Abbas Ansari met Akhilesh Yadav: उत्तर प्रदेश की सियासत में हलचल तेज है, क्योंकि बाहुबली दिवंगत नेता मुख्तार अंसारी के बेटे और विधायक अब्बास अंसारी ने लखनऊ में समाजवादी पार्टी (सपा) के प्रमुख अखिलेश यादव से मुलाकात की है। यह मुलाकात ऐसे समय पर हुई है, जब उत्तर प्रदेश में 10 राज्यसभा सीटों पर चुनाव को लेकर सियासी समीकरण तेजी से बदल रहे हैं और सपा अपने तीसरे उम्मीदवार को जिताने के लिए संख्या बल जुटाने में व्यस्त है। सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के टिकट पर मऊ सदर से विधायक बने अब्बास अंसारी की इस मुलाकात ने यूपी की राजनीति में नए कयासों को जन्म दे दिया है।
Abbas Ansari met Akhilesh Yadav: बंद कमरे में करीब एक घंटे चली बातचीत
अब्बास अंसारी और अखिलेश यादव के बीच लखनऊ स्थित समाजवादी पार्टी के प्रदेश मुख्यालय में मुलाकात हुई। दोनों नेताओं के बीच करीब एक घंटे तक बातचीत चली। बैठक के बाद अब्बास अंसारी पार्टी कार्यालय से बाहर निकले, लेकिन उन्होंने मीडिया से बातचीत नहीं की। इस मुलाकात के बाद अखिलेश यादव के उस बयान की भी चर्चा हो रही है, जिसमें उन्होंने कहा था कि कुछ लोग वापस आना चाहते हैं और कुछ स्थानों पर असंतोष की स्थिति है।
ऐसे में अब्बास अंसारी के साथ हुई करीब एक घंटे की बैठक को राज्यसभा चुनाव के मौजूदा सियासी समीकरणों से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि, मुलाकात के दौरान किन मुद्दों पर चर्चा हुई, यह साफ नहीं है। साथ ही, राज्यसभा उम्मीदवारों को लेकर दोनों नेताओं के बीच कोई बातचीत हुई या नहीं, इस संबंध में भी अभी तक कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। (Abbas Ansari met Akhilesh Yadav)
राज्यसभा चुनाव का गणित
उत्तर प्रदेश में चल रही राज्यसभा चुनाव की सरगर्मी के बीच समाजवादी पार्टी ने अपने दो उम्मीदवारों प्रोफेसर रामगोपाल यादव और धनराज परिमल नथवानी का नामांकन दाखिल करा दिया है। सस्पेंस अब तीसरे उम्मीदवार के नाम पर बना हुआ है, जिसे जिताने के लिए सपा प्रमुख अखिलेश यादव को विपक्षी और सहयोगी दलों के विधायकों के नैतिक समर्थन या क्रॉस वोटिंग की जरूरत है।
सूत्रों के अनुसार, लखनऊ में हुई इस बैठक के दौरान अब्बास अंसारी ने राज्यसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी को समर्थन देने को लेकर अखिलेश यादव के सामने कुछ रणनीतिक शर्तें रखी हैं। सपा तीसरे उम्मीदवार के तौर पर किसी बड़े मुस्लिम चेहरे पर दांव लगाने की योजना बना रही है ताकि ‘पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक’ (PDA) फॉर्मूले को और मजबूती दी जा सके। ऐसे में बीजेपी की सहयोगी पार्टियों जैसे सुभासपा और आरएलडी के मुस्लिम विधायकों को अपने पाले में लाना सपा की रणनीति का मुख्य हिस्सा माना जा रहा है। (Abbas Ansari met Akhilesh Yadav)
सुभासपा और ओम प्रकाश राजभर को बड़ा झटका?
अब्बास अंसारी वर्तमान में एनडीए (NDA) के घटक दल सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (SBSP) के विधायक हैं। हालांकि, राजभर और अखिलेश यादव के बीच जारी जुबानी जंग के बीच अब्बास अंसारी का सपा प्रमुख के पास जाना ओम प्रकाश राजभर के लिए एक बड़ा सियासी झटका माना जा रहा है। राजनीति के गलियारों में यह चर्चा भी तेज है कि अब्बास अंसारी और अंसारी परिवार के कुछ अन्य सदस्य आगामी विधानसभा चुनाव से पहले आधिकारिक तौर पर समाजवादी पार्टी का दामन थाम सकते हैं।
हालांकि, खुद अब्बास अंसारी ने हाल ही में अखिलेश यादव को अपना ‘बड़ा भाई’ और ओम प्रकाश राजभर को ‘चाचा’ बताते हुए दोनों से अपने व्यक्तिगत और पारिवारिक संबंधों को बेहतर बताया था। लेकिन इस ताजा मुलाकात ने साफ कर दिया है कि रणनीतिक तौर पर वे सपा के करीब आ रहे हैं। (Abbas Ansari met Akhilesh Yadav)
सदस्यता विवाद पर अखिलेश का मिला था साथ
अब्बास अंसारी और अखिलेश यादव की इस नजदीकी की कहानी कुछ समय पहले तब और मजबूत हुई थी, जब हेट स्पीच मामले में कोर्ट से सजा मिलने के बाद अब्बास की विधानसभा सदस्यता को लेकर संकट खड़ा हुआ था। उस दौरान अखिलेश यादव ने लखनऊ में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर खुलकर अब्बास अंसारी का समर्थन किया था।
अखिलेश ने आरोप लगाया था कि योगी सरकार जानबूझकर राजनीतिक द्वेष और जाति-धर्म देखकर केवल समाजवादियों और विपक्ष के लोगों की सदस्यता रद्द करवा रही है। सपा प्रमुख के इस रुख से अंसारी परिवार के साथ उनके राजनीतिक संबंध काफी प्रगाढ़ हो गए थे।
पूर्वांचल की राजनीति और 2027 का रोडमैप
मुख्तार अंसारी के निधन के बाद पूर्वांचल की राजनीति में अंसारी परिवार की राजनीतिक विरासत को संभालने की जिम्मेदारी अब अब्बास अंसारी और उनके भाई उमर अंसारी पर है। पूर्वांचल के मऊ, गाजीपुर, और आसपास के जिलों में अंसारी परिवार का पारंपरिक वोट बैंक पर आज भी खासा प्रभाव माना जाता है। (Abbas Ansari met Akhilesh Yadav)
लखनऊ में अखिलेश यादव और अब्बास अंसारी की इस मुलाकात ने साफ कर दिया है कि उत्तर प्रदेश की राजनीति में पर्दे के पीछे बहुत कुछ नया पक रहा है। चाहे वह राज्यसभा चुनाव में नंबर गेम को साधने की कोशिश हो या फिर आगामी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 के लिए नई बिसात बिछाना। यह मुलाकात आने वाले दिनों में यूपी के राजनीतिक घटनाक्रम को एक नया मोड़ देने वाली साबित हो सकती है।









