UP Election 2027: स्वामी प्रसाद मौर्य पर अखिलेश यादव और कांग्रेस आमने-सामने, यूपी में INDIA गठबंधन में बढ़ी तकरार जौहर ट्रस्ट मनी लॉन्ड्रिंग केस: जेल से रिहाई के 40 मिनट बाद फिर गिरफ्तारी, अब सुप्रीम कोर्ट पहुंचे आजम खान; जानें पूरा मामला दिवाली पर योगी सरकार का बड़ा तोहफा, 2.72 लाख आउटसोर्स कर्मचारियों का मानदेय डेढ़ गुना तक बढ़ा; जानें नई सैलरी दिल्ली में GRAP-II लागू: गाजीपुर बॉर्डर पर पुलिस का कड़ा पहरा, गाड़ियों की सघन चेकिंग और कट रहे ताबड़तोड़ चालान ICC World Cup 2027: वर्ल्ड कप टिकटों की मांग ने तोड़े रिकॉर्ड, 12 करोड़ से ज्यादा आवेदन; भारत-पाकिस्तान मैच के लिए 80 लाख रिक्वेस्ट आगरा DRM ऑफिस में AOM अभिषेक सिंह कुशवाहा की संदिग्ध मौत, परिजनों ने लगाया प्रताड़ना का आरोप
UP Election 2027: स्वामी प्रसाद मौर्य पर अखिलेश यादव और कांग्रेस आमने-सामने, यूपी में INDIA गठबंधन में बढ़ी तकरार जौहर ट्रस्ट मनी लॉन्ड्रिंग केस: जेल से रिहाई के 40 मिनट बाद फिर गिरफ्तारी, अब सुप्रीम कोर्ट पहुंचे आजम खान; जानें पूरा मामला दिवाली पर योगी सरकार का बड़ा तोहफा, 2.72 लाख आउटसोर्स कर्मचारियों का मानदेय डेढ़ गुना तक बढ़ा; जानें नई सैलरी दिल्ली में GRAP-II लागू: गाजीपुर बॉर्डर पर पुलिस का कड़ा पहरा, गाड़ियों की सघन चेकिंग और कट रहे ताबड़तोड़ चालान ICC World Cup 2027: वर्ल्ड कप टिकटों की मांग ने तोड़े रिकॉर्ड, 12 करोड़ से ज्यादा आवेदन; भारत-पाकिस्तान मैच के लिए 80 लाख रिक्वेस्ट आगरा DRM ऑफिस में AOM अभिषेक सिंह कुशवाहा की संदिग्ध मौत, परिजनों ने लगाया प्रताड़ना का आरोप

UP Election 2027: स्वामी प्रसाद मौर्य पर अखिलेश यादव और कांग्रेस आमने-सामने, यूपी में INDIA गठबंधन में बढ़ी तकरार

UP Election 2027

UP Election 2027: उत्तर प्रदेश की सियासत में आगामी विधानसभा चुनावों से पहले विपक्षी ‘इंडिया’ (INDIA) गठबंधन के भीतर आंतरिक कलह गहरी होती जा रही है। पूर्व मंत्री और अपनी जनता पार्टी (एजेपी) के प्रमुख स्वामी प्रसाद मौर्य को गठबंधन में शामिल करने को लेकर समाजवादी पार्टी (सपा) और कांग्रेस के बीच विवाद चरम पर पहुंच गया है। सपा प्रमुख अखिलेश यादव द्वारा स्वामी प्रसाद मौर्य को गठबंधन का हिस्सा मानने से साफ इनकार किए जाने के बाद, कांग्रेस द्वारा उनके प्रति दिखाए जा रहे नरम रुख ने इस सियासी खींचतान को और हवा दे दी है।

UP Election 2027: विवाद की वजह- दिल्ली से लखनऊ तक मुलाकातों का दौर

इस विवाद की ताज़ा शुरुआत तब हुई, जब स्वामी प्रसाद मौर्य ने दिल्ली में कांग्रेस के शीर्ष नेताओं राहुल गांधी और प्रियंका गांधी से मुलाकात की। इसके बाद उन्होंने नई दिल्ली में कांग्रेस मुख्यालय (10 जनपथ) का दौरा किया और उत्तर प्रदेश कांग्रेस के प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम से मुलाकात कर आगामी चुनावों की रणनीति पर चर्चा की। इस मुलाकात के बाद गठबंधन में दरारें खुलकर सामने आ गईं।

अखिलेश यादव का दो टूक बयान

सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने मौर्य को गठबंधन से पूरी तरह बाहर बताते हुए कहा, “स्वामी प्रसाद मौर्य हमारे गठबंधन का हिस्सा नहीं हैं। वह हमारी सीटों की गिनती में शामिल नहीं हो सकते। अनावश्यक बहस छेड़ते हैं लोग, इन्हें अवॉइड करो, इग्नोर करो। वहीं, सपा विधायक रविदास मेहरोत्रा और अन्य नेताओं ने आपत्ति जताते हुए कहा कि जब अखिलेश यादव कांग्रेस नेतृत्व से सीटों के बंटवारे पर बात कर रहे हैं, तो कांग्रेस को ऐसे नेताओं से मुलाकात करने से बचना चाहिए और गठबंधन धर्म का पालन करना चाहिए। (UP Election 2027)

