Ram Mandir Donation Theft Case: अयोध्या के भव्य राम मंदिर में चढ़ावे की चोरी और गबन का मामला अब एक बेहद संवेदनशील और बड़े कानूनी विवाद में तब्दील हो चुका है। विशेष जांच दल (SIT) द्वारा न्यायालय में आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल किए जाने के बाद अयोध्या बार एसोसिएशन ने इस पर कड़ी आपत्ति जताते हुए अदालती काम का पूरी तरह बहिष्कार कर दिया है।
वकीलों का आक्रोश इस बात को लेकर है कि पुलिस और एसआईटी ने इस बड़े घोटाले के मुख्य चेहरों और ट्रस्ट के वरिष्ठ पदाधिकारियों को बचाते हुए केवल छोटे कर्मचारियों को बलि का बकरा बना दिया है। इस कदम के बाद विशेष न्यायाधीश (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम) के न्यायालय कक्ष के बाहर वकीलों ने जबरदस्त नारेबाजी और विरोध प्रदर्शन किया, जिससे पूरा कोर्ट परिसर छावनी और गहमागहमी के माहौल में बदल गया।
Ram Mandir Donation Theft Case: 74 हजार पन्नों की चार्जशीट और SIT का बड़ा खुलासा
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर गठित हाई-लेवल SIT ने इस मामले की गहन जांच के बाद निचली अदालत में 74 हजार से अधिक पन्नों की चार्जशीट दाखिल की है। इससे पहले 21 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने SIT की स्टेटस रिपोर्ट पेश करते हुए चौंकाने वाला खुलासा किया था।
SIT की रिपोर्ट के अनुसार, मंदिर के काउंटिंग रूम के सीसीटीवी फुटेज और फॉरेंसिक ऑडिट की जांच में सामने आया कि चढ़ावे की चोरी की कोई एक-दो नहीं, बल्कि 105 स्पष्ट घटनाएं हुईं। जांच एजेंसियों ने अब तक आरोपियों के पास से और उनके बैंक खातों से करीब 79.85 लाख रुपये की नकदी और गायब हुए कीमती आभूषण बरामद किए हैं। (Ram Mandir Donation Theft Case)
इस चार्जशीट में जेल में बंद कुल 8 आरोपियों को नामजद किया गया है, जिनमें अधिकांश बैंककर्मी और मंदिर के निचले स्टाफ हैं। इनमें श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय का पूर्व कार चालक रमाशंकर उर्फ टिन्नू यादव भी शामिल है, जिसके पास बिना किसी आधिकारिक आदेश के दानपात्रों की चाबियां थीं।
बार एसोसिएशन की आपत्ति: ‘ट्रस्ट के बड़े पदाधिकारियों को क्यों बचाया गया?’
अयोध्या बार एसोसिएशन और स्थानीय अधिवक्ताओं का आरोप है कि पुलिस की यह चार्जशीट पूरी तरह से एकतरफा और पक्षपातपूर्ण है। बार एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने स्पष्ट किया कि उनकी आपत्तियों को दरकिनार करके यह चार्जशीट जल्दबाजी में पेश की गई है।
वकीलों की मुख्य आपत्तियां और मांगें
अधिवक्ताओं का कहना है कि इतने बड़े पैमाने पर हो रही चोरी बिना प्रबंधन की मिलीभगत या घोर लापरवाही के संभव नहीं थी। बार एसोसिएशन ने ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय, पूर्व ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा और मंदिर निर्माण प्रभारी गोपाल राव के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग को लेकर पहले ही पुलिस को तहरीर दी थी। (Ram Mandir Donation Theft Case)
पुलिस द्वारा बड़े पदाधिकारियों पर कार्रवाई न करने के बाद बार एसोसिएशन के महामंत्री ने मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (CJM) पीयूष त्रिपाठी की अदालत में अर्जी दाखिल की है। इस अर्जी पर कोर्ट ने संज्ञान लेते हुए रामजन्मभूमि थाने से रिपोर्ट तलब की है, जिस पर अगली सुनवाई 26 सितंबर 2026 को होनी है। वकीलों का तर्क है कि जब तक ट्रस्ट के तत्कालीन नीति-निर्धारकों की भूमिका की निष्पक्ष जांच नहीं होती, तब तक असली सच्चाई सामने नहीं आ सकती।
वकीलों का कार्य बहिष्कार और कड़ा रुख
राम मंदिर में देश-विदेश के करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था जुड़ी है, इसलिए इस चढ़ावा चोरी ने स्थानीय विधिक समुदाय को भी झकझोर कर रख दिया है। बार एसोसिएशन ने इस मामले में बेहद कड़ा रुख अख्तियार किया हुआ है। एसोसिएशन ने पहले ही एक सर्वसम्मत प्रस्ताव पारित कर रखा है कि उनका कोई भी सदस्य इन चढ़ावा चोरों का केस नहीं लड़ेगा।
यदि कोई अधिवक्ता इस प्रस्ताव का उल्लंघन कर आरोपियों की पैरवी करता है, तो उस पर 5 लाख रुपये का आर्थिक दंड लगाया जाएगा और उसकी बार सदस्यता रद्द कर दी जाएगी। आस्था के इस मामले में दोषियों को सख्त सजा दिलाने के लिए बार ने खुद 15-20 वरिष्ठ क्रिमिनल वकीलों की एक विशेष कमेटी बनाई है जो प्रोसीक्यूशन की मदद करेगी। (Ram Mandir Donation Theft Case)
आगे क्या होगा?
सुप्रीम कोर्ट ने वैधानिक सीमा को ध्यान में रखते हुए एसआईटी को निचली अदालत में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 193 के तहत आरोप पत्र दाखिल करने की हरी झंडी दी थी। हालांकि, शीर्ष अदालत ने यह भी साफ किया है कि यदि आगे और सबूत मिलते हैं, तो धारा 193(9) के तहत पूरक जांच का विकल्प खुला रहेगा।
अब सभी की निगाहें 26 सितंबर को सीजेएम कोर्ट में होने वाली सुनवाई पर टिकी हैं, जहां पुलिस को ट्रस्ट के पूर्व पदाधिकारियों से जुड़ी रिपोर्ट सौंपनी है। अयोध्या के वकीलों के इस उग्र विरोध और कार्य बहिष्कार ने इस पूरे मामले को बेहद गरमा दिया है और आने वाले दिनों में यह कानूनी लड़ाई एक नया मोड़ ले सकती है। (Ram Mandir Donation Theft Case)









