UPI MDR Charge: भारत में डिजिटल क्रांति की रीढ़ बन चुके यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) को लेकर एक बेहद महत्वपूर्ण खबर सामने आई है। नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) ने यूपीआई पेमेंट्स पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) चार्ज लागू करने के अपने फैसले को फिलहाल दिवाली के बाद तक के लिए टाल दिया है।
पहले यह नया नियम 15 अक्टूबर 2026 से लागू होने वाला था। लेकिन त्योहारी सीजन में व्यापारियों और उपभोक्ताओं की सहूलियत को ध्यान में रखते हुए सरकार और NPCI की ‘यूपीआई एंड सर्विसेज स्टीयरिंग कमेटी’ ने इसे आगे बढ़ाने का निर्णय लिया है। नई तारीख का ऐलान जल्द ही अलग से किया जाएगा।
UPI MDR Charge: क्या है UPI MDR और नए नियम?
मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) वह शुल्क होता है, जो किसी व्यापारी से डिजिटल भुगतान स्वीकार करने के बदले लिया जाता है। जनवरी 2020 में सरकार ने यूपीआई को बढ़ावा देने के लिए इसे पूरी तरह से खत्म कर दिया था। हालांकि, अब सरकार ने चुनिंदा मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर इसे दोबारा पेश करने की अनुमति दे दी है। यह चार्ज सभी भुगतानों पर नहीं लगेगा। यह केवल ₹2,000 से अधिक के चुनिंदा पर्सन-टू-मर्चेंट (P2M) लेनदेन पर ही लागू होगा।
₹2,000 से ऊपर के योग्य भुगतानों पर 0.4% का MDR चार्ज निर्धारित किया गया है। बड़े लेन-देन (जैसे ₹75,000 या उससे अधिक) के लिए इस चार्ज की अधिकतम सीमा ₹300 प्रति ट्रांजैक्शन तय की गई है।
त्योहारों के सीजन में क्यों टाला गया फैसला?
अक्टूबर और नवंबर का महीना भारत में त्योहारों (धनतेरस, दिवाली, भाईदूज) का होता है। इस दौरान बाजारों में जमकर खरीदारी होती है और डिजिटल लेनदेन अपने चरम पर होता है। देश भर के खुदरा व्यापारी संगठनों ने इस फैसले का कड़ा विरोध किया था और इसे टालने की मांग की थी। व्यापारियों का मानना था कि ऐन त्योहारों के वक्त चार्ज लगाने से उनकी कमाई और बिजनेस सेंटिमेंट पर असर पड़ेगा। (UPI MDR Charge)
सरकार और NPCI नहीं चाहते कि त्योहारी सीजन में लोग डिजिटल भुगतान छोड़कर दोबारा भारी मात्रा में कैश की तरफ लौटें। बैंकों, फिनटेक कंपनियों और पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर्स (PSPs) को इस नए चार्जिंग ढांचे को पूरी तरह से लागू करने और इसके लिए तकनीकी रूप से तैयार होने के लिए कुछ और समय मिल जाएगा।
क्या आम जनता की जेब पर पड़ेगा असर?
इस पूरे मामले में आम उपभोक्ताओं के लिए सबसे बड़ी राहत की बात यह है कि उन्हें कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं देना होगा। यह पूरी तरह से एक ‘मर्चेंट चार्ज’ है, जिसे दुकानदार या सर्विस प्रोवाइडर को भुगतना होगा। यदि आप दिवाली या धनतेरस पर सोने के सिक्के, कपड़े, इलेक्ट्रॉनिक्स या कोई भी बड़ा सामान खरीदते हैं और यूपीआई से पेमेंट करते हैं, तो आपके बैंक खाते से केवल उतनी ही रकम कटेगी जितने का आपने सामान खरीदा है।
हालांकि, वित्तीय विशेषज्ञों का मानना है कि लंबे समय में कुछ बड़े मर्चेंट इस 0.4% के नुकसान की भरपाई करने के लिए अपने प्रोडक्ट्स की कीमतों में मामूली बढ़ोतरी कर सकते हैं, लेकिन सीधे तौर पर ग्राहकों पर कोई यूपीआई चार्ज नहीं लगेगा। (UPI MDR Charge)
छोटे व्यापारियों को मिल सकती है छूट
बिजनेस जगत और इनकॉरपोरेशन42 (Inc42) की रिपोर्ट के अनुसार, स्टीयरिंग कमेटी एक और बड़े राहत पैकेज पर विचार कर रही है। इसके तहत जिन छोटे व्यापारियों का सालाना टर्नओवर ₹40 लाख तक है, उन्हें इस प्रस्तावित एमडीआर (MDR) शुल्क से पूरी तरह मुक्त (Exempt) रखा जा सकता है। अगर ऐसा होता है, तो देश के करोड़ों छोटे और मध्यम स्तर के दुकानदारों को बड़ी राहत मिलेगी और केवल बड़े शोरूम या रिटेल चेन ही इस चार्ज के दायरे में आएंगे।
रिजर्व बैंक का क्या रुख है?
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के अधिकारियों का मानना है कि यूपीआई इकोसिस्टम को लंबे समय तक बिना किसी रुकावट और सुरक्षित रूप से चलाने के लिए फंड की आवश्यकता है। हाल ही में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान केंद्रीय बैंक के वरिष्ठ अधिकारियों ने कहा कि यूपीआई पर बेहद मामूली शुल्क (जैसे 0.4%) लगाने से इसके ट्रांजैक्शन वॉल्यूम पर कोई बड़ा नकारात्मक असर नहीं पड़ेगा। डिजिटल पेमेंट का बुनियादी ढांचा तैयार करने और उसे सुरक्षित रखने के लिए बैंकों और पेमेंट ऐप्स को भी कमाई के साधन चाहिए, जिसके लिए यह कदम जरूरी माना जा रहा है। (UPI MDR Charge)
NPCI का दिवाली के बाद तक UPI MDR को टालने का फैसला एक बेहद समझदारी भरा कदम है, जिससे फेस्टिव सीजन में भारतीय बाजारों में रौनक बनी रहेगी। फिलहाल ग्राहकों को बिल्कुल भी परेशान होने की जरूरत नहीं है और वे बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के अपनी दिवाली की खरीदारी डिजिटल माध्यम से कर सकते हैं। दिवाली बीतने के बाद जब NPCI इसकी नई तारीख जारी करेगा, तब देखना होगा कि इसे किस तरह चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाता है और सुप्रीम कोर्ट में चल रही कानूनी चुनौतियों का इस पर क्या असर पड़ता है।









