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IIT बॉम्बे छात्र की मौत की मिस्ट्री: परीक्षा हॉल से हॉस्टल तक क्या हुआ? जातिगत प्रताड़ना के आरोपों से लेकर ChatGPT एंगल तक

IIT Bombay student death

IIT Bombay student death: 18 सितंबर 2026 को देश के सबसे प्रतिष्ठित इंजीनियरिंग संस्थानों में से एक, IIT बॉम्बे में उस वक्त हड़कंप मच गया, जब बीटेक एनर्जी साइंस एंड इंजीनियरिंग के सेकेंड ईयर के 22 वर्षीय छात्र साहिल रविंद्र वाकोडे ने अपने हॉस्टल के कमरे में खुदकुशी कर ली। इस घटना के बाद कैंपस में भारी विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए, जिसके चलते मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए जांच को मुंबई पुलिस की क्राइम ब्रांच को सौंप दिया गया। क्राइम ब्रांच की टीम अब इस हाई-प्रोफाइल मामले की परतें खोलने में जुटी है।

IIT Bombay student death: IIT बॉम्बे छात्र की मौत से उठे सवाल, ACP की अगुवाई में जांच

भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) बॉम्बे का पवई कैंपस अपनी अकादमिक उत्कृष्टता के लिए जाना जाता है, लेकिन 18 सितंबर 2026 की शाम को इस जाने माने परिसर से एक ऐसी खबर आई, जिसने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया। बीटेक सेकंड ईयर के होनहार छात्र साहिल रविंद्र वाकोडे अपने हॉस्टल के कमरे में मृत पाए गए। साहिल की मौत के बाद भड़के छात्रों के गुस्से और परिवार के कड़े रुख को देखते हुए महाराष्ट्र सरकार और मुंबई पुलिस ने मामले की गंभीरता को समझा और इसकी जांच ‘मुंबई पुलिस क्राइम ब्रांच’ के हवाले कर दी।

क्राइम ब्रांच की एसीपी (ACP) रैंक के अधिकारी की अगुवाई में अब एक-एक डिजिटल और प्रत्यक्षदर्शी सबूत को खंगाला जा रहा है। इस संवेदनशील मामले में दो बेहद अलग और विरोधी कहानियां सामने आ रही हैं। एक तरफ परिवार का गंभीर आरोप है, तो दूसरी तरफ संस्थान की आंतरिक प्रक्रिया और सीसीटीवी फुटेज की थ्योरी है। आइए समझते हैं क्राइम ब्रांच की जांच की अब तक की पूरी इनसाइड स्टोरी। (IIT Bombay student death)

पहली थ्योरी: पिता के आरोप और जातिगत प्रताड़ना का एंगल

साहिल महाराष्ट्र के यवतमाल जिले के एक गांव का रहने वाला था। साहिल की मौत के बाद उसके माता-पिता और परिजनों ने लगभग 7 घंटे तक उसका शव लेने से इनकार कर दिया था। वे इस बात पर अड़े थे कि जब तक दोषी अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई का भरोसा नहीं मिलता, वे शव नहीं उठाएंगे। पुलिस के सीनियर अधिकारियों के हस्तक्षेप और जांच क्राइम ब्रांच को ट्रांसफर किए जाने के बाद ही परिवार शव को यवतमाल ले जाने के लिए राजी हुआ।

साहिल के पिता रविंद्र वाकोडे की शिकायत पर मुंबई पुलिस ने आईआईटी बॉम्बे के प्रोफेसर और प्रशासनिक मामलों के डीन सूर्या नारायण डूला (Suryanarayana Doolla) व कुछ अन्य अधिकारियों के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने और SC/ST Act के तहत एफआईआर दर्ज की है। (IIT Bombay student death)

परिवार का क्या आरोप है?

पिता का आरोप है कि जब साहिल सेकंड ईयर में आया, तो पिछले तीन महीनों से प्रोफेसर डूला उसे लगातार मानसिक रूप से प्रताड़ित कर रहे थे। एफआईआर में दर्ज बयान के मुताबिक, प्रोफेसर द्वारा साहिल के खिलाफ जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल किया गया था, उसे प्रताड़ित किया जा रहा था और उसे संस्थान से सस्पेंड करने व झूठे मामलों में फंसाने की धमकियां दी जा रही थीं।

साहिल की मौसी और माता-पिता के अनुसार, उसने अपने साथ हो रहे इस दुर्व्यवहार के बारे में घर पर बताया था। घरवालों ने उसे ढांढस बंधाया था कि वह इन बातों को नजरअंदाज कर अपनी पढ़ाई पर ध्यान दे, लेकिन वह लगातार भारी मानसिक दबाव में था।

दूसरी थ्योरी: एग्जाम हॉल की घटना और अकादमिक कदाचार

IIT बॉम्बे प्रशासन और संस्थान के ‘फैकल्टी फोरम’ की तरफ से इस मामले का एक दूसरा पहलू सामने रखा गया है। शुरुआती तौर पर यह बात सामने आई कि आत्महत्या के कुछ घंटे पहले ही साहिल के साथ परीक्षा हॉल में कुछ हुआ था। 18 सितंबर को एनर्जी साइंस विभाग की तीसरे सेमेस्टर की परीक्षा चल रही थी। परीक्षा के दौरान इनविजिलेटर (जो कि प्रोफेसर सूर्या नारायण डूला ही थे) ने कथित तौर पर साहिल को परीक्षा हॉल में अनधिकृत रूप से स्मार्टफोन का इस्तेमाल करते हुए पकड़ा। यह आरोप लगाया गया कि वह फोन पर एआई टूल ‘ChatGPT’ के जरिए सवालों के जवाब ढूंढने की कोशिश कर रहा था। (IIT Bombay student death)

