UP Election 2027: उत्तर प्रदेश में साल 2027 में होने वाले विधानसभा चुनावों को लेकर सियासी हलचल अभी से तेज हो गई है। ‘इंडिया’ (INDIA) गठबंधन के दो प्रमुख सहयोगियों समाजवादी पार्टी (सपा) और कांग्रेस के बीच सीटों के बंटवारे और उम्मीदवारों की सूची को लेकर खींचतान खुलकर सामने आ गई है। मीडिया रिपोर्ट्स और सूत्रों के अनुसार, दोनों दलों के बीच चुनावी तालमेल को लेकर पेंच बुरी तरह फंस गया है। सपा जहां कांग्रेस से केवल ‘जिताऊ उम्मीदवारों’ के नाम की मांग कर रही है, वहीं कांग्रेस ने 180 से 200 सीटों की एक लिस्ट तैयार कर दावेदारी ठोक दी है, जिससे गठबंधन के भीतर घमासान छिड़ गया है।
UP Election 2027: घमासान की मुख्य वजह- सीटों की संख्या पर तकरार
इस पूरे विवाद की शुरुआत तब हुई, जब अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) के उत्तर प्रदेश प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम ने सार्वजनिक रूप से बयान दिया कि कांग्रेस राज्य की कुल 403 विधानसभा सीटों में से कम से कम 200 सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी कर रही है। कांग्रेस का तर्क है कि 2024 के लोकसभा चुनावों के बाद पार्टी ने सांगठनिक रूप से जमीन पर खुद को मजबूत किया है और इसी आधार पर उन्होंने 200 से अधिक संभावित सीटों की पहचान की है।
दूसरी तरफ, समाजवादी पार्टी के खेमे में कांग्रेस की इस भारी-भरकम मांग को लेकर नाराजगी है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सपा प्रमुख अखिलेश यादव को कांग्रेस संगठन में जमीन पर इतने ‘जिताऊ चेहरे’ नजर नहीं आ रहे हैं। सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि सपा कांग्रेस को 100 से कम करीब 85 से 87 सीटें ही देने के पक्ष में है। सपा नेताओं का मानना है कि अगर कांग्रेस कमजोर जमीन वाली सीटों पर अपने प्रत्याशी उतारती है, तो इससे सीधे तौर पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को फायदा पहुंचेगा, जो कि गठबंधन के मूल उद्देश्य के खिलाफ होगा। (UP Election 2027)
कांग्रेस का ‘A, B, C, D’ फॉर्मूला और प्रियंका गांधी का रुख
सीटों के बंटवारे पर जारी खींचतान के बीच कांग्रेस ने अपनी रणनीति तैयार की है। पार्टी ने 2024 के लोकसभा चुनाव में अपने प्रदर्शन और आंतरिक सर्वे के आधार पर पसंदीदा सीटों को चार श्रेणियों (A, B, C और D) में बांटा है। श्रेणी A- ये वे सीटें हैं जिनपर कांग्रेस का दावा सबसे मजबूत है और पार्टी इनपर किसी भी सूरत में समझौता नहीं करना चाहती। श्रेणी B- इन सीटों पर कांग्रेस कुछ फेरबदल या बदलावों पर विचार कर सकती है। श्रेणी C और D- इन श्रेणियों के तहत आने वाली सीटों पर कांग्रेस समझौते और लचीला रुख अपनाने के लिए अधिक तैयार है।
इस बीच, सीटों के बंटवारे पर जारी विवाद को सुलझाने के लिए कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने पहल की है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, उन्होंने साफ किया है कि 180 से 200 सीटों की सूची अंतिम नहीं है, बल्कि सहयोगी दलों के साथ बातचीत शुरू करने के लिए तैयार की गई है। प्रियंका गांधी ने सीटों की संख्या से ज्यादा उनकी जीतने की संभावना पर ध्यान देने की बात कही है। उन्होंने यह भी संकेत दिया है कि गठबंधन को बनाए रखने के लिए कांग्रेस 80 से 90 सीटों पर भी सहमति बनाने को तैयार हो सकती है। (UP Election 2027)
आखिर क्यों नहीं बन रही बात?
जीत की गारंटी बनाम सम्मानजनक हिस्सेदारी: सपा का पूरा जोर इस बात पर है कि कांग्रेस केवल उन्हीं सीटों के नाम दे, जहां उनके पास बेहद मजबूत उम्मीदवार हों। वहीं, कांग्रेस संख्या बल के बजाय गठबंधन में अपनी ‘सम्मानजनक और प्रभावी भूमिका’ सुरक्षित करना चाहती है।
अतीत का ट्रैक रिकॉर्ड: सपा खेमे के कुछ विश्लेषक कांग्रेस के पिछले विधानसभा प्रदर्शनों का हवाला दे रहे हैं। साल 2022 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में कांग्रेस अकेले चुनाव लड़ी थी और महज 2 सीटों पर सिमट गई थी। इस पुराने रिकॉर्ड के कारण सपा अत्यधिक सीटें छोड़ने में हिचक रही है।
वोट शेयर और सांगठनिक मजबूती का दावा: कांग्रेस का मानना है कि पिछले लोकसभा चुनाव के नतीजों के बाद उत्तर प्रदेश के राजनीतिक समीकरण बदले हैं। पार्टी का दावा है कि जमीन पर उनका जनाधार बढ़ा है, जिसे सपा को स्वीकार करना चाहिए। (UP Election 2027)
फिलहाल, दोनों दलों के बीच सीट शेयरिंग को लेकर बातचीत शुरुआती दौर में ही है। कांग्रेस ने इच्छा जताई है कि 15 नवंबर तक सीट शेयरिंग की इस चर्चा को अंतिम रूप दे दिया जाए ताकि उम्मीदवारों को चुनाव प्रचार के लिए पर्याप्त समय मिल सके। अब देखना यह होगा कि भाजपा के खिलाफ एकजुट हुआ यह गठबंधन अपने आंतरिक मतभेदों को भुलाकर किस तरह सीटों के अंतिम फॉर्मूले पर सहमति बना पाता है।









