SIR Controversy: उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर चल रहे विवाद के बीच सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के अध्यक्ष और कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने विपक्ष पर निशाना साधा है। राजभर ने कहा कि लोकतंत्र में सवाल पूछना विपक्ष का अधिकार है, लेकिन यदि किसी प्रक्रिया पर गंभीर आरोप लगाए जा रहे हैं तो उनके समर्थन में प्रमाण भी सामने रखने चाहिए।
पत्रकारों से बातचीत के दौरान राजभर ने कहा कि किसी भी पात्र मतदाता का नाम मतदाता सूची से नहीं हटना चाहिए। यदि किसी योग्य मतदाता का नाम सूची से हट गया है तो इसकी जानकारी निर्वाचन आयोग को दी जानी चाहिए, ताकि आवश्यक सुधार किया जा सके। उन्होंने कहा कि विरोध करना है तो लोकतांत्रिक तरीके से किया जाना चाहिए और आरोप लगाने वालों को उसके प्रमाण भी देने चाहिए।
राजभर ने समाजवादी पार्टी और कांग्रेस पर सवाल उठाते हुए कहा कि 2024 के लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश से समाजवादी पार्टी के 36 और कांग्रेस के छह सांसद निर्वाचित हुए। ऐसे में अगर चुनाव प्रक्रिया में कोई गड़बड़ी थी तो उस समय सवाल क्यों नहीं उठाए गए। उन्होंने कहा कि जहां भी अनियमितता नजर आती है, विपक्ष को उसके ठोस प्रमाण सामने रखने चाहिए। (SIR Controversy)
SIR Controversy: चुनाव प्रक्रिया पर सवालों को लेकर राजभर का विपक्ष पर हमला
ओम प्रकाश राजभर ने कहा कि चुनाव में जनता अपना फैसला देती है, जबकि निर्वाचन आयोग चुनाव प्रक्रिया का संचालन करता है। उन्होंने कहा कि इससे पहले विपक्षी दलों की ओर से ईवीएम को लेकर सवाल उठाए जाते रहे हैं, लेकिन जब उन्हीं ईवीएम के जरिए उन्हें चुनावी सफलता मिली तो उन आरोपों पर भी सवाल खड़े हुए।
उन्होंने कहा कि जिन मतदाताओं की मृत्यु हो चुकी है या जो स्थायी रूप से किसी दूसरे विधानसभा क्षेत्र में चले गए हैं, उनके नाम मतदाता सूची से हटाने की प्रक्रिया होनी चाहिए। राजभर ने आरोप लगाया कि मृत या स्थानांतरित मतदाताओं के नामों का कथित तौर पर फर्जी मतदान में इस्तेमाल किया जाता रहा है। (SIR Controversy)
बैलेट पेपर की मांग पर भी साधा निशाना
बसपा प्रमुख मायावती की ओर से ईवीएम की जगह बैलेट पेपर से चुनाव कराने की मांग पर भी राजभर ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि जो विपक्षी नेता ईवीएम के जरिए चुनाव जीतकर सांसद और विधायक बने हैं, उन्हें पहले अपने पदों से इस्तीफा देना चाहिए और इसके बाद चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठाने चाहिए। नगीना सांसद चंद्रशेखर आजाद को लेकर भी राजभर ने दावा किया कि कांग्रेस प्रत्याशी का नामांकन रद्द होने की वजह से उन्हें चुनाव में लाभ मिला। हालांकि, यह राजभर का राजनीतिक दावा है।
परिवारवाद के मुद्दे पर राजभर की अलग दलील
परिवारवाद के आरोपों पर ओम प्रकाश राजभर ने कहा कि यदि किसी व्यक्ति को सिर्फ पारिवारिक रिश्ते के आधार पर राजनीतिक जिम्मेदारी या टिकट दिया जाता है तो उसे परिवारवाद कहा जा सकता है। लेकिन अगर कोई व्यक्ति लंबे समय से पार्टी के लिए काम कर रहा है और संगठन में उसे जिम्मेदारी मिलती है, तो इसे परिवारवाद नहीं कहा जाना चाहिए। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी को मजबूत संगठन वाली पार्टी बताते हुए विपक्षी गठबंधन पर भी निशाना साधा। राजभर ने कहा कि गठबंधन में शामिल दलों के बीच अलग-अलग मुद्दों को लेकर मतभेद हैं। (SIR Controversy)
वक्फ और CAA के मुद्दे पर भी विपक्ष को घेरा
वक्फ संपत्तियों के मुद्दे पर राजभर ने कहा कि वक्फ बोर्ड की संपत्तियों की जांच होने के बाद समाजवादी पार्टी को वास्तविक स्थिति का पता चलेगा। वहीं, नागरिकता संशोधन कानून (CAA) को लेकर उन्होंने समाजवादी पार्टी, कांग्रेस और आम आदमी पार्टी पर भ्रम फैलाने का आरोप लगाया। राजभर ने कहा कि इन दलों की ओर से दावा किया गया था कि CAA के जरिए लोगों की नागरिकता छीनी जाएगी। उन्होंने विपक्ष से सवाल किया कि कानून लागू होने के बाद वह ऐसे किसी व्यक्ति का नाम बताए जिसे देश से बाहर किया गया हो।
अखिलेश यादव पर भी राजभर का हमला
सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव पर निशाना साधते हुए ओम प्रकाश राजभर ने कहा, “अखिलेश जी, आपका नुकसान हो रहा है।” उन्होंने समाजवादी पार्टी के ‘पीडीए’ को लेकर भी तंज कसा और इसे ‘परिवार डेवलपमेंट अथॉरिटी’ बताया। राजभर ने लोहिया ट्रस्ट में परिवार के सदस्यों की मौजूदगी का हवाला देते हुए समाजवादी पार्टी पर परिवारवाद को लेकर भी सवाल उठाए। इस तरह SIR से लेकर ईवीएम, CAA, वक्फ और परिवारवाद तक कई मुद्दों पर राजभर ने विपक्षी दलों को घेरा। (SIR Controversy)









