Ram Mandir Flag Hoisting: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को अयोध्या में राम जन्मभूमि मंदिर के ऊपर धर्म ध्वज फहराए जाने को ‘ऐतिहासिक’ बताया। उन्होंने कहा कि भारत को 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने के लक्ष्य को हासिल करने के लिए अपनी विरासत से ताकत हासिल करनी चाहिए और खुद को ‘गुलाम मानसिकता’ से मुक्त करना चाहिए।
Ram Mandir Flag Hoisting: 2047 तक विकसित भारत
पीएम मोदी ने आत्मविश्वासी और भविष्य के लिए तैयार भारत के निर्माण के दृष्टिकोण को रेखांकित करने के लिए भगवान राम से जुड़े मूल्यों का आह्वान किया। अयोध्या में ‘ध्वजारोहण’ समारोह में सभा को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि राम एक व्यक्ति नहीं हैं, वह एक मूल्य हैं। अगर हमें 2047 तक भारत को विकसित बनाना है, तो हमें अपने भीतर राम को जगाना होगा। इस संकल्प के लिए आज से बेहतर दिन कौन सा हो सकता है? पीएम मोदी ने इस बात पर जोर दिया कि भगवान राम भावनाओं के माध्यम से जुड़ते हैं।
पिछले एक दशक की भारत की विकास यात्रा पर विचार करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि पिछले 11 वर्षों में समाज के हर वर्ग, महिलाओं, दलितों, पिछड़े वर्गों, अत्यंत पिछड़े वर्गों, आदिवासियों, वंचितों, किसानों, श्रमिकों और युवाओं को विकास के केंद्र में रखा गया है।
उन्होंने कहा कि 2047 तक, जब देश आजादी के 100 साल पूरे करेगा। एक विकसित भारत के निर्माण के लक्ष्य को पूरी तरह से साकार किया जाना चाहिए। उन्होंने नागरिकों से भविष्य के दशकों और सदियों को ध्यान में रखते हुए विजन के साथ काम करने का आग्रह किया। (Ram Mandir Flag Hoisting)

कोविदार वृक्ष: हमारी जड़ों का प्रतीक
पीएम ने कहा कि हमें आने वाले 1000 वर्षों के लिए भारत की नीव मजबूत करनी है। जो सिर्फ वर्तमन का सोचते हैं वो आने वाली पिध्यों के साथ अन्याय करते हैं। हम जब नहीं थे ये देश तब भी था, जब हम नहीं रहेंगे ये देश तब भी रहेगा।
विरासत को राष्ट्रीय पहचान से जोड़ते हुए प्रधानमंत्री ने ‘धर्म ध्वज’ पर दर्शाए गए कोविदार वृक्ष के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इसकी पुनर्स्थापना पहचान के कायाकल्प का प्रतिनिधित्व करती है। 25 नवंबर का यह ऐतिहासिक दिन हमारी विरासत पर गर्व का क्षण लेकर आता है। इसका कारण धर्म ध्वज पर अंकित कोविदार वृक्ष है। यह कोविदार वृक्ष इस बात का उदाहरण है कि जब हम अपनी जड़ों से कट जाते हैं, तो हमारी महिमा इतिहास के पन्नों में दफन हो जाती है। (Ram Mandir Flag Hoisting)
राम मंदिर के प्रांगण में जब कोविदार को फिर से स्थापित किया जा रहा है, तो यह हमारी पहचान का पुनर्जीवन है। कोविदार का पेड़ हमें याद दिलाता है कि जब हम अपनी पहचान भूल जाते हैं, तो हम खुद को खो देते हैं। अगर देश को प्रगति करनी है तो उसे अपनी विरासत पर गर्व होना चाहिए।