अकादमिक गाइडलाइंस और नियमों के तहत, प्रोफेसर ने इस कदाचार को पकड़ा, घटना की रिपोर्ट संस्थान के अधिकारियों को दी और साहिल को परीक्षा हॉल से बाहर जाने के लिए कहा। शुरुआत में आईआईटी ने इस घटना को लेकर जल्दबाजी में एक बयान जारी किया था, लेकिन बाद में छात्रों के भारी विरोध प्रदर्शनों के बीच प्रशासन ने माफी मांगी और कहा कि मौत की परिस्थितियों की जांच अभी जारी है, इसलिए पहले से किसी निष्कर्ष पर पहुंचना ठीक नहीं है।

क्राइम ब्रांच की जांच की दिशा: क्या मिला अब तक?

मामले को हाथ में लेते ही मुंबई क्राइम ब्रांच की फॉरेंसिक टीम और डिजिटल एक्सपर्ट्स ने पवई कैंपस में डेरा डाल दिया है। क्राइम ब्रांच मुख्य रूप से तीन स्तरों पर काम कर रही है।

1. सीसीटीवी ट्रेल का विश्लेषण

क्राइम ब्रांच परीक्षा हॉल से लेकर साहिल के हॉस्टल रूम तक के सभी सीसीटीवी कैमरों के फुटेज खंगाल रही है। दोपहर 12:30 से 12:45 के बीच के फुटेज में देखा गया है कि प्रोफेसर डूला ने साहिल को पकड़ा और उनसे पूछताछ की, जिसके बाद साहिल को हॉल से बाहर जाने को कहा गया। इसके बाद के सीसीटीवी फुटेज में साहिल परीक्षा हॉल से निकलकर सीधे अपने हॉस्टल के कमरे की तरफ जाता दिखाई दे रहा है। उसके बाद वह कमरे से बाहर नहीं निकला। क्राइम ब्रांच इन फुटेज के जरिए उसके आखिरी पलों के व्यवहार को समझने की कोशिश कर रही है। (IIT Bombay student death)

2. डिजिटल एविडेंस

पुलिस ने साहिल का स्मार्टफोन और लैपटॉप अपने कब्जे में ले लिया है। इस केस में कोई सुसाइड नोट बरामद नहीं हुआ है, इसलिए डिजिटल फॉरेंसिक जांच सबसे अहम है। साहिल की कॉल डिटेल्स, व्हाट्सएप चैट्स और सोशल मीडिया एक्टिविटी की जांच की जा रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि क्या वाकई पिछले 3 महीनों से वह किसी गंभीर तनाव में था या किसी प्रोफेसर से उसका कोई विवाद हुआ था। क्या वह सच में परीक्षा के दौरान फोन का इस्तेमाल कर रहा था या उसे गलत फंसाया गया, इसका तकनीकी सच भी फोन के डेटा लॉग्स से साफ होगा।

3. बयानों को दर्ज करना

क्राइम ब्रांच उन सभी छात्रों के बयान दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू कर चुकी है, जो उस वक्त परीक्षा हॉल में साहिल के आस-पास बैठे थे। इसके अलावा, हॉस्टल के साथियों और वॉर्डन से भी पूछताछ की जा रही है।

कैंपस की स्थिति और प्रशासनिक एक्शन

इस घटना के बाद IIT बॉम्बे के छात्रों में भारी आक्रोश फैल गया। छात्रों ने कैंपस में तीन दिनों तक प्रदर्शन किया और संस्थान के भीतर सुरक्षा, मानसिक स्वास्थ्य और पारदर्शी जांच की मांग को लेकर 18 सूत्रीय चार्टर सौंपा।छात्रों के भारी दबाव के बीच, आईआईटी बॉम्बे प्रशासन ने निष्पक्ष जांच करने के लिए प्रोफेसर सूर्या नारायण डूला को उनके प्रशासनिक पद (डीन ऑफ एडमिनिस्ट्रेटिव अफेयर्स) से तत्काल प्रभाव से हटा दिया है। (IIT Bombay student death)

दूसरी ओर, आईआईटी बॉम्बे के फैकल्टी फोरम ने प्रोफेसर डूला के समर्थन में कैंपस में मार्च निकाला। फैकल्टी मेंबर्स का कहना है कि प्रोफेसर ने केवल वही किया जो एक शिक्षक अकादमिक नियमों के तहत परीक्षा में नकल पकड़े जाने पर करता है। जांच पूरी होने से पहले किसी शिक्षक को दोषी ठहराना गलत है।

क्राइम ब्रांच के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती यह साबित करने की है कि क्या यह आत्महत्या परीक्षा में नकल पकड़े जाने के बाद अचानक लगे सदमे का नतीजा थी, या फिर इसके पीछे वाकई लंबे समय से चली आ रही जातिगत प्रताड़ना और भेदभाव का कोई गहरा ताना-बाना था।

Vaishali
Author: Vaishali

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