Rahul Gandhi: उत्तर प्रदेश की सुल्तानपुर विशेष MP-MLA कोर्ट ने सोमवार को कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर की गई टिप्पणी से जुड़े 2018 के मानहानि मामले में बरी कर दिया है। अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (ACJM) शुभम वर्मा की अदालत ने लगभग आठ साल पुराने इस मामले में राहुल गांधी को पूरी तरह दोषमुक्त करार दिया। फैसले के समय राहुल गांधी खुद कोर्ट रूम में मौजूद थे। अदालत की ओर से राहत मिलने के बाद कोर्ट परिसर के बाहर इकट्ठा हुए कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने ढोल-नगाड़ों और आतिशबाजी के साथ जमकर जश्न मनाया।
Rahul Gandhi: क्या था पूरा मामला?
यह पूरा विवाद साल 2018 में कर्नाटक विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान शुरू हुआ था। 8 मई 2018 को बेंगलुरु में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में राहुल गांधी ने कथित तौर पर तत्कालीन भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह को लेकर एक विवादित टिप्पणी की थी।
राहुल गांधी ने कहा था, “हिंदुस्तान के लोग यह भूल गए कि भाजपा अध्यक्ष हत्या के आरोपी हैं। यह सत्य है। ईमानदारी और शुचिता की बात वह पार्टी करती है, जिसके अध्यक्ष हत्या के आरोपी रहे हों।” जानकारी के मुताबिक, अमित शाह को 2005 के सोहराबुद्दीन शेख मामले में साल 2014 में ही अदालत द्वारा बरी कर दिया गया था और 2016 में सुप्रीम कोर्ट ने भी इस मामले की दोबारा जांच की मांग वाली याचिका खारिज कर दी थी।
राहुल गांधी (Rahul Gandhi) के इसी बयान से आहत होकर सुल्तानपुर के हनुमानगंज निवासी स्थानीय भाजपा नेता विजय मिश्रा ने 4 अगस्त 2018 को सुल्तानपुर दीवानी न्यायालय में आईपीसी की धारा 499 और 500 (अब भारतीय न्याय संहिता की धारा 356) के तहत आपराधिक मानहानि का परिवाद दाखिल किया था।
अदालत ने किन 3 मुख्य आधारों पर किया बरी?
सुनवाई के दौरान राहुल गांधी की तरफ से वरिष्ठ अधिवक्ता आरएस चीमा और काशी प्रसाद शुक्ल ने दलीलें दीं, जबकि शिकायतकर्ता की ओर से संतोष कुमार पांडेय ने पैरवी की। दोनों पक्षों की लंबी बहस और कानूनी दलीलों को सुनने के बाद अदालत ने मात्र 16 मिनट में अपना फैसला सुनाया और इन 3 मुख्य बिंदुओं के आधार पर राहुल गांधी को दोषमुक्त किया।
- कोर्ट ने माना कि शिकायतकर्ता विजय मिश्रा इस मामले में सीधे तौर पर ‘पीड़ित व्यक्ति’ नहीं हैं। राहुल गांधी के बयान से शिकायतकर्ता की व्यक्तिगत मानहानि का कोई सीधा संबंध स्थापित नहीं होता।
- अदालत ने साफ किया कि राहुल गांधी (Rahul Gandhi) द्वारा दिया गया बयान मानहानि की श्रेणी में नहीं आता है और न ही इसकी प्रकृति मानहानिकारक थी।
- राहुल गांधी के पक्ष द्वारा कोर्ट में जो बयान से जुड़ी आधिकारिक सीडी पेश की गई थी, उसे अदालत ने साक्ष्य के रूप में स्वीकार किया।
फैसला सुनाते हुए न्यायाधीश ने झूठी वाहवाही पाने के लिए दायर किए जाने वाले मुकदमों पर नाराजगी जताई। कोर्ट ने कहा कि बिना किसी ठोस आधार के ऐसे मामले दर्ज कराने से अदालतों का कीमती समय बर्बाद होता है, इसलिए मुकदमेबाजी से पहले पूरी सावधानी बरती जानी चाहिए।
2018 से 2026 तक: कानूनी प्रक्रिया का सफरनामा
अगस्त 2018 में भाजपा नेता विजय मिश्रा ने राहुल गांधी (Rahul Gandhi) के खिलाफ सुल्तानपुर कोर्ट में शिकायत दर्ज कराई थी। नवंबर 2023 में अदालत ने मामले का संज्ञान लेते हुए राहुल गांधी को समन जारी किया। इसके बाद 20 फरवरी 2024 को राहुल गांधी कोर्ट में पेश हुए, जहां उन्हें 25-25 हजार रुपये के दो मुचलकों पर जमानत मिल गई। उन्होंने अपने ऊपर लगे आरोपों को राजनीति से प्रेरित बताया था।
मामले की सुनवाई के दौरान शिकायतकर्ता विजय मिश्रा ने राहुल गांधी की आवाज का मिलान कराने के लिए वॉयस सैंपल टेस्ट की मांग की थी। हालांकि, निचली अदालत, सेशन कोर्ट और इलाहाबाद हाईकोर्ट ने भी उनकी इस मांग को खारिज कर दिया, जिससे राहुल गांधी को कानूनी राहत मिली। आखिरकार, 26 अक्टूबर 2026 को अंतिम सुनवाई के बाद अदालत ने राहुल गांधी को मामले में बरी कर दिया।
सुल्तानपुर आते समय हुआ था काफिले का हादसा
सोमवार सुबह जब राहुल गांधी (Rahul Gandhi) इस मामले के फैसले के लिए लखनऊ हवाई अड्डे से सुल्तानपुर की ओर बढ़ रहे थे, तब पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे पर उनके काफिले में शामिल गाड़ियां आपस में टकरा गईं। आगे चल रही एक स्थानीय नेता की गाड़ी द्वारा अचानक ब्रेक लगाए जाने के कारण पीछे चल रही 5 गाड़ियां (जिसमें एक एम्बुलेंस भी शामिल थी) आपस में भिड़ गईं। इस हादसे में राहुल गांधी पूरी तरह सुरक्षित रहे।
उत्तर प्रदेश सरकार ने इस घटना की गंभीरता को देखते हुए आईजी लखनऊ रेंज किरण एस. के नेतृत्व में एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया है, जो सुरक्षा व्यवस्था और लापरवाही के बिंदुओं की जांच करेगी। पुलिस महानिदेशालय ने SIT को सभी तकनीकी पहलुओं, चश्मदीदों के बयानों और डैशकैम/सीसीटीवी फुटेज की व्यापक जांच कर जल्द से जल्द अपनी विस्तृत रिपोर्ट पुलिस मुख्यालय को सौंपने का आदेश दिया है।









