करवा चौथ 2026: प्रेम, अटूट विश्वास और अखंड सौभाग्य का महापर्व; जानें शुभ मुहूर्त, पूजा विधि UP में सरकारी नौकरी के नियम बदले, अब पुलिस वेरिफिकेशन के बिना मिलेगी प्रोविजनल जॉइनिंग; नई नीति लागू UP Election 2027: ‘इस बार भाजपा 300 पार…’, यूपी चुनाव से पहले डिप्टी सीएम केशव मौर्य का बड़ा दावा UP को मिलेंगे 4 नए लिंक एक्सप्रेसवे… रोबोटिक्स पार्क और साइबर सेंटर को मंजूरी; योगी सरकार ने 22 प्रस्तावों पर लगाई मुहर UP Election 2027: ‘ओवैसी यूपी के लिए बहुत उत्तम, योगी को फायदा होगा’, बाबा रामदेव के बयान से प्रदेश की सियासत में हलचल यूपी में Cyclone Arnab का खतरा! 40-50 KM की रफ्तार से चलेंगी हवाएं, इन जिलों में IMD का अलर्ट; किसानों को दी गई खास सलाह
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करवा चौथ 2026: प्रेम, अटूट विश्वास और अखंड सौभाग्य का महापर्व; जानें शुभ मुहूर्त, पूजा विधि

Karwa Chauth 2026

Karwa Chauth 2026: करवा चौथ का पावन व्रत वर्ष 2026 में 29 अक्टूबर, गुरुवार को मनाया जा रहा है। भारतीय संस्कृति में यह पर्व सुहागिन महिलाओं के लिए सबसे पवित्र व्रतों में से एक माना जाता है। कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को रखा जाने वाला यह उपवास केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं है, बल्कि यह पति-पत्नी के बीच के गहरे प्रेम, आपसी सामंजस्य, और अटूट विश्वास का जीवंत प्रतीक है। इस दिन उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, मध्य प्रदेश और दिल्ली समेत पूरे देश में सुहागिनें अपने पति की लंबी उम्र, अच्छी सेहत और सुखी वैवाहिक जीवन के लिए पूरे दिन निर्जला व्रत रखती हैं।

Karwa Chauth 2026: तिथि और शुभ मुहूर्त

साल 2026 में करवा चौथ की सही तिथि को लेकर किसी भी प्रकार के असमंजस को दूर करते हुए ज्योतिषाचार्यों ने पंचांग के अनुसार साफ किया है कि यह त्योहार 29 अक्टूबर को ही मनाया जाएगा।

  • चतुर्थी तिथि का प्रारंभ: 29 अक्टूबर 2026 को रात 1:06 बजे
  • चतुर्थी तिथि का समापन: 29 अक्टूबर 2026 को रात 10:09 बजे
  • करवा चौथ पूजा का शुभ मुहूर्त: शाम 5:38 बजे से शाम 6:56 बजे तक
  • करवा चौथ व्रत का कुल समय: सुबह 6:31 बजे से रात 8:17 बजे तक
  • चंद्रोदय (चांद निकलने) का अनुमानित समय: रात 8:17 बजे

पौराणिक इतिहास और महत्व

करवा चौथ के पीछे कई पौराणिक और लोक कथाएं प्रचलित हैं, जिनमें से करवा माता की कहानी सबसे प्रमुख मानी जाती है। कथा के अनुसार, प्राचीन समय में करवा नाम की एक पतिव्रता स्त्री अपने पति के साथ नदी के किनारे रहती थी। एक दिन स्नान के दौरान एक मगरमच्छ ने उसके पति का पैर पकड़ लिया। पति की रक्षा के लिए करवा ने अपनी सतीत्व की शक्ति से मगरमच्छ को कच्चे सूत के धागे से बांध दिया और यमराज के पास पहुंच गई। उसने यमराज से अपने पति के प्राणों की रक्षा करने और मगरमच्छ को मृत्युदंड देने की मांग की। (Karwa Chauth 2026)

करवा के साहस, दृढ़ संकल्प और अगाध प्रेम को देखकर यमराज अत्यंत प्रसन्न हुए। उन्होंने मगरमच्छ को यमपुरी भेजकर करवा के पति को दीर्घायु का वरदान दिया। तभी से सुहाग की रक्षा के लिए ‘करवा माता’ की पूजा और इस व्रत को रखने की परंपरा चली आ रही है। इसके अलावा, महाभारत काल में द्रौपदी द्वारा पांडवों के संकट दूर करने के लिए भगवान कृष्ण के कहने पर इस व्रत को रखने का जिक्र भी मिलता है।

व्रत की संपूर्ण विधि- सरगी से पारण तक

करवा चौथ के व्रत का पालन बेहद कड़े नियमों और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ किया जाता है। इसकी शुरुआत सुबह सरगी ग्रहण करने से होती है, जिसके बाद महिलाएँ दिनभर निर्जला उपवास रखती हैं। शाम के समय करवा चौथ की कथा सुनकर विधि-विधान से पूजा की जाती है। अंत में, रात को चंद्रमा के दर्शन और अर्घ्य देने के बाद व्रत का पारण किया जाता है।

सरगी की रस्म (सूर्योदय से पूर्व)

करवा चौथ के दिन सुबह सूर्योदय से पहले लगभग 4 से 5 बजे के बीच सास अपनी बहू को सरगी देती है। सरगी में मिठाई, फल, ड्राई फ्रूट्स, मट्ठी और सुहाग की सामग्री शामिल होती है। बहू इस सरगी को ग्रहण कर भगवान के सामने व्रत का संकल्प लेती है। इसके बाद पूरे दिन अन्न और जल की एक बूंद भी ग्रहण नहीं की जाती है। (Karwa Chauth 2026)

संध्याकाल की मुख्य पूजा

दोपहर के बाद या शाम के शुभ मुहूर्त (5:38 PM से 6:56 PM) में सुहागिन महिलाएं सोलह श्रृंगार करके पूजा के लिए एकत्रित होती हैं। पूजा स्थल पर मिट्टी की वेदी बनाकर भगवान शिव, माता पार्वती, कार्तिकेय और भगवान गणेश की स्थापना की जाती है। दीवार पर करवा चौथ का कैलेंडर (करवा माता का चित्र) लगाया जाता है। कोरे मिट्टी के करवे में पानी या अनाज भरकर उस पर मोली बांधी जाती है और रोली-चावल से स्वास्तिक बनाया जाता है। सभी महिलाएं मिलकर करवा चौथ की पारंपरिक व्रत कथा सुनती हैं और आपस में करवा फेरने की रस्म पूरी करती हैं।

Vaishali
Author: Vaishali

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