कांग्रेस का आक्रामक पलटवार

यूपी कांग्रेस प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम ने सपा की आपत्तियों पर कड़ा ऐतराज जताते हुए पूछा, “क्या मैं अपने लोगों से मिलना छोड़ दूं? राजनीति अपनी जगह है और सामाजिक न्याय की लड़ाई दूसरी बात है।” वहीं, यूपी कांग्रेस अध्यक्ष आराधना मिश्रा ‘मोना’ ने साफ किया कि ‘इंडिया’ गठबंधन का फैसला दिल्ली में केंद्रीय नेतृत्व करता है, न कि कोई क्षेत्रीय दल।

सपा और स्वामी प्रसाद मौर्य के बीच तल्खी के मुख्य कारण

स्वामी प्रसाद मौर्य 2022 के विधानसभा चुनाव से ठीक पहले भाजपा छोड़कर सपा में शामिल हुए थे, लेकिन फरवरी 2024 में उन्होंने सपा से इस्तीफा देकर अपनी अलग पार्टी बना ली। मीडिया रिपोर्ट्स और राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, अखिलेश यादव और मौर्य के रिश्तों में खटास के तीन मुख्य कारण हैं।

धार्मिक और विवादित बयान: मौर्य ने रामचरितमानस, हिंदू देवी-देवताओं और ब्राह्मण समुदाय पर लगातार विवादित टिप्पणियां कीं। उनके इन बयानों से समाजवादी पार्टी को लगातार बैकफुट पर जाना पड़ा और उसे हिंदू विरोधी होने के ठप्पे का डर सताने लगा, जिससे पार्टी ने उनसे दूरी बना ली। (UP Election 2027)

परिवार पर व्यक्तिगत टिप्पणी: उत्तर प्रदेश के राजनीतिक हलकों के अनुसार, मौर्य ने अखिलेश यादव के कोर चुनावी नारे ‘PDA’ (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) पर तंज कसते हुए कह दिया था कि यहाँ ‘D’ का मतलब दलित नहीं बल्कि ‘डिंपल’ (अखिलेश यादव की पत्नी डिंपल यादव) है। इस व्यक्तिगत हमले को सपा नेतृत्व ने कतई बर्दाश्त नहीं किया।

अखिलेश को ‘पॉलिटिकल अनफिट’ बताना: मौर्य ने अखिलेश यादव की राजनीतिक समझ पर सवाल उठाते हुए उन्हें राजनीति के लिए ‘अनफिट’ करार दिया था और आरोप लगाया था कि जो अखिलेश आजम खान के नहीं हो सके, वह किसी और के क्या होंगे। हाल ही में मौर्य ने पलटवार करते हुए यहाँ तक कह दिया कि “अखिलेश न पिद्दी हैं, न पिद्दी का शोरबा, वह हमें सर्टिफिकेट देने वाले कौन होते हैं?

कांग्रेस और सपा के अपने-अपने सियासी गणित

इस पूरे विवाद के पीछे दोनों बड़ी पार्टियों के अपने निहित राजनीतिक हित और रणनीतियां काम कर रही हैं। सपा अपने ‘PDA’ (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) फॉर्मूले को सॉफ्ट-हिंदुत्व के साथ संतुलित रखना चाहती है। वह मौर्य के बयानों से होने वाले सवर्ण और ओबीसी वोटों के नुकसान से बचना चाहती है। वहीं, कांग्रेस उत्तर प्रदेश में अपनी खोई हुई जमीन वापस पाने के लिए आक्रामक ओबीसी और दलित चेहरों की तलाश में है। मौर्य के जरिए वह गैर-यादव ओबीसी वोटों में सेंध लगाना चाहती है। (UP Election 2027)

सपा उत्तर प्रदेश में खुद को ‘इंडिया’ गठबंधन का बड़ा भाई मानती है। अखिलेश यादव सीटों के बंटवारे में कांग्रेस को सीमित सीटें देना चाहते हैं। वहीं, कांग्रेस मौर्य जैसे नेताओं को साथ लाकर राज्य में अपनी बार्गेनिंग पावर बढ़ाना चाहती है, ताकि सीटों के बंटवारे में सपा पर दबाव बनाया जा सके। सपा ने साफ कर दिया है कि मौर्य को उनकी सीटों के कोटे में से एक भी सीट नहीं दी जाएगी। चर्चा है कि कांग्रेस और मौर्य के बीच लगभग 10 सीटों पर सहमति बन रही है, जहां मौर्य और उनके समर्थक कांग्रेस के सिंबल पर चुनाव लड़ सकते हैं।

भविष्य की राह और गठबंधन पर संकट

स्वामी प्रसाद मौर्य का यह विवाद केवल एक नेता की एंट्री तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उत्तर प्रदेश में विपक्षी दलों के बीच वर्चस्व की लड़ाई को दर्शाता है। जहाँ मौर्य खुले तौर पर कांग्रेस के साथ मंच साझा करने की तैयारी कर रहे हैं और राहुल गांधी की रैलियों में शामिल होने का दावा कर रहे हैं, वहीं सपा ने अपने दरवाजे उनके लिए पूरी तरह बंद कर दिए हैं। (UP Election 2027)

यदि कांग्रेस स्वामी प्रसाद मौर्य को अपने कोटे से टिकट देकर गठबंधन में बनाए रखती है, तो आगामी चुनावों में सपा और कांग्रेस के बीच सीटों के तालमेल और जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं के बीच समन्वय स्थापित करना एक बड़ी चुनौती बन जाएगा। यह देखना दिलचस्प होगा कि कांग्रेस का केंद्रीय नेतृत्व सपा की इस कड़ी नाराजगी को नजरअंदाज कर मौर्य को गले लगाता है या फिर गठबंधन को बचाने के लिए कोई बीच का रास्ता निकालता है।

Vaishali
Author: Vaishali

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