Akhilesh Yadav met Azam Khan in jail: समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने गुरुवार को रामपुर जिला जेल में बंद वरिष्ठ नेता आजम खान से मुलाकात की। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 की आहट के बीच हुई इस मुलाकात ने राज्य की राजनीतिक सरगर्मी को चरम पर पहुंचा दिया है। लगभग एक घंटे चली इस बैठक के बाद जेल से बाहर आए अखिलेश यादव ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा, “आजम थे, आजम हैं और आजम रहेंगे। किसी भी राजनीतिक परिवार ने इतना अन्याय नहीं झेला है जितना कि आजम खान के परिवार ने झेला है।”
Akhilesh Yadav met Azam Khan in jail: जेल की सलाखों के पीछे ‘मुलाकात’ और अखिलेश के कड़े तेवर
अखिलेश यादव गुरुवार को खासतौर से रामपुर जेल पहुंचे, जहां आजम खान पिछले साल नवंबर से एक जालसाजी मामले में सजा काट रहे हैं। दोनों नेताओं के बीच करीब एक घंटे बातचीत हुई। अखिलेश ने मीडिया को बताया कि आजम खान का स्वास्थ्य ठीक है और उनके बीच बहुत सकारात्मक चर्चा हुई है। उन्होंने उम्मीद जताई कि आजम खान को जल्द ही न्यायालय से न्याय मिलेगा। जेल से निकलने के बाद अखिलेश यादव सीधे आजम खान के आवास पर गए, जहां उन्होंने उनकी पत्नी डॉ. तंजीन फातिमा और परिवार के अन्य सदस्यों से भी मुलाकात कर एकजुटता प्रकट की।
अखिलेश यादव ने कहा, “मैं अभी आजम खान से मिला हूं, और उन्हें इंसाफ मिलेगा। मैंने उनका हालचाल पूछा, और हमने बात की कि यूनिवर्सिटी कैसे बर्बाद हो गई है, जहां तक नाइंसाफी की बात है शायद पूरे पॉलिटिकल इतिहास में, किसी और परिवार पर इतने झूठे केस नहीं लगे जितने आजम खान के परिवार पर लगे हैं। हम सब 2027 में सरकार बनाने के लिए एक साथ हैं, और हम मिलकर काम करेंगे। यह अब काफी आम हो गया है। हर पार्टी, खासकर पिछड़े वर्गों, दलितों और उन ग्रुप्स को रिप्रेजेंट करने वाली पार्टी जिन्हें उनकी आबादी के हिसाब से रिजर्वेशन नहीं मिलता, जाति के आधार पर जनगणना की मांग कर रही है।” (Akhilesh Yadav met Azam Khan in jail)
जौहर यूनिवर्सिटी को लेकर बीजेपी पर निशाना
अखिलेश यादव ने योगी आदित्यनाथ सरकार पर सीधा आरोप लगाया कि उन्होंने जानबूझकर आजम खान के ‘ज्ञान और शिक्षा’ के सपने को बर्बाद करने की साजिश रची है। उन्होंने कहा, “जौहर यूनिवर्सिटी को बर्बाद करने के लिए एक बड़ी साजिश रची गई। बीजेपी को शिक्षा और ज्ञान की कोई परवाह नहीं है। मैं यह साफ कर देना चाहता हूं कि आजम खान साहब ने जो सपना देखा था, एक ऐसी यूनिवर्सिटी जो नौजवानों का भविष्य संवारे उस सपने को समाजवादी पार्टी हर हाल में पूरा करेगी।”
गौरतलब है कि हाल ही में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने भी जौहर यूनिवर्सिटी और मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में जेल के अंदर ही आजम खान से पूछताछ की थी, जिसे लेकर सपा लगातार सरकार पर केंद्रीय एजेंसियों के दुरुपयोग का आरोप लगाती रही है। (Akhilesh Yadav met Azam Khan in jail)
अखिलेश यादव का BJP पर हमला, चुनाव आयोग से मिलीभगत का लगाया आरोप
