UP Politics: उत्तर प्रदेश की राजनीति में हमेशा से ही शह-मात का खेल बेहद दिलचस्प रहा है। अक्टूबर 2026 में होने वाले राज्यसभा चुनाव के नामांकन के अंतिम दिन एक बार फिर प्रदेश की सियासी तपिश चरम पर पहुंच गई। लखनऊ के विधान भवन में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के आठ उम्मीदवारों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, प्रदेश प्रभारी विनोद तावड़े और उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक की उपस्थिति में अपना पर्चा दाखिल किया।
भाजपा के इस शक्ति प्रदर्शन के बीच उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने मुख्य विपक्षी दल समाजवादी पार्टी पर करारा हमला बोलते हुए दावा किया कि ‘समाजवादी पार्टी ने पहले ही हार मान ली है और भाजपा राज्यसभा की सभी आठ सीटों पर प्रचंड जीत दर्ज करने जा रही है।’
UP Politics: तीसरे उम्मीदवार पर सपा का पीछे हटना हार की स्वीकारोक्ति?
उत्तर प्रदेश में राज्यसभा की 10 सीटों पर चुनाव की प्रक्रिया चल रही है। शुरुआत में कयास लगाए जा रहे थे कि समाजवादी पार्टी अपने दो तय उम्मीदवारों वरिष्ठ नेता प्रो. राम गोपाल यादव और रिलायंस इंडस्ट्रीज के अधिकारी धनराज परिमल नाथवानी के अलावा एक तीसरा उम्मीदवार भी मैदान में उतार सकती है। सोमवार रात तक सपा के भीतर तीसरे उम्मीदवार को लेकर मंथन की खबरें आती रहीं।
हालांकि, नामांकन के आखिरी दिन यानी 6 अक्टूबर 2026 को सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया एक्स पर स्थिति साफ करते हुए लिखा, “अब हमारा ध्यान तीन पर नहीं, बल्कि 403 पर है।” अखिलेश यादव का यह बयान परोक्ष रूप से 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव की ओर इशारा कर रहा था, लेकिन भाजपा ने इसे सपा की रणनीतिक हार के रूप में लपक लिया। (UP Politics)
उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने अखिलेश यादव के इसी कदम पर चुटकी लेते हुए कहा कि सपा नेतृत्व को यह अच्छी तरह समझ आ गया था कि उनके पास तीसरे उम्मीदवार को जिताने की संख्या बल और ताकत नहीं है। अखिलेश यादव को डर था कि उनका तीसरा उम्मीदवार बुरी तरह हार जाएगा, जिससे पार्टी में बिखराव की स्थिति बन सकती है। पाठक ने जोर देकर कहा, “बात बिल्कुल साफ है, सपा ने आगामी विधानसभा चुनाव से पहले ही अपने हथियार डाल दिए हैं।”
भाजपा का शक्ति प्रदर्शन और संतुलित सामाजिक समीकरण
नामांकन के दौरान भाजपा ने लखनऊ की सड़कों से लेकर विधान भवन तक जबरदस्त माहौल बनाया। ढोल-नगाड़ों और कार्यकर्ताओं के भारी उत्साह के बीच पार्टी के आठ उम्मीदवारों ने पर्चा भरा। भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व ने इस बार पुराने आठों राज्यसभा सांसदों के टिकट काटकर बिल्कुल नए चेहरों को मौका दिया है।
भाजपा के घोषित 8 उम्मीदवारों में धर्मपाल सिंह, राधाकांत ओझा, प्रकाश पाल, विद्यासागर सोनकर, गोपी कृष्ण पांडे, प्रियंका सिंह रावत, रामप्रताप सिंह चौहान और श्रुति गंगवार शामिल हैं। इन आठ उम्मीदवारों में दो महिलाओं को प्रतिनिधित्व देकर और विभिन्न जातियों का समावेश कर भाजपा ने जातिगत व क्षेत्रीय संतुलन साधने का एक सुनियोजित प्रयास किया है। (UP Politics)
नामांकन दाखिल करने के बाद भाजपा उम्मीदवार प्रकाश पाल ने सपा के बहुचर्चित ‘पीडीए’ (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) के नारे पर हमला बोलते हुए कहा कि भाजपा का यह चयन दर्शाता है कि केवल भाजपा ही वास्तव में शोषितों और पिछड़ों का सम्मान करती है, जबकि सपा का पीडीए विमर्श पूरी तरह से फर्जी है।
मिशन 2027: राज्यसभा से विधानसभा तक का रास्ता
ब्रजेश पाठक ने अपने बयानों में केवल इस राज्यसभा चुनाव तक खुद को सीमित नहीं रखा, बल्कि इसे 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों के लिए एक ट्रेलर करार दिया। उन्होंने कहा कि कार्यकर्ताओं के लिहाज से भाजपा दुनिया की सबसे बड़ी पार्टी है और अन्य दलों के कई विधायक समय आने पर भाजपा में शामिल होने के लिए उत्सुक बैठे हैं। पाठक का मानना है कि उत्तर प्रदेश की जनता ने एक बार फिर मन बना लिया है और 2027 में राज्य में तीसरी बार प्रचंड बहुमत के साथ भाजपा की सरकार बनने जा रही है। (UP Politics)
निर्विरोध निर्वाचन की ओर कदम
उत्तर प्रदेश विधानसभा में विधायकों की मौजूदा संख्या के आधार पर समीकरण पूरी तरह साफ हैं। यदि अंतिम समय में कोई अप्रत्याशित तकनीकी फेरबदल नहीं होता है, तो 16 अक्टूबर 2026 को होने वाले मतदान की नौबत नहीं आएगी। भाजपा के 8 और सपा के 2, यानी सभी 10 उम्मीदवारों का निर्विरोध चुना जाना लगभग तय हो चुका है।
अखिलेश यादव भले ही इसे 403 विधानसभा सीटों पर ध्यान केंद्रित करने की रणनीति बता रहे हों, लेकिन ब्रजेश पाठक और पूरी भाजपा मशीनरी ने इसे समाजवादी पार्टी के आत्मविश्वास में आई बड़ी कमी के रूप में प्रचारित करना शुरू कर दिया है। आने वाले दिनों में यह जुबानी जंग और तीखी होने की उम्मीद है, क्योंकि उत्तर प्रदेश की राजनीति में राज्यसभा का यह पड़ाव 2027 के महासंग्राम की नींव रख रहा है। (UP Politics)









