इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी (Contaminated Water) से मची तबाही ने पूरे प्रदेश को झकझोर दिया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने स्थिति को ‘आपातकाल’ जैसा बताते हुए खुद मोर्चा संभाला है। “देश का सबसे स्वच्छ शहर ‘मौत के प्याले’ क्यों परोस रहा है? इंदौर के भागीरथपुरा में जब कई मासूमों की अर्थियां उठीं, तो मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को अपना दौरा बीच में छोड़कर अस्पताल पहुंचना पड़ा। उन्होंने न केवल अस्पताल के बेड पर जाकर मरीजों का हाथ थामा, बल्कि उन लापरवाह अधिकारियों की किस्मत पर भी ताला लगा दिया जिन्होंने सीवर का पानी नलों में मिला दिया। जानिए CM मोहन ने सिस्टम की इस ‘हत्या’ पर क्या कड़ा संदेश दिया है।”

सीएम मोहन ने ट्वीट कर क्या कहा?
वहीं, प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने घटना को लेकर सोशल मीडिया X पर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने लिखा कि आज सुबह मुख्य सचिव और अन्य अधिकारियों के साथ इंदौर के दूषित पेयजल प्रकरण में राज्य शासन द्वारा की जा रही कार्रवाई की समीक्षा की और आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। अपर मुख्य सचिव (नगरीय प्रशासन एवं विकास) द्वारा प्रस्तुत रिपोर्ट पर भी चर्चा की।
उन्होंने आगे लिखा कि इंदौर नगर निगम आयुक्त और अपर आयुक्त को इस सम्बन्ध में कारण बताओ नोटिस जारी करने, अपर आयुक्त को तत्काल इंदौर से हटाने और प्रभारी अधीक्षण यंत्री से जल वितरण कार्य विभाग का प्रभार वापस लेने के निर्देश दिए। इंदौर नगर निगम में आवश्यक पदों पर तत्काल प्रभाव से पूर्ति करने के निर्देश भी दिए।

आकाश विजयवर्गीय का बयान
पूर्व विधायक आकाश विजयवर्गीय ने कहा कि मामले की जांच अभी चल रही है और जांच रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि इतनी अधिक मौतों का वास्तविक कारण क्या था। उन्होंने यह भी कहा कि केवल गंदे पानी से इतनी मौतें होना संभव नहीं लगता और इसके पीछे किसी बड़ी साजिश की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
राहत और मुआवजा
सहायता राशि: मुख्यमंत्री ने मृतकों के परिजनों के लिए 2-2 लाख रुपये की आर्थिक सहायता का ऐलान किया है।
मुफ्त इलाज: उन्होंने निर्देश दिया है कि निजी और सरकारी अस्पतालों में भर्ती सभी 200+ मरीजों का पूरा खर्च मध्य प्रदेश सरकार उठाएगी।









