“क्या अब जांच एजेंसियां तय करेंगी कि चुनाव कौन लड़ेगा? कोलकाता की सड़कों पर आज जो हुआ, उसने भारतीय लोकतंत्र में एक नया अध्याय लिख दिया है। जब एक मुख्यमंत्री को अपनी पार्टी की ‘कैंडिडेट लिस्ट’ और ‘रणनीति’ बचाने के लिए खुद रेड वाली जगह पर उतरना पड़े, तो समझ लीजिए कि 2026 का चुनाव सामान्य नहीं होने वाला। क्या यह सिर्फ भ्रष्टाचार की जांच है या विपक्षी दलों के दिमाग (Data) पर कब्ज़ा करने की कोशिश?”
पश्चिम बंगाल में 2026 के विधानसभा चुनावों से ठीक पहले सियासी पारा सातवें आसमान पर पहुँच गया है। कोलकाता में प्रवर्तन निदेशालय (ED) की छापेमारी ने एक अभूतपूर्व राजनीतिक ड्रामे को जन्म दे दिया है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने खुद छापेमारी वाली जगह पहुँचकर केंद्र सरकार पर “पार्टी की रणनीति और कैंडिडेट लिस्ट चुराने” का संगीन आरोप लगाया है।

ममता बनर्जी ने लगाए संगीन आरोप
ममता कुछ ही मिनटों में प्रतीक के घर से बाहर आ गईं. उस समय उनके हाथ में एक हरे रंग की फाइल थी. बाहर आकर उन्होंने मीडिया से कहा, “वे मेरी पार्टी के सारे डॉक्यूमेंट्स जब्त कर रहे थे! मैं उन्हें ले आई.” उन्होंने गृह मंत्री अमित शाह पर हमला बोलते हुए कहा कि वह देश को कंट्रोल नहीं कर सकते! वह मेरी पार्टी के डॉक्यूमेंट्स जब्त करवा रहा है! मैंने प्रतीक को फोन किया. वह मेरी पार्टी का इंचार्ज हैं. वे सब कुछ ले जा रहे थे, हार्ड डिस्क, फोन.” ममता ने कहा कि इसके बाद वह साल्ट लेक में IPAC ऑफिस भी गईं
ममता बनर्जी ने तीखा हमला करते हुए कहा, “क्या ED और अमित शाह का काम पार्टी की हार्ड डिस्क और कैंडिडेट लिस्ट इकट्ठा करना है? जो देश की रक्षा नहीं कर सकता और मेरी पार्टी के सारे डॉक्यूमेंट्स ले जा रहे हैं। अगर मैं बीजेपी पार्टी ऑफिस पर रेड करूं तो क्या होगा? उसका रिजल्ट क्या होगा? मेरा हार्डडिस्क, फोन वो सब इकट्ठा कर रहे हैं। उन्होंने हमारे IT सेल पर भी रेड की है।”

मेरी पार्टी को हाईजैक करने की कोशिश
ममता बनर्जी ने कहा कि एक तरफ तो SIR करके वोटर्स के नाम लिस्ट से हटाए जा रहे हैं, करीब 1.5 करोड़ लोगों के नाम हटाए गए हैं. दूसरी तरफ, ऐसी सर्च के जरिए पार्टी के प्लान को हाईजैक किया जा रहा है. ममता ने कहा, “देखिए, मैं इस फाइल में सब कुछ लेकर आई हूं, क्योंकि प्रतीक मेरी पार्टी के इंचार्ज हैं. मैंने सारी हार्ड डिस्क अरेंज कर ली हैं.”
इससे पहले 2019 में CBI ने उस समय के पुलिस कमिश्नर राजीव कुमार के लाउडन स्ट्रीट वाले बंगले पर रेड मारी थी. ममता पहले ही वहां पहुंच चुकी थीं. उन्होंने उस घटना के विरोध में धर्मतला में धरना भी शुरू कर दिया था. उसके बाद एक सेंट्रल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी ने फिर से ममता सरकार की कंसल्टेंसी फर्म के हेड के घर पर रेड मारी थी. तब भी, वह वहां खुद मौजूद थीं.
SIR और चुनावी समीकरण
ममता बनर्जी ने इस रेड को ‘स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन’ (SIR) यानी मतदाता सूची संशोधन विवाद से भी जोड़ा। उन्होंने आरोप लगाया कि एक तरफ बीजेपी के इशारे पर लाखों समर्थकों के नाम वोटर लिस्ट से काटे जा रहे हैं, और दूसरी तरफ एजेंसियों के जरिए उनकी पार्टी को कमजोर करने की कोशिश हो रही है।









