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कोडीन कफ सिरप तस्करी मामले में वाराणसी पुलिस की बड़ी कार्रवाई, 31 करोड़ रुपये की संपत्तियां फ्रीज

Cough Syrup Case

Cough Syrup Case: वाराणसी पुलिस ने कफ सिरप के अवैध व्यापार से जुड़े एक मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए मुख्य आरोपी भोला जायसवाल और अन्य लोगों से संबंधित लगभग 31 करोड़ रुपये मूल्य की आठ अचल संपत्तियों को फ्रीज कर दिया है। यह कार्रवाई गैंगस्टर एक्ट के तहत की गई है, जिसमें अवैध रूप से अर्जित की गई संपत्ति को लक्षित किया गया है।

भोला जायसवाल सिंडिकेट का मास्टरमाइंड (Cough Syrup Case)

मुख्य आरोपी भोला जायसवाल इस अवैध सिंडिकेट का मास्टरमाइंड माना जाता है। पुलिस ने उसकी और उसके परिजनों के नाम दर्ज संपत्तियों की पहचान की थी। कुर्क की गई संपत्तियों में वाराणसी के विभिन्न क्षेत्रों में स्थित बहुमंजिला इमारतें और कीमती जमीनें शामिल हैं। बता दें, उत्तर प्रदेश सरकार और वाराणसी पुलिस का उद्देश्य नशीले पदार्थों के काले कारोबार से आर्थिक लाभ कमाने वाले अपराधियों के वित्तीय ढांचे को पूरी तरह से ध्वस्त करना है।

गैंगस्टर एक्ट के तहत संपत्ति कुर्क

वरुणा जोन की सहायक पुलिस उपायुक्त (ADCP) नीतू कडियान के अनुसार, पिछले साल नवंबर में भोला जायसवाल, उनके बेटे शुभम जायसवाल और अन्य लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था, जब उनके पास से बड़ी मात्रा में कफ सिरप बरामद हुआ था। पुलिस जांच में पता चला कि भोला जायसवाल इस अवैध व्यापार का सरगना था। एडीसीपी ने बताया कि एनडीपीएस अधिनियम की धारा 68 (एफ) के तहत की गई कार्रवाई के तहत भोला जायसवाल की आठ अचल संपत्तियों की पहचान कर उन्हें फ्रीज कर दिया गया है। इन संपत्तियों का मूल्य लगभग 31 करोड़ रुपये है। (Cough Syrup Case)

उन्होंने आगे कहा कि यदि भोला जायसवाल 30 दिनों के भीतर अदालती कार्यवाही के दौरान सक्षम रूप से प्रतिनिधित्व करने में असमर्थ रहते हैं, तो इन संपत्तियों की नीलामी की जाएगी।

SIT की रिपोर्ट: तस्करी का अंतर्राष्ट्रीय साजिश की ओर इशारा

22 दिसंबर, 2025 को, उत्तर प्रदेश पुलिस की विशेष जांच टीम (SIT), कोडीन कफ सिरप की तस्करी मामले की जांच कर रही है। टीम ने भी उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को अपनी रिपोर्ट सौंपी, जिसमें निष्कर्षों से पता चलता है कि एक सीमा पार गिरोह दवाइयों की खेप की हेराफेरी, हवाला लेनदेन और आपराधिक नेटवर्क से संबंधों में शामिल है। (Cough Syrup Case)

एसआईटी की रिपोर्ट के अनुसार, इस रैकेट के कथित सरगना विभोर राणा को 2016 में लाइसेंस दिया गया था। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि खांसी की दवा के निर्माण और वितरण में शामिल फर्मों को लाइसेंस अखिलेश यादव के नेतृत्व वाली पिछली समाजवादी पार्टी सरकार के कार्यकाल के दौरान जारी किए गए थे। एसआईटी ने कहा कि नेपाल सीमा के पास स्थित मदरसों के खिलाफ की गई कार्रवाई से तस्करी की गतिविधियों पर सीधा असर पड़ा, जिसके चलते विभोर और उसके साथियों को सीमा पार तस्करी को अस्थायी रूप से रोकना पड़ा।

रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि अधिकारियों द्वारा गहन जांच के बाद, विभोर ने दवा कंपनी एबॉट से संपर्क किया और उससे खांसी की दवा की लगभग एक करोड़ बोतलें वापस लेने का अनुरोध किया। जांचकर्ताओं ने पाया है कि विभोर के सहयोगियों सौरभ और पप्पन से जुड़े बड़े माल की खेप पश्चिमी उत्तर प्रदेश में भी जब्त की गई है। (Cough Syrup Case)

रिपोर्ट में आरोप लगाया गया है कि विभोर के स्टॉक का एक हिस्सा कंपनी द्वारा जानबूझकर शुभम जायसवाल को तस्करी के उद्देश्य से भेजा गया था। बाद में शुभम जायसवाल के सहयोगी मनोज यादव के वाराणसी स्थित गोदाम से खांसी की दवा की एक बड़ी खेप बरामद की गई।

अवैध व्यापार के खिलाफ यूपी सरकार की सख्त कार्रवाई

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राज्य विधानसभा में इस मुद्दे पर बोलते हुए कहा कि कोडीन युक्त कफ सिरप के सेवन से उत्तर प्रदेश में किसी की मौत नहीं हुई है। उन्होंने बताया कि इस मामले से मादक द्रव्यों और मनोविकृत पदार्थों (एनडीपीएस) अधिनियम के तहत सख्ती से निपटा जा रहा है। (Cough Syrup Case)

मुख्यमंत्री योगी ने अब तक की कार्रवाई का विवरण देते हुए बताया कि इस मामले में 79 मामले दर्ज किए गए हैं, 225 आरोपियों की पहचान की गई है और 78 गिरफ्तारियां की गई हैं। उन्होंने सदन को यह भी बताया कि चल रही जांच के तहत 134 फर्मों पर छापेमारी की गई है।

मुख्यमंत्री ने आगे आरोप लगाया कि जांच बढ़ने पर समाजवादी पार्टी से संबंध सामने आ सकते हैं। उन्होंने कहा कि इस मामले में कोई भी आरोपी बच नहीं पाएगा। और चिंता मत कीजिए, जब समय आएगा तो बुलडोजर जैसी कार्रवाई की भी तैयारी कर ली जाएगी। तब शिकायत मत करना। (Cough Syrup Case)

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