सात समंदर पार जब अनिश्चितता के बादल गहराए और अपनों से बिछड़ने का डर बढ़ा, तब भारत सरकार के अटूट संकल्प ने एक बार फिर दुनिया को अपनी ताकत दिखाई। ईरान की धरती से 10,000 भारतीयों का सुरक्षित रेस्क्यू केवल एक ‘निकासी अभियान’ नहीं, बल्कि उन लाखों दुआओं की जीत है जो भारत के कोने-कोने में बैठकर मां-बाप, बीवी और बच्चे कर रहे थे। आज जब विशेष विमानों के पहियों ने भारतीय सरजमीं को छुआ, तो वह सिर्फ यात्रियों का उतरना नहीं था, बल्कि उम्मीदों का फिर से जिंदा होना था। ‘ऑपरेशन सुरक्षित वतन’ के तहत घर लौटे इन भारतीयों की आंखों में वतन की मिट्टी को देखने की जो चमक है, वह बयां करती है कि दुनिया के किसी भी कोने में भारतीय अकेला नहीं है, क्योंकि उसकी ढाल बनकर तिरंगा हमेशा साथ खड़ा है।

ईरान में फंसे हजारों भारतीयों के लिए आज का दिन किसी पुनर्जन्म से कम नहीं है। भारत सरकार ने अपने नागरिकों को सुरक्षित निकालने के लिए दुनिया के सबसे बड़े एयरलिफ्ट ऑपरेशनों में से एक की शुरुआत कर दी है। पहला विशेष विमान आज दिल्ली के आईजीआई (IGI) एयरपोर्ट पर लैंड करने वाला है।
ईरान की गलियों में अनिश्चितता के बीच दिन काट रहे उन 10,000 भारतीयों के लिए पिछला कुछ समय किसी बुरे सपने जैसा था। लेकिन जैसे ही उन्हें खबर मिली कि ‘भारत सरकार उन्हें लेने आ रही है’, डर की जगह गर्व और चैन की सांस ने ले ली।
ऑपरेशन का स्वरूप: ईरान और पश्चिम एशिया के बदलते कूटनीतिक हालातों के बीच, भारत सरकार ने ‘ऑपरेशन घर वापसी’ के तहत प्राथमिकता के आधार पर 10,000 नागरिकों को निकालने का लक्ष्य पूरा किया है। इसमें छात्र, तीर्थयात्री और पेशेवर शामिल थे।

वायुसेना और एयर इंडिया की भूमिका: भारतीय वायुसेना के C-17 ग्लोबमास्टर और एयर इंडिया के विशेष विमानों ने तेहरान और अन्य शहरों से निरंतर उड़ानें भरीं। नागरिक उड्डयन मंत्रालय (Ministry of Civil Aviation) और विदेश मंत्रालय ने मिलकर इसे 2026 का अब तक का सबसे बड़ा नागरिक रेस्क्यू मिशन बनाया है। MEA India के माध्यम से निरंतर अपडेट जारी किए गए।
डिप्लोमैटिक जीत: भारत ने ईरान सरकार के साथ उच्च स्तरीय वार्ता कर ‘सेफ पैसेज’ सुनिश्चित किया, जिससे दुर्गम इलाकों में फंसे भारतीयों को भी सुरक्षित एयरपोर्ट तक लाया जा सका।
स्क्रीनिंग और सहायता: दिल्ली और मुंबई हवाई अड्डों पर विशेष हेल्प डेस्क बनाए गए हैं, जहाँ पहुंचने वाले प्रत्येक भारतीय की स्वास्थ्य जांच और उनके गंतव्य तक जाने के लिए रेलवे/बस की मुफ्त व्यवस्था की गई है।

यह खबर सिर्फ एक ट्रांसपोर्टेशन की खबर नहीं है, बल्कि यह संदेश है कि दुनिया के किसी भी कोने में अगर कोई भारतीय मुसीबत में है, तो पूरा देश उसके साथ खड़ा है। ईरान की धरती से जब इन भारतीयों ने उड़ान भरी होगी, तो उनके दिल में बस एक ही नारा रहा होगा— ‘जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी’ (जननी और जन्मभूमि स्वर्ग से भी बढ़कर हैं)। तो वहीं विदेश मंत्रालय ने भी सन्देश जारी कर दुनियां को बताया कि, हमारे नागरिकों की सुरक्षा हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। जब तक आखिरी भारतीय सुरक्षित घर नहीं पहुँच जाता, यह मिशन जारी रहेगा।”
आज दिल्ली का आसमान उन प्रार्थनाओं का गवाह बनेगा जो हज़ारों किलोमीटर दूर से भेजी गई थीं। यह ‘घर वापसी’ उन सभी के लिए एक मिसाल है जो भारत की शक्ति और अपने नागरिकों के प्रति उसकी प्रतिबद्धता पर विश्वास रखते हैं।









