US H1B Visa: अमेरिका में काम करने की इच्छा रखने वाले भारतीय सॉफ्टवेयर इंजीनियरों और टेक विशेषज्ञों के लिए एक बड़ी जीत की खबर सामने आई है। एक अमेरिकी संघीय न्यायाधीश ने पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कार्यकाल से जुड़े उस विवादास्पद प्रस्ताव पर अदालती रोक लगा दी है, जिसमें H-1B वीजा शुल्क में भारी बढ़ोतरी करने की बात कही गई थी।
US H1B Visa: कुशल भारतीय सॉफ्टवेयर इंजीनियरों के लिए राहत की सांस
आपको बताते चलें कि, अमेरिकी चैंबर ऑफ कॉमर्स और कई बड़ी टेक कंपनियों ने सरकार के इस फैसले को अदालत में चुनौती दी थी। संगठनों का तर्क था कि शुल्क में अत्यधिक वृद्धि से न केवल प्रतिभाशाली विदेशी कर्मचारियों का आना कम होगा, बल्कि अमेरिकी अर्थव्यवस्था की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता पर भी बुरा असर पड़ेगा। अदालत ने इन दलीलों को स्वीकार करते हुए शुल्क वृद्धि के प्रस्ताव को फिलहाल ठंडे बस्ते में डाल दिया है।
वीजा स्टैंपिंग में देरी: गूगल और एप्पल जैसी कंपनियों का क्या होगा?
भले ही फीस वृद्धि पर रोक लग गई हो, लेकिन एक अन्य समस्या अब भी बरकरार है। अमेरिकी दूतावासों में वीजा स्टैंपिंग (Visa Stamping) की प्रक्रिया में हो रही अत्यधिक देरी ने कंपनियों की नींद उड़ा दी है। गूगल (Google) और एप्पल (Apple) जैसी दिग्गज कंपनियों ने अपने विदेशी कर्मचारियों को इस देरी के कारण घर से ही काम करने या उन्हें दूसरे देशों में शिफ्ट करने के विकल्पों पर विचार करना शुरू कर दिया है। (US H1B Visa)
वीजा प्रोसेसिंग में सुस्ती के कारण कई प्रोजेक्ट्स प्रभावित हो रहे हैं, जिससे कंपनियों को परिचालन संबंधी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। देखा जाए तो, ”H-1B वीजा शुल्क पर रोक का फैसला उन हजारों टैलेंटेड युवाओं के लिए आशा की किरण है, जो अपनी मेहनत से वैश्विक तकनीक क्षेत्र को नई दिशा दे रहे हैं।”
विशेषज्ञों की माने तो, इस रोक के बाद अब बाइडन प्रशासन पर वीजा प्रोसेसिंग की गति तेज करने का दबाव बढ़ेगा। उम्मीद है कि आगामी महीनों में दूतावासों में वेटिंग टाइम को कम करने के लिए नए प्रशासनिक सुधार किए जा सकते हैं। (US H1B Visa)









