Supreme Court over SIR Controversy: मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ दायर एक जनहित याचिका (PIL) पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार, भारतीय चुनाव आयोग (ECI) और खुद मुख्य चुनाव आयुक्त को नोटिस जारी किया है। भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने इस गंभीर मामले की अगली सुनवाई के लिए 27 अक्टूबर 2026 की तारीख तय की है।
याचिका में आरोप लगाया गया है कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने अन्य दो चुनाव आयुक्तों सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी की सहमति या मंजूरी के बिना एकतरफा फैसले लिए हैं, जो कि चुनाव आयोग की बहु-सदस्यीय प्रणाली के खिलाफ है।
Supreme Court over SIR Controversy: मुख्य विवाद और याचिकाकर्ताओं के आरोप
इस विवाद की शुरुआत मतदाता सूचियों के देशव्यापी विशेष गहन संशोधन (Special Intensive Revision – SIR) की प्रक्रिया से जुड़ी है। याचिकाकर्ता राकेश कुमार सिंह की ओर से वरिष्ठ वकील विकास सिंह ने सुप्रीम कोर्ट में दलीलें पेश कीं।
मीडिया रिपोर्टों के हवाले से कोर्ट को बताया गया कि पिछले 10 महीनों में दोनों चुनाव आयुक्तों ने SIR और मतदाता सूची से जुड़े कई अहम नीतिगत आदेशों पर कम से कम 14 बार अपनी लिखित आपत्तियां और असहमति दर्ज कराई थी। इसके बावजूद मुख्य चुनाव आयुक्त ने उन आपत्तियों को दरकिनार कर अकेले ही फैसले जारी रखे।
याचिका में गंभीर आरोप लगाया गया है कि SIR की आड़ में 30 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में करीब 13 करोड़ मतदाताओं के नाम हटा दिए गए हैं, जिसकी स्वतंत्र न्यायिक आयोग या विशेष जांच दल (SIT) से जांच होनी चाहिए। मतदाताओं का नाम जोड़ने के लिए इस्तेमाल होने वाले फॉर्म 6 में कथित तौर पर बिना वैध मंजूरी के बदलाव किए गए। (Supreme Court over SIR Controversy)
सुप्रीम कोर्ट का रुख और बड़ी टिप्पणियाँ
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने संस्थागत अखंडता और निष्पक्ष चुनाव प्रक्रिया को बनाए रखने पर जोर दिया।सर्वोच्च अदालत ने साफ कहा कि वह चुनाव आयोग द्वारा लिए गए फैसलों की जांच करेगी। यदि रिकॉर्ड की जांच में पाया गया कि कोई भी फैसला कानून के स्थापित दायरे से बाहर जाकर लिया गया है, तो कोर्ट उन फैसलों को रद्द करने में संकोच नहीं करेगा।
याचिकाकर्ताओं ने मांग की थी कि अंतिम फैसला आने तक ज्ञानेश कुमार को मुख्य चुनाव आयुक्त के पद से सस्पेंड कर दिया जाए। हालांकि, कोर्ट ने इस अंतरिम राहत को देने से इनकार कर दिया और कहा कि संवैधानिक संस्थाओं के काम को अचानक ठप नहीं किया जा सकता। CJI सूर्यकांत की पीठ ने साफ किया कि सुप्रीम कोर्ट ने फॉर्म 6 में किसी भी तरह के संशोधन को हरी झंडी नहीं दी थी और रिकॉर्ड सामने आने पर देखा जाएगा कि यह बदलाव किसकी अनुमति से हुआ। (Supreme Court over SIR Controversy)
कानूनी प्रावधान और आगे की राह
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 324 और ‘मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्त अधिनियम, 2023’ के तहत चुनाव आयोग एक बहु-सदस्यीय निकाय के रूप में कार्य करता है, जहां फैसले सर्वसम्मति या बहुमत के आधार पर होने चाहिए। 2023 के अधिनियम की धारा 16 के तहत चुनाव आयुक्तों को कार्यकाल के दौरान के निर्णयों के लिए कानूनी सुरक्षा भी प्राप्त है, जिसके चलते उन्हें पद से हटाने का एकमात्र संवैधानिक जरिया महाभियोग ही बचता है।
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार और चुनाव आयोग को अपना विस्तृत हलफनामा दाखिल करने के लिए समय दिया है। देश के लोकतांत्रिक ढांचे और चुनाव प्रणाली की विश्वसनीयता के लिहाज से 27 अक्टूबर की सुनवाई बेहद निर्णायक होने वाली है। (Supreme Court over SIR Controversy)









