Pappu Yadav: बिहार के पूर्णिया से निर्दलीय सांसद पप्पू यादव (राजेश रंजन) ने बागेश्वर धाम के प्रमुख धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है। उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण पर विवादित टिप्पणी करने का आरोप लगाया है। पप्पू यादव ने नई दिल्ली के पार्लियामेंट स्ट्रीट थाने में शिकायत दी है। साथ ही, धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के खिलाफ FIR दर्ज करने की मांग की है। यह घटना 3 नवंबर 2026 की है। इस मामले के सामने आने के बाद देश की राजनीति और धार्मिक जगत में नया विवाद शुरू हो गया है।
Pappu Yadav: क्या है पूरा विवाद और धीरेंद्र शास्त्री का बयान?
यह पूरा विवाद मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले के करैरा में आयोजित एक रामकथा के दौरान शुरू हुआ। वहां कथावाचक धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने भगवान श्रीराम और भगवान श्रीकृष्ण के स्वरूप की तुलना की थी। उन्होंने श्रीकृष्ण की त्रिभंग मुद्रा, बांसुरी और वृंदावन का जिक्र करते हुए कुछ भाव-भंगिमाएं बनाईं और कहा, “श्रीराम सीधे हैं, जबकि श्रीकृष्ण तीन जगह से टेढ़े होकर खड़े होते हैं।”
इस बयान का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होते ही मथुरा-वृंदावन के संतों, कृष्ण भक्तों और यादव समाज के लोगों में भारी आक्रोश फैल गया। लोगों का कहना है कि भगवान राम और कृष्ण दोनों ही एक समान पूजनीय हैं और इस तरह से मर्यादा पुरुषोत्तम और लीला पुरुषोत्तम की तुलना कर उनका उपहास उड़ाना धार्मिक भावनाओं को आहत करने वाला है।
‘माफी की नौटंकी नहीं चलेगी’ – पप्पू यादव का तीखा हमला
थाने में शिकायत दर्ज कराने के बाद सांसद पप्पू यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने लिखा, “भगवान श्रीकृष्ण जी का अपमान किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं करेंगे। सत्ता संरक्षित टुटपुंजिये फरेबी कथावाचक के खिलाफ आज मैं मुकदमा दर्ज कराने जा रहा हूं। कृष्ण कन्हैया जी को अपमानित कर यह मूर्ख बेईमान अब माफी मांगने की नौटंकी कर रहा है। इसे छोड़ेंगे नहीं, सजा दिलाकर ही मानेंगे।”
पप्पू यादव ने मांग की कि ऐसे कथावाचकों के लिए एक सख्त ‘कोड ऑफ कंडक्ट’ बनाई जानी चाहिए और धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने के आरोप में इन्हें तुरंत गिरफ्तार किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि किसी का सरेआम अपमान करने के बाद महज माफी मांग लेने से अपराध कम नहीं हो जाता।
धीरेंद्र शास्त्री की सफाई और माफी
विवाद के तूल पकड़ने के बाद बागेश्वर धाम के प्रमुख धीरेंद्र शास्त्री ने केन्या के नैरोबी से एक वीडियो संदेश जारी कर अपनी सफाई दी और खेद जताया। उन्होंने कहा कि उनके बयान का गलत अर्थ निकाला गया है। उनकी यह टिप्पणी केवल ब्रज की प्रेमपूर्ण अभिव्यक्ति और भक्ति परंपरा के संदर्भ में थी।
धीरेंद्र शास्त्री ने खुद को भगवान श्रीकृष्ण का अनन्य भक्त बताते हुए कहा कि वे स्वयं भागवत कथा करते हैं और राम-कृष्ण में भेद करने का उनका कोई इरादा नहीं था। उन्होंने कहा कि यदि भावावेश में कही गई उनकी किसी बात से सनातनियों या कृष्ण भक्तों की भावनाओं को ठेस पहुंची है, तो वे विनम्रतापूर्वक क्षमा मांगते हैं। हालांकि, उनकी इस सफाई के बाद भी विरोध थमने का नाम नहीं ले रहा है।
राजनीतिक गलियारों में मचा भूचाल
इस मुद्दे को लेकर देश के विपक्षी दलों ने धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। अखिलेश यादव ने इस टिप्पणी को ‘ईशनिंदा’ करार दिया। अखिलेश यादव ने कहा कि मानवीय भूलों को माफ किया जा सकता है, लेकिन ईशनिंदा को नहीं। उन्होंने धीरेंद्र शास्त्री के सभी कार्यक्रमों पर तत्काल रोक लगाने और उन पर आजीवन प्रतिबंध लगाने की मांग की।
वहीं, तेजस्वी यादव ने इस टिप्पणी को अशोभनीय, अमर्यादित और सर्वथा अक्षम्य बताया। तेजस्वी ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण किसी धार्मिक सीमा में नहीं बंधे हैं, वे करोड़ों लोगों के आराध्य हैं और उनके बारे में ऐसी बातें स्वीकार नहीं की जा सकतीं। कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं दिग्विजय सिंह व भूपेश बघेल ने भी धीरेंद्र शास्त्री के इस बयान की कड़े शब्दों में निंदा की और उन्हें मर्यादित रहने की सलाह दी।
धार्मिक और सामाजिक स्तर पर विरोध
इस विवाद का असर केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि सामाजिक और धार्मिक स्तर पर भी गहरा दिख रहा है। मथुरा, वृंदावन और पूरे ब्रज क्षेत्र के संतों ने इस पर अपनी कड़ी आपत्ति दर्ज कराई है। साध्वी इंदुलेखा सहित कई प्रमुख संतों ने इसे आराध्य का अपमान बताया है। इसके साथ ही यादव समाज और विभिन्न कृष्ण भक्त संगठनों ने धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की आगामी कथाओं और कार्यक्रमों के बहिष्कार का आह्वान किया है। यह मामला अब कानूनी और राजनीतिक रूप से बड़ा मोड़ ले चुका है। दिल्ली पुलिस में दर्ज कराई गई पप्पू यादव की इस शिकायत के बाद यह देखना बेहद अहम होगा कि प्रशासन इस पर क्या कानूनी रुख अपनाता है।









