“क्या पैसा ही सब कुछ है? अरबों की संपत्ति के मालिक अनिल अग्रवाल आज उस चीज़ के लिए रो रहे हैं जिसे कोई दौलत वापस नहीं ला सकती। एक पिता का अपने ‘बेटे’ के लिए ऐसा प्यार देखकर आपकी आँखें भर आएंगी।”
“दुनिया जिसे ‘वेदांता का वारिस’ कहती थी, पिता अनिल अग्रवाल के लिए वह बस उनका प्यारा बेटा था। एक पिता का कंधा झुक गया है, लेकिन उनकी हिम्मत अभी भी अपने बेटे के अधूरे सपनों को पूरा करने में लगी है। जानिए क्या थी अग्निवेश की वो आखिरी इच्छा जिसे पूरा करने के लिए अनिल अग्रवाल ने लिया है बड़ा संकल्प…”

वेदांता ग्रुप के चेयरमन अनिल अग्रवाल (Anil Agarwal) के बेटे अग्निवेश अग्रवाल (Agnivesh Agarwal Dies) का बुधवार को न्यूयॉर्क में निधन हो गया, वे 49 साल के थे। स्कीइंग के दौरान हादसे का शिकार होने के बाद उन्हें इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां कार्डियक अरेस्ट के चलते उनकी जान चली गई. पिता Anil Agarwal ने अपने दिवंगत बेटे के लिए एक भावुक पोस्ट भी किया, जिसमें उन्होंने अग्निवेश के बड़े सपने का जिक्र किया और कहा कि उसे पूरा करेंगे।
अनिल अग्रवाल ने सोशल मीडिया पोस्ट में जानकारी दी कि अग्निवेश अमेरिका में स्कीइंग के दौरान घायल हुए थे। उन्हें इलाज के लिए माउंट सिनाई अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां उन्हें बुधवार को कार्डियक अरेस्ट आया। अनिल अग्रवाल ने बुधवार रात करीब 10 बजे X पर पोस्ट कर बेटे के निधन की जानकारी दी। एक भावुक पोस्ट में बेटे के निधन को जीवन का सबसे अंधकारमय दिन बताया। उन्होंने लिखा कि वे अपने बेटे से किए हुए वादे को निभाते हुए अपनी कमाई का 75% समाज को लौटाएंगे।

पिता का अपने बेटे के लिए भावुक पोस्ट
Anil Agarwal ने पोस्ट में लिखा कि एक माता-पिता का ये दर्द शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता, जिन्हें अपने बच्चे को अलविदा कहना पड़ता है. एक बेटा अपने पिता से पहले नहीं जाता। इस नुकसान ने हमें इस तरह से तोड़ दिया है.
बताया क्या था अग्निवेश का सपना?
3 जून 1976 को पटना में जन्मे अग्निवेश का देश के लिए बड़ा सपना था, जिसके बारे में वेदांता चेयरमैन (Vedanta Chairman) ने अपनी सोशल मीडिया पोस्ट में बताया, उन्होंने लिखा, ‘अग्निवेश एक आत्मनिर्भर भारत बनाने में बहुत विश्वास करते थे। वह अक्सर कहते थे कि पापा, एक देश के तौर पर हमारे पास किसी चीज की कमी नहीं है, फिर हम कभी पीछे क्यों रहें?’

प्रधानमंत्री मोदी ने जताया शोक
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Modi) ने अनिल अग्रवाल के पोस्ट रिप्लाई करते हुए X पर लिखा “अग्निवेश अग्रवाल का असामयिक निधन अत्यंत चौंकाने वाला और दुखदायी है। इस हृदयस्पर्शी श्रद्धांजलि में आपके गहन शोक की गहराई स्पष्ट झलक रही है। प्रार्थना है कि आप और आपका परिवार निरंतर शक्ति एवं साहस प्राप्त करें। ओम शांति।
कौन हैं अनिल अग्रवाल (Anil Agarwal)
अनिल अग्रवाल (Anil Agarwal) का जन्म 24 जनवरी 1954 को बिहार (Bihar) के पटना (Patna) में एक मारवाड़ी परिवार में हुआ। सीमित संसाधनों और आर्थिक कठिनाइयों के बावजूद उन्होंने पटना के मिलर स्कूल से अपनी शुरुआती पढ़ाई पूरी की। कम उम्र से ही सीखने की ललक और आगे बढ़ने का जज़्बा उनके व्यक्तित्व का हिस्सा रहा, जिसने उन्हें छोटे शहर से निकलकर देश के सबसे प्रभावशाली उद्योगपतियों में शामिल कर दिया।

अग्निवेश 2019 तक हिंदुस्तान जिंक लिमिटेड के चेयरमैन रहे
कॉमर्स में ग्रेजुएट अग्निवेश जिंक उत्पादक कंपनी हिंदुस्तान जिंक लिमिटेड के 2019 तक चेयरमैन रहे। उन्होंने भारत में माइनिंग में उस समय प्रचलित तकनीक को मॉडर्न बनाया, जिसे इंटरनेशनल बेंचमार्क माना गया। उन्होंने हिंदुस्तान जिंक को विश्व की टॉप कंपनी बनाने में अहम रोल निभाया। इनके साथ ही वे फुजैराह गोल्ड के प्रेसिडेंट और MD रहे, जिसकी स्थापना 2009 में हुई थी और तब से वे अलुवर्क्स लिमिटेड के बोर्ड में शामिल थे। साथ ही वेदांता से जुड़ी पावर कंपनी के बोर्ड में भी शामिल थे। वे 1995 से 2013 तक मद्रास एल्युमिनियम कंपनी लिमिटेड के डायरेक्टर रहे। साथ ही 2009 से स्टरलाइट एनर्जी लिमिटेड के गैर-कार्यकारी निदेशक भी थे।
जन्म पटना में हुआ, परिवार की जड़ें राजस्थान में
मेटल किंग के नाम से मशहूर अनिल अग्रवाल के परिवार की जड़ें राजस्थान में रही हैं। उनके पिता मारवाड़ी समाज से थे, जो कारोबार के सिलसिले में बिहार चले गए थे। अनिल अग्रवाल का जन्म 1954 में पटना में हुआ। अनिल की शुरुआती पढ़ाई पटना में ही हुई।

कारोबारी सफर की शुरुआत
अनिल अग्रवाल ने अपने व्यवसायिक जीवन की शुरुआत 1970 के दशक के मध्य में मेटल स्क्रैप ट्रेडिंग से की। 1976 में उन्होंने वेदांता लिमिटेड की स्थापना की, जो शुरुआत में स्क्रैप मेटल के कारोबार तक सीमित थी। मेहनत, दूरदर्शिता और सही फैसलों के दम पर वेदांता ने तेजी से विस्तार किया और अनिल अग्रवाल को मेटल इंडस्ट्री में एक अलग पहचान दिलाई। इसी वजह से उन्हें ‘मेटल किंग’ भी कहा जाने लगा।









