Fast Track Courts: मोदी कैबिनेट का बड़ा फैसला, देशभर में बढ़ेंगी 850 फास्ट ट्रैक अदालतें; ₹3,788 करोड़ का बजट मंजूर UP Politics: गोरखपुर में ‘लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ’ पदयात्रा, राहुल गांधी और अखिलेश यादव पर बरसे नितिन नवीन UP Politics: ‘गोरखपुर में BJP के अंदर वर्चस्व की लड़ाई खुलकर सामने आ गई है’, अखिलेश यादव ने भाजपा पर साधा निशाना आयुष्मान खुराना को लॉरेंस गैंग के नाम पर धमकी, मांगी करोड़ों की रंगदारी; मुंबई पुलिस जांच में जुटी त्योहारों से पहले दिल्ली सरकार की बड़ी कार्रवाई, मोरी गेट खोया मार्केट में छापा; 7 हजार किलो खोया किया गया नष्ट Delhi Air Pollution: एक बार फिर गैस चैंबर बनी देश की राजधानी, दिल्ली का AQI 400 के पास पहुंचा; सांस लेना हुआ मुश्किल
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Fast Track Courts: मोदी कैबिनेट का बड़ा फैसला, देशभर में बढ़ेंगी 850 फास्ट ट्रैक अदालतें; ₹3,788 करोड़ का बजट मंजूर

Fast Track Courts

Fast Track Courts: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय कैबिनेट ने महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा के लिए एक अहम फैसला लिया है। सरकार ने देशभर में रेप और बच्चों के यौन शोषण से जुड़े मामलों की जल्द सुनवाई के लिए फास्ट ट्रैक विशेष अदालतों (FTSCs) की संख्या बढ़ाकर 850 करने की मंजूरी दी है। इसके साथ ही सरकार ने इस योजना को अगले पांच साल तक जारी रखने का फैसला किया है। यह योजना वित्त वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक लागू रहेगी। इसका उद्देश्य ऐसे मामलों की सुनवाई में तेजी लाना और पीड़ितों को समय पर न्याय दिलाना है।

केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कैबिनेट फैसलों की जानकारी देते हुए साफ किया कि मोदी सरकार महिलाओं और बच्चों के खिलाफ होने वाले अपराधों पर पूरी तरह ‘एक्शन मोड’ में है। उन्होंने बताया कि पीड़ितों को समय पर न्याय दिलाना सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकता है।

Fast Track Courts: फास्ट ट्रैक अदालतों के लिए ₹3,788 करोड़ का बजट

कैबिनेट ने इस योजना को जारी रखने के लिए कुल ₹3,788.04 करोड़ का बजट मंजूर किया है। इसमें से केंद्र सरकार ₹2,353.15 करोड़ खर्च करेगी, जबकि बाकी ₹1,434.89 करोड़ राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की ओर से दिए जाएंगे। केंद्र सरकार अपने हिस्से की राशि निर्भया फंड से देगी। केंद्र सरकार अपने हिस्से के ₹2,353.15 करोड़ का आवंटन निर्भया फंड (Nirbhaya Fund) से करेगी, जिसका उद्देश्य महिला सुरक्षा के बुनियादी ढांचे को मजबूत करना है।

मौजूदा स्थिति से 850 अदालतों का लक्ष्य

देश में वर्तमान में 779 फास्ट ट्रैक विशेष अदालतें काम कर रही हैं, जिनमें 399 विशेष पॉक्सो (POCSO) अदालतें शामिल हैं। नई मंजूरी के बाद इन अदालतों की संख्या बढ़ाकर 850 की जाएगी। यह विस्तार उन जिलों और क्षेत्रों में किया जाएगा, जहां बलात्कार और पॉक्सो अधिनियम के तहत दर्ज मामलों की लंबित संख्य अधिक है। यह योजना देश के 29 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में प्रभावी ढंग से लागू की जा रही है। (Fast Track Courts)

अदालतों का आंतरिक ढांचा और स्टाफिंग

मामलों की सुनवाई में देरी न हो, इसके लिए हर फास्ट ट्रैक विशेष अदालत में एक अलग टीम तैनात की जाएगी। इसमें एक न्यायिक अधिकारी और मामलों की पैरवी के लिए एक विशेष सरकारी वकील (स्पेशल पब्लिक प्रॉसिक्यूटर) शामिल होंगे। इसके अलावा, अदालत के कामकाज को तेजी से पूरा करने में मदद के लिए 6 सहायक कर्मचारियों की भी नियुक्ति की जाएगी।

पीड़ित-केंद्रित न्यायिक माहौल

इस योजना का एक खास उद्देश्य पीड़ितों को अदालत में सुनवाई के दौरान होने वाले मानसिक तनाव से बचाना भी है। इसके लिए संवेदनशील गवाह बयान केंद्र बनाए जाएंगे, जहां पीड़ित बिना किसी डर या दबाव के अपनी बात रख सकेंगे। साथ ही, बच्चों के लिए अलग और उनके अनुकूल कोर्ट रूम तैयार किए जाएंगे, ताकि उन्हें अदालत का माहौल डरावना न लगे और वे आसानी से अपनी गवाही दे सकें। (Fast Track Courts)

योजना की पृष्ठभूमि और अब तक का रिपोर्ट कार्ड

फास्ट ट्रैक विशेष अदालतों (FTSC) की शुरुआत 2 अक्टूबर 2019 को हुई थी। इसे आपराधिक कानून (संशोधन) अधिनियम, 2018 के प्रावधानों और सुप्रीम कोर्ट के उन सुओ-मोटू निर्देशों के अनुपालन में लागू किया गया था, जिसमें 100 से अधिक लंबित पॉक्सो मामलों वाले जिलों में विशेष अदालतें स्थापित करने को कहा गया था।

अपनी स्थापना से लेकर अब तक इन अदालतों का प्रदर्शन बेहद प्रभावी रहा है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, इन अदालतों ने अब तक 4,02,457 से अधिक लंबित मामलों का निपटारा कर पीड़ितों को न्याय दिलाया है। उदाहरण के तौर पर, केवल वर्ष 2024 में ही इन अदालतों में 88,902 नए मामले आए और रिकॉर्ड 85,595 मामलों का सफलतापूर्वक निपटारा किया गया। (Fast Track Courts)

डिजिटल निगरानी

योजना के क्रियान्वयन में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए विधि और न्याय मंत्रालय का न्याय विभाग राज्य सरकारों और उच्च न्यायालयों के साथ मिलकर इस पर कड़ी निगरानी रखेगा। इसके लिए एक समर्पित ऑनलाइन FTSC डैशबोर्ड का उपयोग किया जाता है, जिसके माध्यम से मामलों के निपटारे की प्रगति रिपोर्ट की नियमित समीक्षा की जाती है।

मोदी कैबिनेट का यह फैसला देश की न्यायिक प्रणाली को त्वरित और समयबद्ध बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। अक्सर यह देखा गया है कि न्याय में देरी के कारण पीड़ितों का हौसला टूट जाता है और अपराधियों का मनोबल बढ़ता है। लेकिन अगले 5 सालों के लिए 850 अदालतों के इस सुदृढ़ीकरण से न केवल कानूनी बैकलॉग कम होगा, बल्कि अपराधियों में कानून का खौफ और देश की बेटियों व बच्चों में सुरक्षित भविष्य का विश्वास और अधिक मजबूत होगा। (Fast Track Courts)

Vaishali
Author: Vaishali

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