उत्तर प्रदेश की राजनीति में जनवरी 2026 की यह हलचल नई नहीं है, लेकिन इसके तेवर बेहद तीखे हैं। दरअसल, विवाद तब शुरू हुआ जब डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने एक सार्वजनिक मंच से दावा किया कि सपा के कई विधायक उनके संपर्क में हैं और लोकसभा चुनाव के बाद का परिदृश्य सपा के लिए अच्छा नहीं होगा। इसी के जवाब में अखिलेश यादव ने पलटवार की कमान संभाली।

उत्तर प्रदेश की सियासत में जुबानी जंग जब अपने चरम पर होती है, तो उसमें तंज और चुटकियों का तड़का लगना लाजमी है। सपा प्रमुख अखिलेश यादव और डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य के बीच की ‘सियासी अदावत’ ने एक बार फिर नया मोड़ ले लिया है।
अखिलेश यादव का केशव मौर्य पर तंज
उत्तर प्रदेश की राजनीति में शह और मात का खेल अब व्यक्तिगत तंज तक जा पहुँचा है। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने एक बार फिर डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य की घेराबंदी करते हुए ऐसा सवाल दाग दिया है, जिसने भाजपा के भीतर की गुटबाजी की चर्चाओं को हवा दे दी है। हाल ही में एक प्रेस वार्ता के दौरान जब केशव मौर्य ने सपा में टूट की भविष्यवाणी की, तो अखिलेश यादव ने मुस्कुराते हुए पलटवार किया— “दूसरों के विधायकों की गिनती करने वाले केशव जी पहले ये तो साफ करें कि क्या खुद भाजपा उनके संपर्क में है?” यह महज एक चुटकी नहीं, बल्कि उस पुराने घाव पर नमक छिड़कने जैसा है। जिसे लेकर अक्सर दिल्ली से लखनऊ तक कयास लगाए जाते रहे हैं।

केशव मौर्य ने सपा पर साधा निशाना
डिप्टी सीएम आगरा में एक कार्यक्रम के दौरान समाजवादी पार्टी पर हमलावर नजर आए। उन्होंने इस दौरान कहा कि समाजवादी पार्टी के कई विधायक हमारे साथ आना चाहते हैं, लेकिन बीजेपी उन्हें नहीं लेना चाहती। उन्होंने कहा कि बिहार में हारने के बाद अखिलेश यादव बौखला गए हैं। वे 2027 में सरकार बनाने के सपने देख रहे हैं। इस दौरान उन्होंने बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर भी तीखा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि ममता बनर्जी भ्रष्टाचार को संरक्षण दे रही हैं। उन्होंने ईडी के एक्शन पर कहा कि बंगाल में टीएमसी जा रही है और बीजेपी आ रही है। जिससे ममता बनर्जी घबरा गई हैं, वे भ्रष्टाटार को बचाने के काम में लगी हुई हैं।

अखिलेश यादव का यह तंज सीधे तौर पर भाजपा के भीतर चल रही खींचतान को हवा देने की कोशिश है। राजनीति में इस तरह के बयानों का मकसद केवल विपक्षी को नीचा दिखाना नहीं, बल्कि उनके कार्यकर्ताओं के मनोबल पर चोट करना भी होता है। अब देखना यह है कि केशव प्रसाद मौर्य इस ‘संपर्क’ वाले सवाल का जवाब किस अंदाज में देते हैं और क्या भाजपा के भीतर से इस पर कोई सफाई आती है। फिलहाल, यूपी की राजनीति में ‘चुटकी’ और ‘चुनौती’ का यह दौर थमता नजर नहीं आ रहा है।









