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Uttar Pradesh: CM योगी का लखीमपुर खीरी दौरा, प्राकृतिक खेती को दिया बढ़ावा; बोले-इस साल शारदा नदी में नहीं आने दी बाढ़…

Uttar Pradesh

Uttar Pradesh: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सोमवार को लखीमपुर खीरी में स्मृति प्राकट्योत्सव मेला 2025 में शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने कहा कि यह आयोजन उन सभी संतों की स्मृति में आयोजित किया जा रहा है, जिन्होंने संत कबीरदास आश्रम की स्थापना की और संत कबीर की शिक्षाओं का अनुसरण किया।

CM Yogi Adityanath

शारदा नदी का संरक्षण: बाढ़ प्रबंधन में सरकार की सफलता (Uttar Pradesh)

साथ ही, सीएम ने प्राकृतिक खेती को बढ़ावा दिया और कहा कि राज्य सरकार ने इस साल शारदा नदी में बाढ़ नहीं आने दी। कार्यक्रम में बोलते हुए सीएम योगी ने कहा कि डबल इंजन सरकार ने मगहर में कबीर पीठ की स्थापना की है। लखीमपुर खीरी राज्य के सबसे बड़े जिलों में से एक है, फिर भी यहां गांवों के नाम विकृत थे। हमने इस साल शारदा नदी में बाढ़ नहीं आने दी, हालांकि इस साल भारी बारिश हुई। हमने नदी को चैनलाइज़ किया और ड्रेजिंग की। हमने यह काम 18 से 20 करोड़ रुपये में किया।

गायों की नस्लों की रक्षा

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने 16 लाख गायों की नस्लों की रक्षा करने और प्रत्येक गाय के लिए मासिक 1500 रुपये देने का काम किया है। उन्होंने आगे कहा कि जिन राज्यों ने अत्यधिक रसायनों और उर्वरकों का उपयोग किया है, ऐसे राज्यों में भूमि बंजर हो गई है। ऐसी ज़मीनें रेगिस्तान में बदल गई हैं और लोग कैंसर और लीवर की बीमारियों की चपेट में आ गए हैं। (Uttar Pradesh)

लखीमपुर खीरी में रोजगार के अवसर

लखीमपुर खीरी उपजाऊ ज़मीन है और किसानों को इसे प्राकृतिक खेती की ओर ले जाना चाहिए। एक गाय सालाना 30 एकड़ ज़मीन जोत सकती है और इससे होने वाला उत्पाद रसायनों की तुलना में ज़्यादा स्वास्थ्यवर्धक होगा। खाद की जगह गाय के गोबर और मूत्र का इस्तेमाल करने से प्रति एकड़ 12,000 से 15,000 रुपये की बचत होगी। घरों में वर्षा जल संचयन का इस्तेमाल करें।

लखीमपुर खीरी में मेडिकल कॉलेज और कनेक्टिविटी का विकास

सीएम योगी ने आगे कहा कि आज लखीमपुर खीरी में मेडिकल कॉलेज हैं और वहां चार लेन की कनेक्टिविटी है। उन्होंने कहा कि सरकार लखीमपुर खीरी में हवाई अड्डे की कनेक्टिविटी बढ़ाने और इसे इको टूरिज्म का केंद्र बनाने की कोशिश कर रही है। पर्यटन में रोजगार की अपार संभावनाएं हैं। (Uttar Pradesh)

Sharda River

कबीरधाम: मुस्तफाबाद का नाम परिवर्तन का महत्व

इससे पहले, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने संत कबीर दास से जुड़े ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व का हवाला देते हुए मुस्तफाबाद गांव का नाम बदलकर कबीरधाम करने के प्रस्ताव की घोषणा की थी। कार्यक्रम में बोलते हुए उन्होंने कहा कि स्थानीय लोगों ने उन्हें बताया कि मुस्तफाबाद में कोई मुस्लिम आबादी नहीं है, जिसके कारण उन्होंने गांव के वर्तमान नाम पर सवाल उठाया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि जब मैंने इस गांव का नाम पूछा तो पता चला कि यह मुस्तफाबाद है। मैंने यहां मुस्लिम आबादी के बारे में पूछताछ की तो मुझे बताया गया कि यहां कोई नहीं रहता। इसलिए मैंने सोचा कि जब यहां कोई मुस्लिम नहीं रहता तो इसका नाम कबीरधाम रख देना चाहिए। हम इसकी असली पहचान बहाल करने के लिए एक प्रस्ताव लाएंगे। (Uttar Pradesh)

Lakhimpur Kheri

पिछली सरकारों पर सीएम योगी का प्रहार

कांग्रेस पर निशाना साधते हुए आदित्यनाथ ने पिछली सरकारों पर सांस्कृतिक पहचान को विकृत करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि पिछली सरकारों ने अयोध्या को फैजाबाद, प्रयागराज को इलाहाबाद और कबीरधाम को मुस्तफाबाद बना दिया। जब हम सत्ता में आए, तो हमने इन स्थानों की वास्तविक पहचान बहाल की। सीएम ने इलाहाबाद का नाम प्रयागराज और फैजाबाद का नाम अयोध्या करने के अपने सरकार के पहले के प्रयासों का जिक्र किया।

संत कबीर का योगदान

लखीमपुर खीरी जिले में आयोजित इस कार्यक्रम में संत कबीर की विरासत का जश्न मनाया गया। इस प्रस्तावित नाम परिवर्तन का उद्देश्य 15वीं शताब्दी के कवि-संत के भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिकता में योगदान को सम्मानित करना है। (Uttar Pradesh)


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