लखनऊ : दिल्ली का रास्ता लखनऊ से होकर गुज़रता है, ये बात तो हम सबने सुनी है। लेकिन लखनऊ का रास्ता अब उन ‘Budget’ के पन्नों से होकर गुज़रने वाला है, जो जल्द ही उत्तर प्रदेश की विधानसभा में खुलने वाले हैं। 25 करोड़ की आबादी वाला यह सूबा इस वक्त सिर्फ आंकड़ों का इंतज़ार नहीं कर रहा, बल्कि उस भविष्य की राह देख रहा है जो अगले चुनाव की दिशा तय करेगा। वित्त मंत्री सुरेश खन्ना जब सदन में अपना बजट वाला ब्रीफकेस खोलेंगे, तो उसमें सिर्फ संख्याएं नहीं होंगी, बल्कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की ‘मिशन 2027’ वाली चुनावी रणनीति की पहली बड़ी दस्तक होगी। सवाल यह है कि क्या यह बजट आपकी रसोई तक राहत पहुँचाएगा या यह सिर्फ चुनावी बिसात पर चला गया एक बड़ा दांव साबित होगा?
इंफ्रास्ट्रक्चर की रफ्तार के साथ ‘सोशल सेक्टर’ पर दांव
यह Budget कोई आम वित्तीय लेखा-जोखा नहीं है, बल्कि 2027 के महासंग्राम से पहले का सबसे बड़ा मास्टरस्ट्रोक माना जा रहा है। सरकार के सामने इस वक्त दो बड़ी चुनौतियां हैं: एक तरफ ‘ब्रांड यूपी’ को चमकाने के लिए एक्सप्रेसवे और एयरपोर्ट जैसे बड़े प्रोजेक्ट्स पर पैसा लगाना, और दूसरी तरफ जनता को सीधी राहत देने वाली ‘पॉपुलिस्ट’ योजनाओं को धार देना। सूत्रों के मुताबिक, इस बार वित्त मंत्रालय ने करीब 9 से 10 लाख करोड़ का लक्ष्य रखा है। दिलचस्प बात यह है कि इस विशाल राशि का एक बड़ा हिस्सा ‘सोशल सेक्टर’ की तरफ मुड़ सकता है। पिछले कुछ चुनावी नतीजों ने यह स्पष्ट संकेत दिया है कि यूपी की जनता अब सिर्फ चमचमाती सड़कों से संतुष्ट नहीं है; उसे अपनी थाली में सस्ती दाल और हाथों में स्थायी काम भी चाहिए।
किसान, युवा और गरीब: योगी सरकार की नई ‘त्रिमूर्ति’
उत्तर प्रदेश की राजनीति की धुरी हमेशा से किसान और ग्रामीण अर्थव्यवस्था रही है। सरकार जानती है कि सत्ता की डगर खेतों से होकर ही जाती है। Budget के जो संकेत मिल रहे हैं, उसके अनुसार करीब 25% हिस्सा इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए रखा जाएगा, लेकिन उसके तुरंत बाद 15% शिक्षा, 12% कृषि और 8% स्वास्थ्य पर खर्च करने की तैयारी है। ग्राउंड रियलिटी यह है कि ब्रांड यूपी के बाद अब योगी सरकार का पूरा फोकस ‘गरीब, युवा और किसान’ की त्रिमूर्ति पर टिक गया है। विपक्ष द्वारा बनाए जा रहे ‘बेरोज़गारी’ और ‘पेपर लीक’ के नैरेटिव को काटने के लिए युवाओं के लिए एक विशेष बड़े फंड का प्रावधान लगभग तय माना जा रहा है। सरकार की कोशिश है कि चुनाव से पहले युवाओं के गुस्से को शांत कर उन्हें विकास की मुख्यधारा से जोड़ा जाए।
मुफ्त बिजली और गन्ना भुगतान: ग्रामीण वोट बैंक को साधने की रणनीति
ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बूस्ट देने के लिए सरकार इस बार कई लुभावने ऐलान कर सकती है। किसानों के लिए घरेलू और सिंचाई हेतु मुफ्त बिजली योजना को न केवल जारी रखा जाएगा, बल्कि इसके लिए Budget आवंटन और बढ़ाया जा सकता है ताकि किसानों को बिजली बिलों से पूरी तरह निजात मिल सके। इसके अतिरिक्त, पश्चिमी यूपी के सबसे संवेदनशील मुद्दे ‘गन्ना बकाया’ के समाधान के लिए चीनी मिलों के आधुनिकीकरण और एक ‘Price Stabilization Fund’ की घोषणा की प्रबल संभावना है। खेती के साथ-साथ दूध और मछली पालन जैसे संबद्ध क्षेत्रों पर सामाजिक सुरक्षा बजट का 5% खर्च कर किसानों की अतिरिक्त आय बढ़ाने पर भी सरकार का विशेष जोर रहने वाला है। साथ ही, पड़ोसी राज्यों में ‘लाड़ली बहना’ जैसी योजनाओं की सफलता को देखते हुए महिलाओं के खाते में सीधे पैसे भेजने वाली किसी बड़ी स्कीम का ऐलान सबकी निगाहों में है।
2027 का सेमीफाइनल: फाइलों से निकलकर जेब तक का सफर
राजनीति के गलियारों में इस Budget को ‘2027 का सेमीफाइनल’ कहा जा रहा है। योगी सरकार यह बखूबी समझती है कि पिछले कुछ चुनावों में विपक्ष ने ‘संविधान’ और ‘महंगाई’ के नाम पर जो माहौल बनाया था, उसे तोड़ने के लिए ‘सीधा प्रहार’ करना होगा। इसीलिए बजट का एक बड़ा हिस्सा गांव की चौपालों तक पहुँचाने की योजना है। मुफ्त बिजली, गन्ना भुगतान और आसान KCC लोन जैसे कदम उसी ग्रामीण वोट बैंक को वापस लाने की विसात है जो पिछले कुछ समय में थोड़ा छिटका नजर आया है। अंततः, सुरेश खन्ना विधानसभा में सिर्फ बजट नहीं पढ़ेंगे, बल्कि 2027 की चुनावी पिच तैयार करेंगे। आंकड़े अपनी जगह हैं, लेकिन असल परीक्षा तब होगी जब यह पैसा फाइलों से निकलकर आम आदमी की जेब तक पहुँचेगा और यह तय करेगा कि जनता ‘विकास’ पर मुहर लगाएगी या ‘बदलाव’ की लहर पर।