समाजवादी पार्टी चीफ अखिलेश यादव ने कहा, “BJP का ज्ञान और शिक्षा के साथ बुनियादी तौर पर दुश्मनी वाला रिश्ता है, जो पूरी तरह से बेमेल है। BJP के लोग इस मामले में असल में ज़ीरो पर हैं। इसीलिए वे भ्रष्ट अधिकारियों के साथ मिल जाते हैं, जैसा कि हाल ही में उन्हें वोट चुराते हुए भी पकड़ा गया था। 2022 से ही, समाजवादी पार्टी आरोप लगा रही है कि चुनाव आयोग BJP के साथ मिला हुआ है। आज, यह साफ होता जा रहा है कि चुनाव आयोग असल में सीधे BJP के साथ मिलीभगत कर रहा है।”
जब उनसे पूछा गया कि क्या आने वाले UP विधानसभा चुनावों को देखते हुए आज़म खान के साथ गठबंधन के बारे में कोई बातचीत हो रही है, तो उन्होंने कहा, “मेरी उनसे बहुत लंबी बातचीत हुई। हमें अपने गठबंधन के साथियों से चुनावों के बारे में एक बड़ी लिस्ट मिली है। मैं वही लिस्ट इस बातचीत के लिए अपने साथ लाया हूँ।”
‘मुस्लिम वोट बैंक’ और 2027 का चुनावी गणित
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अखिलेश यादव की यह रामपुर यात्रा महज एक ‘कुशलक्षेम’ पूछने की कवायद नहीं थी, बल्कि इसके गहरे चुनावी मायने हैं। आजम खान उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी के सबसे बड़े और कद्दावर मुस्लिम चेहरों में से एक रहे हैं। पिछले कुछ समय से विरोधी दल यह नैरेटिव बनाने की कोशिश कर रहे थे कि अखिलेश यादव ने आजम खान को उनके हाल पर छोड़ दिया है। इस मुलाकात से अखिलेश ने अपने कोर मुस्लिम वोट बैंक को यह संदेश दिया है कि पार्टी उनके नेता के साथ मजबूती से खड़ी है। (Akhilesh Yadav met Azam Khan in jail)
विपक्ष का पलटवार- “यह सिर्फ चुनावी ढोंग है”
अखिलेश यादव की इस जेल यात्रा पर उत्तर प्रदेश की सत्ताधारी पार्टी और उसके सहयोगियों ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। सुभासपा प्रमुख ओम प्रकाश राजभर ने इस मुलाकात को ‘चुनावी नौटंकी’ करार दिया। उन्होंने आरोप लगाया, “अखिलेश यादव सिर्फ 2027 के चुनाव में मुस्लिम वोटों को सुरक्षित करने के लिए आजम खान की याद में तड़प रहे हैं। जब वह लंबे समय से जेल में थे, तब अखिलेश उनसे मिलने क्यों नहीं आए? यह सिर्फ चुनावी गिमिक है।”
बीजेपी नेता नरेंद्र कश्यप ने कहा कि अखिलेश यादव केवल राजनीतिक अवसरवाद की राजनीति कर रहे हैं। जो व्यक्ति करीब 100 आपराधिक मामलों और भ्रष्टाचार के आरोपों का सामना कर रहा है, उसके साथ अखिलेश क्या रणनीति बना रहे हैं? वह केवल आजम खान की मुस्लिम पहचान का इस्तेमाल करना चाहते हैं। (Akhilesh Yadav met Azam Khan in jail)
‘रामराज’ और सामाजिक न्याय का नया विमर्श
अखिलेश यादव द्वारा आजम खान के संदर्भ में “रामराज” और “सामाजिक न्याय” की बात एक साथ करना बेहद दिलचस्प है। जहां एक तरफ बीजेपी ‘रामराज्य’ के नारे के साथ अपनी राजनीति को धार देती है, वहीं अखिलेश यादव ने इस शब्द को अपने तरीके से परिभाषित करते हुए इसे ‘बिना भेदभाव के न्याय और सामाजिक समानता’ से जोड़ने की कोशिश की है। यह साफ है कि रामपुर की धरती से अखिलेश यादव ने उत्तर प्रदेश की सियासत में ‘अन्याय बनाम न्याय’ की एक नई बहस छेड़ दी है, जिसका सीधा असर आने वाले समय में राज्य के राजनीतिक समीकरणों पर देखने को मिलेगा।









