मकर संक्रांति के शुभ अवसर पर झारखंड की राजनीति में एक नया अध्याय शुरू हुआ है। भारतीय जनता पार्टी ने राज्यसभा सांसद आदित्य साहू (Aditya Sahu)को झारखंड का नया प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त किया है। वे बाबूलाल मरांडी (Babu Lal Marandi) की जगह लेंगे, जिन्होंने हाल ही में हुए संगठनात्मक बदलावों के तहत अपना पद छोड़ा है।
“झारखंड की सियासत में जब ‘संगठन’ की बात आती है, तो भाजपा ने एक बार फिर अपने जमीनी कार्यकर्ता पर भरोसा जताकर सबको चौंका दिया है। राज्यसभा सांसद आदित्य साहू, जिन्होंने कभी बूथ स्तर से अपनी राजनीति शुरू की थी, अब झारखंड भाजपा के नए ‘कैप्टन’ होंगे। 13 जनवरी 2026 को नामांकन की समय सीमा समाप्त होने तक साहू इकलौते उम्मीदवार रहे, जिसके बाद उनका निर्विरोध चुना जाना तय हो गया। बाबूलाल मरांडी जैसे कद्दावर आदिवासी चेहरे के बाद, एक पिछड़ा वर्ग (OBC) नेता को कमान सौंपना भाजपा की 2026 और भविष्य की चुनावी रणनीति का बड़ा हिस्सा माना जा रहा है। क्या आदित्य साहू का शांत स्वभाव और मजबूत सांगठनिक पकड़ झारखंड में भाजपा को फिर से सत्ता के शिखर तक ले जा पाएगी?”

कौन हैं आदित्य साहू?
- जन्म: रांची जिले के ओरमांझी प्रखंड के कुचू गांव में।
- शिक्षा और पेशा: उन्होंने एम.कॉम किया है और वे पेशे से शिक्षक (प्रोफेसर) रहे हैं। वे 2019 तक राम टहल चौधरी कॉलेज में व्याख्याता के रूप में कार्यरत थे।
- राजनीतिक पृष्ठभूमि: वे पिछले दो दशकों से भाजपा से जुड़े हैं। उन्होंने अपनी शुरुआत बूथ स्तर के कार्यकर्ता के रूप में की थी।
सांगठनिक अनुभव: * आदित्य साहू झारखंड भाजपा में प्रदेश उपाध्यक्ष और प्रदेश महामंत्री जैसे अहम पदों पर रह चुके हैं। अक्टूबर 2025 में उन्हें झारखंड भाजपा का कार्यकारी अध्यक्ष बनाया गया था, जिससे संकेत मिल गए थे कि वे भविष्य में बड़ी जिम्मेदारी संभालेंगे। जुलाई 2022 में भाजपा ने उन्हें राज्यसभा सांसद (Rajyasabha) के रूप में चुना। उनका कार्यकाल 2028 तक है। वे तेली समुदाय (OBC) से आते हैं, जो झारखंड की राजनीति में एक बड़ा वोट बैंक है।

बाबूलाल मरांडी की जगह क्यों? बाबूलाल मरांडी (Babu Lal Marandi) वर्तमान में झारखंड विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष (Leader of Opposition) की भूमिका निभा रहे हैं। ‘एक व्यक्ति, एक पद’ के सिद्धांत और सांगठनिक चुनावों के तहत यह बदलाव किया गया है, ताकि मरांडी सदन में सरकार को घेरने पर ध्यान दे सकें और साहू संगठन को मजबूत करें।
नामांकन और प्रस्तावक: साहू के नामांकन के समय बाबूलाल मरांडी, पूर्व सीएम अर्जुन मुंडा और रघुवर दास जैसे दिग्गज नेता प्रस्तावक के रूप में मौजूद थे, जो पार्टी के भीतर उनकी स्वीकार्यता को दर्शाता है।

“आदित्य साहू की नियुक्ति भाजपा की उस रणनीति का हिस्सा है, जिसमें वह आदिवासियों के साथ-साथ ओबीसी और मूलवासी समुदायों को साधने की कोशिश कर रही है। एक सौम्य और विवादों से दूर रहने वाले नेता के रूप में साहू के पास अब राज्य में बिखरे हुए कार्यकर्ताओं को एकजुट करने की बड़ी चुनौती है। यह ‘संक्रांति’ झारखंड भाजपा के लिए कितनी ऊर्जावान साबित होगी, यह उनके आने वाले फैसलों से तय होगा।”









