राजनीतिक यात्रा शुरू हुई, जो आगे चलकर उन्हें गुजरात की सत्ता और फिर देश के प्रधानमंत्री पद तक ले जाने वाली थी।
बीजेपी में एंट्री के बाद बढ़ता गया मोदी का कद
1975 की इमरजेंसी के दौरान वे भूमिगत रहकर आंदोलन से जुड़े काम करते रहे और संघ के नेटवर्क को संभालने में अहम भूमिका निभाई। इमरजेंसी खत्म होने के बाद संगठन के अंदर उनकी पहचान एक ऐसे युवा नेता की बनने लगी, जो प्लानिंग और मैनेजमेंट में मजबूत था। इसके बाद 1987 में नरेंद्र मोदी बीजेपी में आए और गुजरात बीजेपी के संगठन सचिव बने।
अहमदाबाद नगर निगम चुनाव में पार्टी की जीत के बाद उनका कद तेजी से बढ़ा। 1990 की आडवाणी की राम रथ यात्रा और 1991-92 की मुरली मनोहर जोशी की एकता यात्रा के प्रबंधन में भी उनकी बड़ी भूमिका रही। इन सफलताओं ने उन्हें पार्टी के बड़े रणनीतिकारों में शामिल कर दिया। (25 Years of PM Modi)
1995 में उन्हें बीजेपी का राष्ट्रीय सचिव और 1998 में राष्ट्रीय महासचिव संगठन बनाया गया। इसके बाद उन्होंने कई राज्यों में पार्टी का संगठन मजबूत करने का काम किया। खास बात ये थी कि 2001 तक मोदी खुद कोई चुनाव नहीं लड़े थे। यानी करीब तीन दशक तक उनका पूरा फोकस चुनाव लड़ने से ज्यादा संगठन खड़ा करने, रणनीति बनाने और पार्टी को मजबूत करने पर रहा। और फिर 2001 में शुरुर हुई उनकी 25 साल की मेनस्ट्रीम पॉलिटिकल जर्नी।
7 अक्टूबर 2001: गुजरात की कमान संभालने का निर्णायक मोड़
भुज में आए भीषण भूकंप के बाद तत्कालीन मुख्यमंत्री केशुभाई पटेल की सेहत और काम को लेकर सवाल उठ रहे थे। ऐसे में बीजेपी आलाकमान ने एक बड़ा फैसला लिया, जिसके बाद 7 अक्टूबर 2001 को नरेंद्र मोदी ने पहली बार गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली। इसके बाद 2002, 2007 और 2012 के विधानसभा चुनावों में उन्होंने बीजेपी को एकतरफा और बड़ी जीत दिलाई। (25 Years of PM Modi)
मुख्यमंत्री रहते हुए उन्होंने ‘गुजरात मॉडल’ की नींव रखी। उन्होंने ‘वाइब्रेंट गुजरात’ समिट के जरिए दुनिया भर के निवेशकों को राज्य में बुलाया। गांवों में 24 घंटे बिजली देने के लिए ‘ज्योतिग्राम योजना’ शुरू की, सड़कों का जाल बिछाया और पानी के संकट को दूर करने के लिए नर्मदा के पानी को दूर-दराज के इलाकों तक पहुंचाया।
2014: गुजरात से निकलकर दिल्ली की सत्ता तक
लगभग 13 साल तक गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में उनके काम ने उन्हें देश भर के कार्यकर्ताओं और जनता की पहली पसंद बना दिया। फिर आया भारत की राजनीती का सबसे बड़ा चैप्टर। 2013 में बीजेपी ने नरेंद्र मोदी को अपना प्रधानमंत्री उम्मीदवार घोषित किया। 2014 के चुनाव प्रचार में उन्होंने पूरे देश में घूम-घूम कर रैलियां कीं और ‘अच्छे दिन’ व ‘सबका साथ, सबका विकास’ का नारा दिया। 2014 के लोकसभा चुनाव नतीजों ने 30 साल पुराना रिकॉर्ड तोड़ दिया और बीजेपी ने अपने दम पर पूर्ण बहुमत हासिल किया। 26 मई 2014 को उन्होंने देश के 14वें प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ली। (25 Years of PM Modi)
पहला कार्यकाल: जनधन, स्वच्छ भारत और उज्ज्वला से बड़ा बदलाव
अपने पहले कार्यकाल में उन्होंने ज़मीनी स्तर पर बदलाव लाने वाली कई बड़ी योजनाएं शुरू कीं। ‘जन धन योजना’ के ज़रिए करोड़ों गरीबों के बैंक खाते खोले गए ताकि सरकारी मदद सीधे उनके खाते में पहुंच सके। ‘स्वच्छ भारत अभियान’ चलाकर देश भर में शौचालय बनाए गए और साफ-सफाई को एक जनांदोलन बनाया गया। महिलाओं के लिए ‘उज्ज्वला योजना’ के तहत मुफ्त एलपीजी गैस कनेक्शन दिए गए।
नोटबंदी और GST: अर्थव्यवस्था पर पड़े बड़े फैसलों का असर
