Kaziranga Elevated Corridor: कल का सूरज काजीरंगा के घने जंगलों और वहां बसने वाले एक सींग वाले गैंडों, हाथियों और बाघों के लिए एक नया सवेरा लेकर आया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कल काजीरंगा नेशनल पार्क में जिस विशाल ‘वन्यजीव कॉरिडोर’ का शुभारंभ किया, वह आने वाले समय में जानवरों और मनुष्यों के बीच संघर्ष को खत्म करने की दिशा में एक ‘रामबाण’ साबित होने वाला है। जब विकास की होड़ में प्रकृति पीछे छूट रही थी, तब मोदी के इस ‘रक्षा कवच’ ने पर्यावरण और प्रगति के बीच एक अद्भुत संतुलन की मिसाल पेश की है।

काजीरंगा का कॉरिडोर: विकास और पर्यावरण का संगम (Kaziranga Elevated Corridor)
हर साल मानसून के दौरान जब ब्रह्मपुत्र का पानी काजीरंगा को अपनी आगोश में लेता है, तो हजारों बेजुबान जानवर सुरक्षित ऊंचाइयों की ओर भागते हैं। इस भागदौड़ में वे अक्सर हाईवे पर वाहनों की चपेट में आकर अपनी जान गंवा देते थे। यह नया कॉरिडोर इन बेजुबानों के लिए किसी संजीवनी से कम नहीं है। अब हिरणों की टोलियां और हाथियों के कुनबे बिना किसी डर के, ऊंचे रास्तों से सुरक्षित एक से दूसरे छोर तक जा सकेंगे। (Kaziranga Elevated Corridor)

प्रकृति के साथ सह-अस्तित्व: भारत की प्राचीन संस्कृति की झलक
उद्घाटन के दौरान प्रधानमंत्री का भावुक रूप भी दिखा, जब उन्होंने कहा कि इन बेजुबानों की तकलीफ को समझना ही सच्ची मानवता है। यह कॉरिडोर भारत की उस प्राचीन संस्कृति का प्रतीक है जहाँ ‘जीवों पर दया’ केवल एक विचार नहीं, बल्कि जीवन का आधार है। काजीरंगा का यह कॉरिडोर आने वाली पीढ़ियों को यह सिखाएगा कि हम प्रकृति को नष्ट करके नहीं, बल्कि उसके साथ मिलकर ही लंबी और खुशहाल उड़ान भर सकते हैं। (Kaziranga Elevated Corridor)
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने काजीरंगा को जो ‘रक्षा कवच’ दिया है, वह भविष्य के भारत की एक ऐसी तस्वीर है जहाँ विकास की पटरी पर बेजुबानों का खून नहीं गिरेगा। यह कॉरिडोर उन लाखों जानवरों की दुआओं का नतीजा है जो अब बिना किसी खौफ के अपनी धरती पर चैन की सांस ले सकेंगे।









