2017 के उन्नाव बलात्कार मामले की पीड़िता और उनकी माँ ने दिल्ली में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) के अधिकारियों से मिलकर एक गंभीर शिकायत दर्ज कराई है। इस शिकायत में आरोप लगाया गया है कि मामले के जांच अधिकारी (IO) ने आरोपी पक्ष को फायदा पहुँचाने और उनकी जीत सुनिश्चित करने के उद्देश्य से एक न्यायाधीश के साथ मिलीभगत की थी। इसी को लेकर मचे बवाल पर कुलदीप सेंगर का मामला सुप्रीम कोर्ट जा पहुंचा है, जही पर उनको एक बड़ा झटका लगा है।
सेंगर की जमानत पर सुप्रीम रोक
उन्नाव दुष्कर्म मामले में पूर्व विधायक कुलदीप सिंह सेंगर की मुश्किलें बढ़ती नज़र आ रही हैं। दिल्ली हाईकोर्ट ने कुलदीप सेंगर की जमानत को हरी झंडी दिखा दी थी, जिसपर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी है। CBI ने दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। याचिका पर सुनवाई करते हुए सर्वोच्च न्यायालय ने कुलदीप सेंगर की जमानत पर रोक लगा दी है।
सुप्रीम कोर्ट ने कुलदीप सेंगर को नोटिस जारी करते हुए जवाब मांगा है। इसके लिए पूर्व विधायक को 1 हफ्ते का समय दिया गया है। कुलदीप सेंगर को अगले 7 दिन में जवाब दाखिल करना होगा।

समाज को झकझोर देने वाला मामला
सुनवाई की शुरुआत में CBI की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने कोर्ट से कहा, यह एक बच्ची के साथ किया गया बेहद भयानक रेप है। धारा 376 91) में न्यूनतम 10 वर्ष और अधिकतम सजा आजीवन कारावास है। तुषार मेहता ने कहा कि धारा 376(2) के तहत न्यूनतम सजा 20 वर्ष है और अधिकतम सजा अभियुक्त के जैविक जीवन के अंत तक कारावास है। सीबीआई ने दलील दी कि अपराध की गंभीरता को देखते हुए सजा को रद्द करना गलत है। पीड़िता नाबालिग थी और मामला समाज को झकझोर देने वाला है। ऐसे मामलों में नरमी का गलत संदेश जाएगा।
रेप पीड़िता पहुंची सीबीआई ऑफिस
इससे पहले शनिवार को बीजेपी के पूर्व विधायक कुलदीप सेंगर की जमानत के खिलाफ रेप पीड़ित दिल्ली में CBI ऑफिस पहुंची थी। जहां उसने बेल के खिलाफ एप्लिकेशन दी। 23 दिसंबर को दिल्ली हाईकोर्ट ने कुलदीप सेंगर को सशर्त जमानत दी थी। इसके बाद से ही विरोध प्रदर्शन हो रहा है।









