Lucknow: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ की सड़कें एक बार फिर भारी राजनीतिक गहमागहमी और हाई-वोल्टेज ड्रामे की गवाह बनीं। दिल्ली में कांग्रेस नेताओं और इंडिया गठबंधन के सांसदों के साथ कथित पुलिस दुर्व्यवहार के खिलाफ और मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने लखनऊ में एक विशाल और उग्र प्रदर्शन किया।
उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी (UPCC) की नवनियुक्त अध्यक्ष और विधायक आराधना मिश्रा ‘मोना’ के नेतृत्व में सैकड़ों कांग्रेसी कार्यकर्ता सड़कों पर उतरे। इस दौरान भारी पुलिस बल के साथ उनकी तीखी झड़प हुई, जिसके बाद आराधना मिश्रा खुद बैरिकेडिंग पर चढ़ गईं और सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। पुलिस ने बल प्रयोग करते हुए प्रदेश अध्यक्ष समेत दर्जनों कार्यकर्ताओं को हिरासत में ले लिया।
Lucknow: प्रदर्शन की मुख्य वजह- लोकतंत्र के लिए ‘काला दिवस’
कांग्रेस पार्टी ने इस दिन को देशव्यापी स्तर पर ‘काला दिवस’ के रूप में मनाने का ऐलान किया था। लखनऊ के मॉल एवेन्यू स्थित प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय से जीपीओ (GPO) स्थित महात्मा गांधी की प्रतिमा तक एक शांति मार्च निकाला जाना था। कांग्रेस का आरोप है कि पिछले दो दिनों में दिल्ली में राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और इंडिया गठबंधन के सांसदों के साथ पुलिस ने बर्बरतापूर्ण व्यवहार किया है।
इसके साथ ही, विपक्षी दलों द्वारा चुनाव प्रक्रिया, मतदाता सूचियों में गड़बड़ी और विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर लगातार ‘वोट चोरी’ के गंभीर आरोप लगाए जा रहे हैं, जिसके तहत मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की जा रही है। (Lucknow)
सड़कों पर उतरा आक्रोश: सिर पर मटका और हाथों में काले फीते
पार्टी की कमान संभालने के बाद पहली बार आराधना मिश्रा के नेतृत्व में लखनऊ की सड़कों पर कांग्रेस का इतना बड़ा शक्ति प्रदर्शन देखने को मिला। विरोध दर्ज कराने के लिए कार्यकर्ताओं ने हाथों और सिर पर काली पट्टियां व फीते बांध रखे थे। प्रदर्शन को और अधिक धार देने के लिए कई कार्यकर्ता अपने सिर पर मटका रखकर भी आगे बढ़ रहे थे। कार्यकर्ताओं के हाथों में ‘वोट चोर, गद्दी छोड़’ के नारे लिखे हुए पोस्टर और तख्तियां थीं।
बैरिकेडिंग पर हाई-वोल्टेज ड्रामा और झड़प
जैसे ही यह मार्च कांग्रेस मुख्यालय से निकलकर लालबहादुर शास्त्री मार्ग की तरफ बढ़ा, सुन्नी वक्फ बोर्ड के पास पहले से ही भारी संख्या में मुस्तैद पुलिस बल ने मजबूत बैरिकेडिंग लगाकर प्रदर्शनकारियों का रास्ता रोक दिया। कार्यकर्ताओं ने जब बैरिकेड्स को पार कर आगे बढ़ने का प्रयास किया, तो माहौल बेहद तनावपूर्ण हो गया। (Lucknow)
पुलिस और कांग्रेस कार्यकर्ताओं के बीच जमकर धक्का-मुक्की और तीखी नोकझोंक हुई। इसी गहमागहमी के बीच जोश से भरीं प्रदेश अध्यक्ष आराधना मिश्रा ‘मोना’ खुद पुलिस की ऊंची बैरिकेडिंग पर चढ़ गईं। बैरिकेडिंग पर खड़े होकर उन्होंने सरकार और पुलिस प्रशासन के खिलाफ जोरदार नारेबाजी शुरू कर दी, जिसे देख अन्य कार्यकर्ता भी बैरिकेड्स पर चढ़ने लगे।
पुलिस की कार्रवाई और नेताओं को हिरासत में लेना
स्थिति को अनियंत्रित होता देख पुलिस प्रशासन ने सख्ती दिखाई। बैरिकेडिंग से उतारे जाने के बाद आराधना मिश्रा और उनके समर्थक वहीं सड़क पर धरने पर बैठ गए। इसके बाद पुलिस ने बल प्रयोग करते हुए आराधना मिश्रा, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अजय राय और सैकड़ों अन्य नेताओं व महिला कार्यकर्ताओं को जबरन बसों और पुलिस वाहनों में बिठाया और हिरासत में लेकर पुलिस लाइंस और ईको गार्डन भेज दिया। (Lucknow)
“जब तक जान में जान है, संघर्ष जारी रहेगा”
हिरासत में लिए जाने के बाद पुलिस लाइंस से मीडिया से बात करते हुए आराधना मिश्रा ‘मोना’ ने कहा, “भाजपा सरकार लोकतंत्र और संविधान की सरेआम हत्या कर रही है। जिस तरह राहुल गांधी और प्रियंका गांधी की आवाज को दबाने के लिए पुलिसिया बर्बरता का इस्तेमाल किया जा रहा है, उससे साफ है कि यह सरकार कांग्रेस से डरी हुई है। हमें गांधी प्रतिमा तक शांतिपूर्वक जाने से रोका गया, लेकिन कांग्रेस का एक-एक कार्यकर्ता पूरी ताकत से खड़ा है। यह लड़ाई तब तक थमेगी नहीं, जब तक मुख्य चुनाव आयुक्त इस्तीफा नहीं दे देते।”
उत्तर प्रदेश में आगामी राजनीतिक चुनौतियों और 2027 के विधानसभा चुनावों को देखते हुए कांग्रेस का यह आक्रामक रूप बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। आराधना मिश्रा के प्रदेश अध्यक्ष बनने के तुरंत बाद हुए इस उग्र प्रदर्शन ने साफ कर दिया है कि कांग्रेस उत्तर प्रदेश की सड़कों पर अपनी उपस्थिति को और अधिक मजबूत करने और सीधे तौर पर भाजपा सरकार से लोहा लेने के मूड में है। लखनऊ की सड़कों पर हुआ यह टकराव आने वाले दिनों में राज्य की सियासत को और अधिक गरमाने का संकेत दे रहा है। (Lucknow)