इसी कार्यकाल में उन्होंने दो ऐसे कड़े और बड़े फैसले लिए, जिसने देश की अर्थव्यवस्था की दिशा बदल दी। पहला फैसला था 2016 में ‘नोटबंदी’, जिसका मकसद काले धन और जाली नोटों पर लगाम लगाना था और दूसरा फैसला था 2017 में ‘GST’ यानी गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स को लागू करना, जिसने पूरे देश को एक सिंगल टैक्स सिस्टम के तहत ला खड़ा किया। (25 Years of PM Modi)
2019 की वापसी और अनुच्छेद 370 का बड़ा फैसला
इसके बाद 2019 के लोकसभा चुनाव में देश की जनता ने उनके काम पर फिर से मुहर लगाई और इस बार बीजेपी को 303 सीटें मिलीं। जिसके बाद अगस्त 2019 में गृह मंत्री अमित शाह के साथ मिलकर सरकार ने जम्मू-कश्मीर से ‘अनुच्छेद 370’ और 35A को हटाने का ऐतिहासिक फैसला लिया और राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों में बांट दिया। इसके बाद नागरिकता संशोधन कानून यानी CAA पास किया गया। वर्षों से चले आ रहे विवाद के बाद जब सुप्रीम कोर्ट का फैसला आया, तो अयोध्या में भव्य राम मंदिर के निर्माण का रास्ता साफ हुआ और जनवरी 2024 में पीएम मोदी ने खुद रामलला की प्राण प्रतिष्ठा की।
2024 में लगातार तीसरी बार प्रधानमंत्री बनने का इतिहास
इसी कार्यकाल के दौरान देश को कोविड-19 जैसी सदी की सबसे बड़ी महामारी का सामना करना पड़ा। भारत जैसे बड़ी आबादी वाले देश के लिए यह बहुत कठिन समय था। लेकिन पीएम मोदी के नेतृत्व में देश में ही दो स्वदेशी वैक्सीन तैयार की गईं और दुनिया का सबसे बड़ा मुफ्त वैक्सीनेशन अभियान चलाया गया। (25 Years of PM Modi)
इसके साथ ही महामारी के दौरान गरीबों को भूखा न सोना पड़े, इसके लिए ‘प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना’ के तहत 80 करोड़ से ज्यादा लोगों को मुफ्त राशन देने की शुरुआत हुई, जो आज भी जारी है और फिर 2024 के लोकसभा चुनावों में NDA को बहुमत मिला और नरेंद्र मोदी लगातार तीसरी बार देश के प्रधानमंत्री बने। पंडित जवाहरलाल नेहरू के बाद लगातार तीन बार प्रधानमंत्री बनने वाले वे देश के दूसरे नेता बने।
2026: प्रधानमंत्री के रूप में लंबी पारी का नया रिकॉर्ड
अपने इस तीसरे कार्यकाल के दौरान जून 2026 में नरेंद्र मोदी ने एक ऐसा रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया, जो भारत के राजनीतिक इतिहास में अमर हो गया। वे भारत के इतिहास में ‘सबसे लंबे समय तक सेवा करने वाले निर्वाचित प्रधानमंत्री’ बन गए। उन्होंने पंडित जवाहरलाल नेहरू के उस रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया जो लगातार चुनावों के जरिए चुनी गई सरकारों के मुखिया के रूप में था।
नरेंद्र मोदी इकलौते ऐसे नेता हैं, जिन्होंने 13 साल तक गुजरात जैसे बड़े राज्य की कमान संभाली और फिर लगातार 12 साल से ज्यादा समय से देश के प्रधानमंत्री के रूप में काम कर रहे हैं। मार्च 2026 में उन्होंने किसी भी लोकतांत्रिक सरकार के प्रमुख के रूप में सबसे लंबा कार्यकाल पूरा करने का रिकॉर्ड भी बनाया था। (25 Years of PM Modi)
25 साल का सफर: गुजरात से ‘विकसित भारत 2047’ तक
वडनगर के रेलवे स्टेशन से शुरू हुआ यह सफर आज 25 साल के उस मुकाम पर पहुंच गया है, जहां से भारत को दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी आर्थिक ताकत बनाने की तैयारी चल रही है। 2001 में गुजरात का पुनर्निर्माण करने से लेकर 2026 में ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य तक, नरेंद्र मोदी का यह 25 साल का प्रशासनिक सफर अनुशासन, कड़े फैसलों और लगातार मेहनत की एक ऐसी मिसाल है जिसे आने वाली कई पीढ़ियां पढ़ती और समझती रहेंगी।









