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Raj Thackeray and ‘Marathi Card’: ! हिंदी भाषा और प्रवासियों पर तीखे बयान से महाराष्ट्र की राजनीति में उबाल।

महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) के प्रमुख राज ठाकरे (Raj Thackeray)ने एक बार फिर अपनी चिर-परिचित आक्रामक शैली में हिंदी भाषा और प्रवासियों के मुद्दे को उठाकर राज्य की सियासत में हलचल पैदा कर दी है। एक हालिया सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान दिए गए उनके बयान ने न केवल भाषाई गौरव की बहस को दोबारा छेड़ दिया है, बल्कि आगामी राजनीतिक समीकरणों पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।

राज ठाकरे ने तर्क दिया कि महाराष्ट्र की आधिकारिक और प्राथमिक भाषा मराठी है। उन्होंने ‘हिंदी थोपने’ की कोशिशों की आलोचना करते हुए कहा कि राज्य में रहने वाले किसी भी व्यक्ति को स्थानीय भाषा का सम्मान करना चाहिए। तो वहीं विपक्षी दलों ने राज ठाकरे पर ‘विभाजनकारी राजनीति’ करने का आरोप लगाया है। नेताओं का कहना है कि यह बयान केवल ध्रुवीकरण के माध्यम से वोट बैंक हासिल करने की एक कोशिश है और कुछ नहीं।

राज ठाकरे ने उत्तर भारतीय प्रवासियों (Uttar Bhartiya Pravasion) को संबोधित करते हुए कहा, “हिंदी आपकी भाषा नहीं है, यह समझ लें। अगर आप इसे हम पर थोपेंगे, तो मैं आपको लात मारकर बाहर निकाल दूँगा।”  उनका तर्क है कि अगर मराठी भाषी (Marathi Bhasha )इस बार एकजुट नहीं हुए, तो मुंबई और महाराष्ट्र के संसाधनों पर बाहरी लोगों का पूरी तरह कब्जा हो जाएगा। उन्होंने कहा कि “भूमि और भाषा” दोनों खतरे में हैं, और यदि ये चले गए तो मराठी मानुस की पहचान मिट जाएगी

फिलहाल आगामी निकाय चुनावों को देखते हुए मनसे अपने कट्टर मराठी वोट बैंक को एकजुट करना चाहती है। और अन्य बड़ी पार्टियों के बीच अपनी अलग पहचान बनाए रखने के लिए राज ठाकरे अक्सर इन ‘इमोशनल’ मुद्दों का सहारा लेते रहे हैं। हालांकि,  ​इस विवादित बयान के बाद महाराष्ट्र के औद्योगिक और सामाजिक क्षेत्रों में भी चर्चा शुरू हो गई है। जहाँ एक ओर भाषाई अस्मिता का मुद्दा गरमाया हुआ है, वहीं दूसरी ओर कानून-व्यवस्था को लेकर प्रशासन भी सतर्क है ताकि किसी भी अप्रिय घटना को रोका जा सके।

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