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Dahi-Chuda Politics in Bihar: दही-चूड़ा भोज में तेज प्रताप के घर पहुंचे पिता लालू यादव, कहा- “तेज प्रताप को मेरा आशीर्वाद, अब परिवार के साथ ही रहेगा बेटा!”

मकर संक्रांति के पावन अवसर पर पटना के राबड़ी आवास से एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जिसने बिहार की सियासत और लालू परिवार के भीतर चल रही खींचतान, दोनों पर विराम लगाने की कोशिश की है। ‘दही-चूड़ा’ भोज के बहाने लालू यादव ने न केवल विरोधियों को अपनी एकजुटता दिखाई, बल्कि बड़े बेटे तेज प्रताप यादव को लेकर एक बड़ा भावनात्मक बयान भी दिया।

“पटना के 10 सर्कुलर रोड पर दही की महक और चूड़े की खनक के बीच आज बिहार की राजनीति का सबसे बड़ा ‘पारिवारिक मरहम’ देखने को मिला। मकर संक्रांति के इस पारंपरिक भोज में जब लालू प्रसाद यादव ने खुद अपने हाथों से बड़े बेटे तेज प्रताप यादव को तिलक लगाया, तो अटकलों के बाजार शांत हो गए। महीनों से चल रही अनबन और अलग रहने की खबरों के बीच, राजद सुप्रीमो का यह कहना कि ‘तेज प्रताप को मेरा पूरा आशीर्वाद है और वह अब कहीं नहीं जाएगा, परिवार के साथ ही रहेगा’, केवल एक पिता का भरोसा नहीं बल्कि 2026 के चुनावी समर से पहले पार्टी को एकजुट रखने का मास्टरस्ट्रोक है। क्या लालू का यह ‘आशीर्वाद’ परिवार के भीतर चल रहे पावर स्ट्रगल (Power Struggle) का अंत है?”

  1. पारिवारिक एकजुटता: पिछले कई महीनों से तेज प्रताप यादव के बागी तेवरों और उनके अलग निवास को लेकर चर्चाएं गर्म थीं। आज के भोज में तेज प्रताप न केवल शामिल हुए, बल्कि उन्होंने पिता लालू यादव और माँ राबड़ी देवी के पैर छूकर आशीर्वाद लिया।
  2. लालू यादव का बयान: मीडिया से बात करते हुए लालू यादव भावुक दिखे। उन्होंने स्पष्ट कहा कि परिवार में कोई मनमुटाव नहीं है। उन्होंने कहा, “तेज प्रताप मेरा बड़ा बेटा है, वह चंचल जरूर है लेकिन दिल का साफ है। उसे मेरा आशीर्वाद है, अब वह परिवार के साथ ही रहकर काम करेगा।”
  3. सियासी भोज: इस भोज में बिहार के मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री और महागठबंधन के तमाम दिग्गज नेता शामिल हुए। लालू यादव ने खुद अतिथियों को दही-चूड़ा और तिलकुट परोसा, जो बिहार की राजनीति में उनके पुराने दबदबे और मिलनसार छवि को दर्शाता है।
  4. तेज प्रताप का रुख: तेज प्रताप ने भी सोशल मीडिया पर अपनी और पिता की तस्वीर साझा करते हुए लिखा कि ‘पिता का आशीर्वाद ही सबसे बड़ी पूंजी है’। उन्होंने ‘अर्जुन’ (तेजस्वी) के साथ मिलकर पार्टी को मजबूत करने की बात दोहराई।
  5. 2026 की तैयारी: राजनीतिक जानकारों का मानना है कि लालू यादव जानते हैं कि आगामी चुनावों में जीत के लिए यादव वोट बैंक और पार्टी कैडर को यह संदेश देना जरूरी है कि परिवार पूरी तरह एकजुट है।

3 जनवरी को तेज प्रताप ने दिया था निमंत्रण

तेज प्रताप यादव ने 13 जनवरी को एक्स पर पोस्ट करके बताया था, “आज अपने पिताजी आदरणीय श्री लालू प्रसाद यादव जी, माता जी आदरणीय श्रीमती राबड़ी देवी जी से 10 सर्कुलर रोड स्थित आवास पहुंचकर मुलाकात कर आशीर्वाद प्राप्त किया और अपने छोटे भाई और बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी से भी भेंट मुलाकात कर कल 14 जनवरी को मकर संक्रांति के अवसर पर आयोजित होने वाले “ऐतिहासिक दही -चूड़ा भोज” कार्यक्रम हेतु निमंत्रण पत्र देकर आमंत्रित किया। साथ ही आज अपनी प्यारी भतीजी कात्यायनी को गोद में खिलाने का अद्भुत पल भी प्राप्त हुआ।”

“दही-चूड़ा के इस भोज ने बिहार की कड़ाके की ठंड में राजनीतिक गर्मी बढ़ा दी है। लालू यादव ने एक ही तीर से दो निशाने साधे हैं—एक तरफ बेटे की नाराजगी दूर कर परिवार को जोड़ा है, तो दूसरी तरफ विरोधियों को यह संदेश दिया है कि ‘लालटेन’ की लौ अभी बुझी नहीं है। अब देखना यह होगा कि मकर संक्रांति का यह आशीर्वाद क्या वाकई तेज प्रताप के राजनीतिक जीवन में नया अनुशासन लेकर आता है।”

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