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महा-संकट: क्या अंतरिक्ष का ‘कचरा’ बनेगा विलेन? 2030 तक आसमान में लगेगा ‘चक्का जाम’!

Space Debris

Space Debris: कल्पना कीजिए, आप एक बेहद जरूरी फ्लाइट के लिए एयरपोर्ट पर हैं। मौसम साफ है, धूप खिली है, विमान में कोई तकनीकी खराबी नहीं है, फिर भी अनाउंसमेंट होती है— “आपकी उड़ान अनिश्चितकाल के लिए टाल दी गई है, क्योंकि आसमान में ‘कचरे का ट्रैफिक’ जाम है।”

सुनने में यह किसी साइंस-फिक्शन फिल्म की स्क्रिप्ट लग सकती है, लेकिन वैज्ञानिकों और स्पेस एक्सपर्ट्स ने एक ऐसी चेतावनी दी है जो आपकी बेचैनी बढ़ा देगी। साल 2030 तक फ्लाइट डिले (उड़ान में देरी) की समस्या सिर्फ खराब मौसम तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि ‘स्पेस डेबरी’ यानी अंतरिक्ष में तैरता मलबा विमानों का रास्ता रोकेगा।

Space Debris: मलबे के कारण ‘अंधेरे में’ होगा हवाई सफर

आपको जानकर हैरानी होगी कि, एक रिपोर्ट के मुताबिक पृथ्वी की कक्षा (Orbit) में इस वक्त लाखों की संख्या में पुराने सैटेलाइट्स के टुकड़े, रॉकेट के अवशेष और मलबे के कण तैर रहे हैं। 2030 तक इनकी संख्या इतनी विकराल हो जाएगी कि अंतरिक्ष से मलबे के गिरने या उनके नीचे आने के खतरे के कारण एयर ट्रैफिक कंट्रोल को उड़ानों के रास्ते बार-बार बदलने पड़ेंगे।

यह मलबा हमारे जीपीएस (GPS) और संचार उपग्रहों को नुकसान पहुँचा सकता है, जिसके बिना एक पायलट के लिए विमान उड़ाना ‘अंधेरे में तीर चलाने’ जैसा होगा। खराब मौसम की देरी तो कुछ घंटों में ठीक हो जाती है, लेकिन अंतरिक्ष के मलबे से पैदा हुआ खतरा हफ्तों तक उड़ानों को ठप कर सकता है। (Space Debris)

 हाई-टेक जमीन और ‘जाम’ आसमान

हम एक ऐसे दौर की ओर बढ़ रहे हैं जहाँ अंतरिक्ष का कचरा केवल उपग्रहों के लिए नहीं, बल्कि आम आदमी की हवाई यात्रा के लिए भी ‘नासूर’ बन जाएगा। 2030 तक हालात इतने गंभीर हो सकते हैं कि हर दूसरी फ्लाइट पर ‘स्पेस रिस्क’ का साया होगा। (Space Debris)

​यह खबर उन करोड़ों मुसाफिरों के लिए किसी बुरे सपने से कम नहीं है जो वक्त बचाने के लिए हवाई सफर चुनते हैं। अगर 2030 तक इस ‘अंतरिक्षीय कचरे’ का समाधान नहीं ढूंढा गया, तो वह दिन दूर नहीं जब इंसान जमीन पर तो हाई-टेक होगा, लेकिन उसका आसमान पूरी तरह ‘जाम’ हो चुका होगा।

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