गुलाम मानसिकता से मुक्ति: 2035 का संकल्प
पीएम मोदी ने 1835 में थॉमस मैकाले द्वारा भारत में शिक्षा के माध्यम के रूप में अंग्रेजी की शुरुआत का भी उल्लेख किया और इसे भारत को उसकी सांस्कृतिक नींव से उखाड़ फेंकने के प्रयासों की शुरुआत बताया। उन्होंने कहा कि भारत को 2035 तक खुद को गुलाम मानसिकता से मुक्त करने का संकल्प लेना चाहिए, जो 1835 में मैकाले शिक्षा प्रणाली की शुरुआत के 200 साल पूरे होने पर है।
एक और महत्वपूर्ण बात गुलाम मानसिकता से पूर्ण स्वतंत्रता है। 190 साल पहले, 1835 में, मैकाले नाम के एक अंग्रेज ने भारत को उसकी जड़ों से उखाड़ फेंकने के बीज बोए थे। मैकाले ने भारत में गुलामी की नींव रखी। दस साल बाद, 2035 में वह अपवित्र घटना 200 वर्ष पूरे करेगी। अगले 10 साल तक हमें भारत को गुलामी की मानसिकता से मुक्त करने के लक्ष्य के साथ आगे बढ़ना है। (Ram Mandir Flag Hoisting)
अयोध्या में ध्वजारोहण: सदियों के दर्द का अंत
पीएम मोदी ने यह भी कहा कि भारत और दुनिया राममय हैं, उन्होंने राम मंदिर के ऊपर धर्म ध्वज की स्थापना को एक ऐसा क्षण बताया जो सदियों के घाव और 500 वर्षों तक जीवित रखे गए सभ्यतागत संकल्प की पूर्ति का प्रतीक है।
पीएम मोदी ने कहा कि आज पूरा भारत और दुनिया राममय है। हर रामभक्त के हृदय में असाधारण संतोष है। असीम कृतज्ञता है। अथाह अलौकिक आनंद है। सदियों के घाव भरे जा रहे हैं। सदियों के दर्द को आज शांत किया जा रहा है। सदियों का संकल्प आज सिद्ध हो रहा है। आज उस बलिदान की पूर्णता है जिसकी आग 500 साल तक जली रही। आज इस धर्मध्वज के रूप में भगवान राम की ऊर्जा भव्य राम मंदिर के शिखर पर स्थापित है।

ध्वज का प्रतीकवाद: भारतीय सभ्यता का कायाकल्प
ध्वज के प्रतीकवाद के बारे में विस्तार से बताते हुए पीएम मोदी ने कहा कि यह एक प्राचीन सभ्यता के पुनर्जन्म को दर्शाता है और राम राज्य के आदर्शों का प्रतीक है। यह धर्म ध्वज सिर्फ एक झंडा नहीं है। यह भारतीय सभ्यता के कायाकल्प का ध्वज है।
केसरिया रंग, सूर्यवंश का संकेत, ‘ॐ’ शब्द और कोविदारा का पेड़ रामराज्य की महिमा का प्रतिरूपण करते हैं। यह ध्वज एक संकल्प है, एक सफलता है, सृजन के लिए संघर्ष की कहानी है, 100 वर्षों के संघर्ष का एक भौतिक रूप है। आने वाली हजारों शताब्दियों तक ये ध्वज भगवान राम के मूल्यों की घोषणा करेगा। सत्य ही धर्म है। कोई भेदभाव या दर्द नहीं होना चाहिए और शांति और खुशी है। गरीबी नहीं होनी चाहिए और कोई भी असहाय नहीं होना चाहिए। (Ram Mandir Flag Hoisting)
धर्म ध्वज में तीन पवित्र प्रतीक
इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रमुख मोहन भागवत ने अयोध्या में राम जन्मभूमि मंदिर के 191 फुट ऊंचे शिखर पर औपचारिक रूप से भगवा झंडा फहराया। ‘धर्म ध्वज’ में तीन पवित्र प्रतीक, ओम, सूर्य और कोविदर वृक्ष हैं, जिनमें से प्रत्येक सनातन परंपरा में निहित गहन आध्यात्मिक मूल्यों का प्रतिनिधित्व करता है।
समकोण त्रिकोणीय ध्वज की ऊंचाई 10 फीट और लंबाई 20 फीट है। कोविदार पेड़ मंदार और पारिजात पेड़ों का एक संकर है, जिसे ऋषि कश्यप ने बनाया है, जो प्राचीन पौधों के संकरण को प्रदर्शित करता है। सूर्य भगवान राम के सूर्यवंश वंश का प्रतिनिधित्व करता है, और ओम शाश्वत आध्यात्मिक ध्वनि है। ध्वजारोहण भगवान राम के अभिजीत मुहूर्त और देवी सीता की विवाह पंचमी के साथ हुआ है। (Ram Mandir Flag Hoisting)









