भारत की राजनीति में शुरू से ही परिवारवाद का बोलबाला रहा है। देश के अंदर अमूमन सभी पार्टियों में परिरवाद ही चलता रहा है। आप देश में किसी भी राजनीतिक पार्टी को उठा के देख ले तो फिर चाहे वो कांग्रेस में गांधी परिवार, बिहार में (आरजेडी) लालू परिवार, यूपी में (सपा) मुलायम परिवार, महाराष्ट्र में शरद पवार परिवार, दक्षिण में करुणानिधी और जे जयललिता का परिवार, कश्मीर में अब्दुल्ला और मुफ्ती परिवार। इन सब राजनीतिक पार्टियों में पहले पिता फिरे बेटे या बटियों ने पार्टी की कमान संभाली है। अब एक और पार्टी में पुत्र मोह की वजह से पार्टी टूटने की कगार पर है।

‘सिर मुंडवाते ही ओले पड़े‘ ये कहावत बिहार में एनडीए की सहयोगी पार्टी राष्ट्रीय लोक मोर्चा और उसके मुखिया उपेन्द्र कुशवाहा के लिए बिल्कुल सटीक बैठती दिख रही है। पिछले महीने ही पार्टी के 4 विधायक चुनकर आए थे, लेकिन उनमें से तीन विधायकों ने बगावती तेवर अपना लिए हैं।ये तीनों एमएलए माधव आनंद , रामेश्वर महतो और अनिल कुमार सिंह हैं।

कुशवाहा के विधायक ने जाहिर की नाराजगी
उपेंद्र कुशवाहा के बेटे को मंत्री बनाए जाने को लेकर विधायक रामेश्वर महतो ने कहा, ‘हमने अपनी नाराजगी का इजहार कर दिया है और अब फैसला नेता को करना है। मेरे अलावा बाकी दोनों विधायकों से भी मेरी बात हुई थी, वह भी इस बात से नाराज है। हालांकि अपनी बातों को वह अब खुद ही बताएंगे।’

पार्टी के एक्शन पर क्या बोले विधायक महतो?
वहीं, पार्टी की तरफ से एक्शन लिए जाने के सवाल पर महतो बोले कि मैं राजनीति में सेवा करने के लिए आया हूं। अगर सेवा का मौका नहीं मिलेगा तो मैं खुद इसे छोड़ दूंगा।

लिट्टी पार्टी में क्यों नहीं गए थे MLA महतो?
इसके अलावा, उपेंद्र कुशवाहा की लिट्टी पार्टी में नहीं पहुंच पाने पर विधायक महतो ने कहा कि मुझे उस शाम दिल्ली आना था। मुझे इन्विटेशन भी मिला था लेकिन मैं नहीं जा सका। मुझे ये भी नहीं पता था कि इतना बड़ा प्रोग्राम है। मैंने सोचा था कि ये एक छोटा सा कार्यक्रम होगा, जिसमें केवल परिवार के सदस्य और करीबी सहयोगी रहेंगे। लोग अफवाह फैला रहे हैं कि पार्टी टूटने वाली है और तीनों विधायक पार्टी को छोड़ देंगे। ये सारी बातें झूठ हैं। हमारा किसी दूसरी पार्टी से कोई संपर्क नहीं है।









